Haldwani: स्वच्छ ऊर्जा ही विकसित भारत की आधारशिला, ऊर्जा सुरक्षा और हरित विकास साथ-साथ जरूरी : डॉ. वी.के. सारस्वत

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हल्द्वानी। उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय में आयोजित विशेष व्याख्यान में भारत सरकार के पीएम-एसटीआईएसी (PM-STIAC) के सदस्य, पूर्व डीआरडीओ महानिदेशक, पूर्व नीति आयोग सदस्य तथा पद्मश्री एवं पद्मभूषण से सम्मानित प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. विजय कुमार सारस्वत ने कहा कि भारत के सुरक्षित, समृद्ध और विकसित भविष्य के लिए स्वच्छ ऊर्जा को अपनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा और हरित विकास एक-दूसरे के पूरक हैं और दोनों के बीच संतुलन बनाकर ही विकसित भारत का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस (सीआईक्यूए) की ओर से आयोजित “स्वच्छ ऊर्जा के साथ ऊर्जा सुरक्षा : हरित भविष्य की नई दिशा” विषयक विशेष व्याख्यान की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने की।

अपने संबोधन में डॉ. सारस्वत ने कहा कि भारत जैसे विकासशील देश में आर्थिक प्रगति के लिए ऊर्जा उत्पादन और ऊर्जा उपभोग में उल्लेखनीय वृद्धि आवश्यक है, लेकिन यह विकास पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा के सिद्धांतों के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और अन्य स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को भविष्य की ऊर्जा व्यवस्था का आधार बताते हुए इनके व्यापक उपयोग पर जोर दिया।

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उन्होंने उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय द्वारा ऊर्जा संरक्षण, ग्रीन कैंपस और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय गुणवत्तापूर्ण दूरस्थ शिक्षा के साथ-साथ सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को भी प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि देश में दूरस्थ शिक्षा की गुणवत्ता में लगातार सुधार हुआ है और इस परिवर्तन में मुक्त विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

जलवायु परिवर्तन पर जताई चिंता

डॉ. सारस्वत ने कहा कि वैश्विक तापमान में लगातार हो रही वृद्धि पूरी दुनिया के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी है। भारत के नेट-ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इसे प्राप्त करने के लिए सरकार, शैक्षणिक संस्थानों, उद्योगों और आम नागरिकों को मिलकर कार्य करना होगा।

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उन्होंने वृक्षारोपण, स्वच्छता, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण को जनभागीदारी से जोड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और हरित भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है।

ग्रीन कैंपस के लिए विश्वविद्यालय प्रतिबद्ध

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने कहा कि उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा दक्षता और सतत विकास के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। विश्वविद्यालय परिसर में ग्रीन कैंपस की अवधारणा को साकार करने के लिए कई प्रभावी पहल की जा रही हैं।

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उन्होंने कहा कि डॉ. वी.के. सारस्वत का व्याख्यान विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए अत्यंत प्रेरणादायी रहा, जिससे ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरणीय उत्तरदायित्व के महत्व को समझने का अवसर मिला। विशेष व्याख्यान के बाद डॉ. सारस्वत ने विश्वविद्यालय परिसर में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में सीआईक्यूए के निदेशक प्रो. गिरिजा प्रसाद पांडे ने अतिथियों का स्वागत एवं कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। निदेशक (अकादमिक) प्रो. पी.डी. पंत ने धन्यवाद ज्ञापित किया, जबकि कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुचित्रा अवस्थी ने किया। इस अवसर पर कुलसचिव खेमराज भट्ट, परीक्षा नियंत्रक प्रो. सोमेश कुमार, विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, शोधार्थी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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