हल्द्वानी। आध्यात्मिक जागृति, प्रेम और मानव-एकता के संदेश के साथ 79वें वार्षिक निरंकारी संत समागम का भव्य शुभारंभ हुआ। 23 से 26 अक्टूबर तक आयोजित चार दिवसीय समागम का उद्घाटन सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज और निरंकारी राजपिता रमित के पावन सान्निध्य में श्रद्धा एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ हुआ। समागम में देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु सतगुरु के दर्शन और उनके आध्यात्मिक संदेशों का लाभ ले रहे हैं।

समागम के पहले दिन ‘मानवता के नाम संदेश’ में सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज ने कहा कि वास्तविक जागृति तभी आती है, जब मनुष्य हर पल परमात्मा की उपस्थिति का एहसास करते हुए आध्यात्मिकता को अपने जीवन में धारण करता है। उन्होंने कहा कि संत समागम का मूल उद्देश्य मानव मन में आध्यात्मिक चेतना को जागृत रखना है, ताकि प्रत्येक व्यक्ति जीवन को परमात्मा के एहसास और पूर्ण जागरूकता के साथ जी सके।
सतगुरु माता ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने घर, परिवार, समाज और देश के प्रति जिम्मेदारियों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करना चाहिए। जाति, भाषा, क्षेत्र और स्वभाव के अंतर से ऊपर उठकर हर इंसान को प्रेम, सम्मान और अपनत्व के साथ स्वीकार करना ही सच्ची मानवता है। उन्होंने जोर दिया कि आध्यात्मिक जागृति केवल विचारों या दिखावे तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह व्यक्ति के व्यवहार, आचरण और सामाजिक दायित्वों में भी दिखाई देनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता जीवनभर बनाए रखने वाला भाव है। परिस्थितियां कैसी भी हों, परमात्मा की रजा को स्वीकार करते हुए हर पल को प्रसाद मानकर प्रसन्नता, संतोष और कृतज्ञता के साथ जीना ही सच्ची आध्यात्मिकता है।
भव्य शोभायात्रा से हुआ सतगुरु का स्वागत
समागम स्थल पर सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज का स्वागत संत निरंकारी मंडल के जनरल सेक्रेटरी सुखदेव सिंह ने पुष्पगुच्छ भेंट कर किया, जबकि मंडल की प्रधान राजकुमारी ने पुष्पहार अर्पित किया। वहीं, निरंकारी राजपिता रमित जी का स्वागत एस.एल. गर्ग ने पुष्पगुच्छ और एच.एस. चावला ने पुष्पहार भेंट कर किया।
इसके बाद सतगुरु माता और निरंकारी राजपिता को फूलों से सुसज्जित खुली पालकी में विराजमान कर भव्य शोभायात्रा के रूप में समागम पंडाल के मध्य से मुख्य मंच तक ले जाया गया। इस दौरान निरंकारी इंस्टीट्यूट ऑफ म्यूजिक एंड आर्ट्स (एनआईएमए) के 600 से अधिक विद्यार्थियों ने भरतनाट्यम और मधुर स्वागत गीत प्रस्तुत कर दिव्य युगल का अभिनंदन किया।
प्रेम और एकता के रंग में रंगा समागम स्थल
सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज और निरंकारी राजपिता रमित के सान्निध्य में श्रद्धालु भावविभोर नजर आए। दिव्य युगल ने अपने स्नेहपूर्ण आशीर्वाद से श्रद्धालुओं को निहाल किया। पूरे समागम स्थल पर प्रेम, भक्ति और आध्यात्मिक आनंद का वातावरण बना रहा।
विभिन्न संस्कृतियों, जातियों, धर्मों और भाषाओं से जुड़े श्रद्धालु आपसी भेदभाव से ऊपर उठकर प्रेम एवं मानव-एकता के सूत्र में बंधे दिखाई दिए। समागम का यह दृश्य सतगुरु के प्रेम, सद्भाव और विश्वबंधुत्व के संदेश को साकार करता नजर आया।
79वें वार्षिक निरंकारी संत समागम का पहला दिन आध्यात्मिक जागृति, मानवता, सेवा और विश्वबंधुत्व की भावना को समर्पित रहा। चार दिवसीय आयोजन के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक जीवन अपनाने, आपसी प्रेम बढ़ाने और मानवीय मूल्यों को व्यवहार में उतारने की प्रेरणा दी जा रही है।

