पश्चिम एशिया संकट का असर भारत पर गहराया, RBI गवर्नर बोले- लंबे समय तक हालात बिगड़े तो बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम

खबर शेयर करें

नई दिल्ली: ज्यूरिख में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों और भारतीय अर्थव्यवस्था पर उसके असर को लेकर बड़ा बयान दिया है। कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है और इसका आर्थिक दबाव भारत पर भी साफ दिखाई देने लगा है।

उन्होंने कहा कि फिलहाल सरकार पेट्रोल और डीजल की बढ़ी हुई लागत का बोझ खुद वहन कर रही है, लेकिन यदि पश्चिम एशिया में जारी तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो आम उपभोक्ताओं को ईंधन की बढ़ी हुई कीमतों का सामना करना पड़ सकता है।

संजय मल्होत्रा ने बताया कि सरकार ने अब तक ड्यूटी में कटौती और कुछ नियंत्रित गैस कीमतों में मामूली बढ़ोतरी जैसे कदम उठाकर खुदरा ईंधन कीमतों को स्थिर बनाए रखा है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि पिछले 75 दिनों से अधिक समय से जारी वैश्विक व्यवधान को लंबे समय तक इसी तरह संभालना संभव नहीं होगा।

यह भी पढ़ें 👉  हल्द्वानी: एसएसपी साहब!…शराब माफियाओं पर कब कसी जाएगी नकेल?

भारत की अर्थव्यवस्था पर मध्य पूर्व का बड़ा असर

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि पश्चिम एशिया भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद अहम क्षेत्र है। उन्होंने बताया कि भारत के कुल आयात-निर्यात का लगभग छठा हिस्सा इसी क्षेत्र से जुड़ा है। इसके अलावा देश को मिलने वाले कुल रेमिटेंस का करीब 40 प्रतिशत, उर्वरक आयात का 40 प्रतिशत और गैस आपूर्ति का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा भी इसी क्षेत्र पर निर्भर करता है।

यह भी पढ़ें 👉  स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के शिल्पकार राम वनजी सुतार का निधन, 100 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

उन्होंने कहा कि ऐसे में मध्य पूर्व में किसी भी तरह का युद्ध, तनाव या आपूर्ति बाधित होने की स्थिति भारत की अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन के लिए बड़ा जोखिम बन सकती है।

महंगाई पर भी बढ़ रहा दबाव

संजय मल्होत्रा ने कहा कि आपूर्ति शृंखला में आने वाले झटकों का सीधा असर घरेलू महंगाई पर पड़ता है। भारत में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में खाद्य पदार्थों की हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत होने के कारण महंगाई का असर आम लोगों पर तेजी से दिखाई देता है।

उन्होंने स्वीकार किया कि केवल मौद्रिक नीति के जरिए ऐसे बड़े आपूर्ति संकटों से पूरी तरह नहीं निपटा जा सकता। हालांकि उन्होंने कहा कि यदि महंगाई का असर अर्थव्यवस्था के दूसरे क्षेत्रों तक फैलने लगता है, तो नीति निर्माताओं को हस्तक्षेप करना ही होगा।

यह भी पढ़ें 👉  प्रसव के बाद हंगामा: दो अल्ट्रासाउंड में जुड़वा, लेकिन अस्पताल ने थमाई सिर्फ एक बच्ची, जांच शुरू

सरकार ने घटाया राजकोषीय घाटा

आरबीआई गवर्नर ने इस दौरान सरकार की वित्तीय अनुशासन नीति की सराहना भी की। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के दौरान 9.2 प्रतिशत तक पहुंच चुके राजकोषीय घाटे को सरकार ने घटाकर करीब 4.3 प्रतिशत तक लाने में सफलता हासिल की है।

गवर्नर के बयान को इस संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि यदि वैश्विक हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो आने वाले समय में भारत में ईंधन कीमतों और महंगाई पर दबाव और बढ़ सकता है।

ADVERTISEMENTS

You cannot copy content of this page