उत्तराखंड में सरकारी कर्मचारियों के लिए नए नियम लागू…महंगा मोबाइल, जमीन-जायदाद और बीमा एजेंसी को लेकर बड़ा बदलाव

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देहरादून। उत्तराखंड में सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर है। अब महंगा मोबाइल, टीवी या दूसरी चल संपत्ति खरीदने से लेकर जमीन-जायदाद के लेन-देन तक, कई मामलों में नए नियमों का पालन करना होगा। राज्य सरकार ने 2002 से लागू कर्मचारी आचरण नियमावली में संशोधन कर उत्तराखंड राज्य कर्मचारी आचरण संशोधन नियमावली-2026 लागू कर दी है। नए नियमों में कर्मचारियों की संपत्ति, परिवार के व्यावसायिक हितों और संपत्ति का ब्योरा देने से जुड़े प्रावधानों में बदलाव किया गया है।

कार्मिक विभाग की ओर से जारी अधिसूचना में नियमावली के नियम-15 को संशोधित किया गया है। अपर सचिव कार्मिक गिरधारी सिंह रावत की ओर से जारी अधिसूचना के बाद अब कर्मचारियों को चल और अचल संपत्ति से जुड़े लेन-देन में पहले से अधिक स्पष्ट प्रक्रियाओं का पालन करना होगा।

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दो माह की बेसिक सैलरी से महंगी चीज खरीदी तो देनी होगी सूचना

नई नियमावली के तहत यदि कोई सरकारी कर्मचारी अपनी दो माह की बेसिक सैलरी से अधिक कीमत की चल संपत्ति खरीदता है, तो उसे एक माह के भीतर अपने नियुक्ति प्राधिकारी को इसकी सूचना देनी होगी। मोबाइल, टीवी समेत अन्य चल संपत्तियां इसके दायरे में आ सकती हैं।

पहले इस संबंध में एक माह के वेतन या 5,000 रुपये, जो भी कम हो, का मानक लागू था। अब इसे कर्मचारी के दो माह के बेसिक वेतन से जोड़ दिया गया है।

हालांकि, यदि कर्मचारी ऐसी चल संपत्ति किसी ऐसे व्यक्ति से खरीदता है, जिसका सरकार के साथ लेन-देन का संबंध है, तो उसे खरीद से पहले नियुक्ति प्राधिकारी की अनुमति लेनी होगी।

जमीन खरीदने या बेचने में कब लेनी होगी अनुमति?

अचल संपत्ति से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है। अब कर्मचारी अपने या परिवार के नाम पर पट्टे, रेहन, भेंट या अन्य माध्यम से अचल संपत्ति प्राप्त करता है, तो इसकी सूचना नियुक्ति प्राधिकारी को देनी होगी। पहले ऐसे मामलों में पूर्व अनुमति लेने का प्रावधान था।

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लेकिन यदि अचल संपत्ति ऐसे व्यक्ति से प्राप्त की जाती है, जिसका सरकार के साथ लेन-देन का संबंध है, तो पहले से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। यानी संपत्ति के लेन-देन से पहले यह देखना जरूरी होगा कि संबंधित व्यक्ति या संस्था का सरकार के साथ व्यावसायिक संबंध तो नहीं है।

पत्नी या आश्रित के बीमा एजेंट बनने पर भी रोक

नई नियमावली में सरकारी कर्मचारियों के परिवार से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रावधान भी शामिल है। इसके तहत कर्मचारी के तैनाती वाले जिले में उसकी पत्नी या आश्रित व्यक्ति बीमा एजेंट के रूप में काम नहीं कर सकेगा। इस बदलाव के बाद कर्मचारियों को अपने परिवार के सदस्यों की व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े नियमों का भी ध्यान रखना होगा।

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हर साल देना होगा संपत्ति का हिसाब

सरकारी कर्मचारियों के लिए संपत्ति का विवरण देने की समयसीमा भी निर्धारित की गई है।

  • समूह-क, ख और ग के कर्मचारी: प्रथम नियुक्ति के समय और इसके बाद हर वर्ष संपत्ति का विवरण देना होगा।
  • समूह-घ के कर्मचारी: प्रथम नियुक्ति के समय और इसके बाद प्रत्येक पांच वर्ष में संपत्ति का विवरण देना होगा।

यह विवरण संबंधित नियुक्ति प्राधिकारी को प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।

2002 की नियमावली में 24 साल बाद संशोधन

उत्तराखंड में राज्य गठन के बाद वर्ष 2002 से कर्मचारी आचरण नियमावली लागू थी। अब करीब 24 साल बाद इसमें संशोधन कर नई नियमावली-2026 लागू की गई है। नियम-15 में किए गए बदलावों के तहत संपत्ति की खरीद, अचल संपत्ति के लेन-देन, संपत्ति का विवरण देने और परिवार के व्यावसायिक हितों से संबंधित प्रावधानों को संशोधित किया गया है।

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