उत्तराखंड के 1 लाख से ज्यादा निवेशकों से 800 करोड़ जुटाने का आरोप, मुख्य आरोपी पत्नी संग विदेश फरार
देहरादून: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने बहुचर्चित एलयूसीसी चिटफंड घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए सरगना समेत पांच आरोपियों को देश के अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में सुशील गोखरू, राजेंद्र सिंह बिष्ट, तरुण कुमार मौर्य, गौरव रोहिल्ला और ममता भंडारी शामिल हैं।
सीबीआई के अनुसार यह मामला लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसायटी (एलयूसीसी) से जुड़ा है, जिस पर उत्तराखंड में बड़े स्तर पर निवेशकों से धोखाधड़ी करने का आरोप है।
गौरतलब है कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय की नैनीताल पीठ ने वर्ष 2025 में इस घोटाले से जुड़ी सभी एफआईआर सीबीआई को ट्रांसफर करने के आदेश दिए थे। इसके बाद सीबीआई ने 26 नवंबर 2025 को भारतीय दंड संहिता, भारतीय न्याय संहिता, उत्तराखंड निवेशकों के हितों का संरक्षण अधिनियम और अनियमित जमा योजनाओं पर प्रतिबंध अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था।
जांच एजेंसी के मुताबिक अब तक की जांच में सामने आया है कि उत्तराखंड में करीब एक लाख से अधिक लोगों को एलयूसीसी की विभिन्न निवेश योजनाओं में पैसा लगाने के लिए प्रलोभन दिया गया। निवेशकों से लगभग 800 करोड़ रुपये जमा कराए गए, जबकि धोखाधड़ी की राशि 400 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।
सीबीआई ने बताया कि मामले की जांच दिन-प्रतिदिन के आधार पर की जा रही है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए तकनीकी निगरानी और विशेष टीमों की मदद ली जा रही है।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने निवेशकों से ठगी गई रकम से कई अचल संपत्तियां खरीदी थीं। इन संपत्तियों का विवरण उत्तराखंड सरकार के वित्त विभाग को भेजा गया है, ताकि उन्हें फ्रीज कर पीड़ित निवेशकों को राहत दिलाई जा सके।
सीबीआई के अनुसार इस मामले का मुख्य आरोपी समीर अग्रवाल अपनी पत्नी सानिया अग्रवाल के साथ विदेश फरार है। उनके खिलाफ नोटिस और सर्कुलर जारी किए गए हैं। गिरफ्तार सभी आरोपियों को सक्षम न्यायालय में पेश किया जा रहा है। मामले में आगे की जांच जारी है।

