Uttarakhand: देवभूमि में आस्था का महाउत्सव…चारधाम से लेकर जागेश्वर, कैंची धाम और आदि कैलाश तक उमड़ा आस्था का सैलाब

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देहरादून। उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन लगातार नए आयाम स्थापित कर रहा है। चारधाम यात्रा के साथ-साथ राज्य के प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिरों में इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या ने नए रिकॉर्ड कायम किए हैं। जागेश्वर, त्रियुगीनारायण, धारी देवी, पूर्णागिरि, कैंची धाम, यमुनोत्री और आदि कैलाश जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ इस बात का संकेत है कि देवभूमि अब देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र के रूप में तेजी से उभर रही है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार उत्तराखंड को वैश्विक आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने के लक्ष्य पर तेजी से काम कर रही है। चारधाम यात्रा को और अधिक सुविधाजनक बनाने के साथ-साथ अन्य पौराणिक मंदिरों को भी पर्यटन और आस्था के बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। मानसखंड मंदिरमाला मिशन के तहत मंदिरों का सौंदर्यीकरण, सड़क संपर्क, पार्किंग, पेयजल, शौचालय, विश्राम गृह और अन्य आधारभूत सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, जिसका सीधा असर श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या के रूप में सामने आ रहा है।

चारधाम यात्रा में 45.84 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

इस वर्ष चारधाम यात्रा ऐतिहासिक उपलब्धियों की ओर बढ़ रही है। अब तक 45.84 लाख श्रद्धालु बाबा केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के दर्शन कर चुके हैं। बेहतर सड़क संपर्क, आधुनिक सुविधाएं, स्वास्थ्य सेवाएं, सुरक्षा व्यवस्था और डिजिटल प्रबंधन ने यात्रा को पहले की तुलना में अधिक सुगम बनाया है।

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जागेश्वर और त्रियुगीनारायण में ढाई गुना तक बढ़ी आस्था

अल्मोड़ा स्थित विश्व प्रसिद्ध जागेश्वर धाम में जनवरी से जून के बीच 1.74 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या केवल 67,875 थी। यानी एक वर्ष में यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगभग ढाई गुना तक पहुंच गई।

इसी प्रकार भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह स्थल के रूप में प्रसिद्ध त्रियुगीनारायण मंदिर में भी इस वर्ष 3.40 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे हैं, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 1.36 लाख थी। धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ विवाह पर्यटन (डेस्टिनेशन वेडिंग) के कारण भी इस मंदिर की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है।

धारी देवी और पूर्णागिरि में भी उमड़ी आस्था

श्रीनगर-रुद्रप्रयाग मार्ग स्थित धारी देवी मंदिर में इस वर्ष 5.42 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, जबकि वर्ष 2025 में इसी अवधि में यह संख्या 2.83 लाख थी। वहीं, शक्तिपीठ पूर्णागिरि धाम में जून तक 20.91 लाख श्रद्धालु पहुंचे, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 14.35 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे। दोनों प्रमुख धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की संख्या में लगभग डेढ़ गुना तक वृद्धि दर्ज की गई है।

कैंची धाम में टूटा हर साल का रिकॉर्ड

बाबा नीम करौली महाराज की तपोस्थली कैंची धाम में श्रद्धालुओं का उत्साह लगातार बढ़ता जा रहा है। जनवरी से जून के बीच यहां 24.34 लाख श्रद्धालु पहुंचे, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। देश के साथ-साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं।

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यमुनोत्री ने बनाया नया इतिहास

कठिन पैदल यात्रा के बावजूद यमुनोत्री धाम में इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या ने नया इतिहास रच दिया है। दो अगस्त तक 6.55 लाख तीर्थयात्री दर्शन कर चुके हैं, जो धाम के इतिहास में सर्वाधिक है।

पिछले वर्षों के आंकड़े भी लगातार बढ़ती आस्था की गवाही देते हैं—

  • 2025 – 6.44 लाख
  • 2024 – 5.15 लाख
  • 2023 – 5.61 लाख
  • 2022 – 6.21 लाख
  • 2021 – 33,331

आदि कैलाश बना नई आस्था का बड़ा केंद्र

पिथौरागढ़ स्थित आदि कैलाश धाम भी तेजी से धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर उभर रहा है। इस वर्ष यात्रा शुरू होने के केवल दो महीनों में 52,441 श्रद्धालु यहां पहुंच चुके हैं। मानसून के चलते फिलहाल एक जुलाई से यात्रा स्थगित है।

वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के बाद आदि कैलाश को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली। इससे पहले वर्ष 2022 तक यहां सालाना दो हजार से भी कम श्रद्धालु पहुंचते थे, जबकि अब यह संख्या कई गुना बढ़ चुकी है।

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धार्मिक पर्यटन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिल रही मजबूती

धार्मिक पर्यटन में आई इस अभूतपूर्व वृद्धि का लाभ स्थानीय व्यापारियों, होटल व्यवसायियों, परिवहन सेवाओं, हस्तशिल्प, धार्मिक सामग्री विक्रेताओं और हजारों स्वरोजगार से जुड़े लोगों को मिल रहा है। राज्य सरकार का मानना है कि धार्मिक पर्यटन आने वाले वर्षों में उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का सबसे मजबूत आधार बनेगा।

पर्यटन स्थलों पर भी बढ़ रही रौनक

ऋषिकेश से सटे मुनिकीरेती, तपोवन और शिवपुरी क्षेत्र में भी पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जनवरी से जून तक यहां 15.97 लाख पर्यटक पहुंचे, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 13.62 लाख था। वहीं, कार्तिक स्वामी और सुरकंडा देवी मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

मुख्यमंत्री का बयान

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