रामनगर (नैनीताल)। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने अचानक भारतीय वन सेवा (आईएफएस) से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने का निर्णय लिया है। उन्होंने अपने इस्तीफे की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से साझा की। उनके इस फैसले से वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों में भी हैरानी है। हालांकि, उन्होंने इस्तीफे के पीछे व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया है।
मूल रूप से उत्तराखंड के पौड़ी जिले के कोटद्वार निवासी डॉ. साकेत बडोला वर्ष 2008 बैच के आईएफएस अधिकारी हैं। वन सेवा में आने से पहले वह पशु चिकित्सक के रूप में कार्य कर चुके हैं। वर्ष 2009 में उन्होंने तराई पश्चिमी वन प्रभाग में प्रशिक्षु डीएफओ के रूप में भी सेवाएं दी थीं।
इसके बाद वह कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में उपनिदेशक रहे। वन्यजीव तस्करी की रोकथाम के लिए गठित ट्रैफिकिंग सेल की जिम्मेदारी संभालने के साथ ही उन्होंने राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक के रूप में भी कार्य किया। राजाजी टाइगर रिजर्व से स्थानांतरण के बाद जुलाई 2024 में उन्हें कॉर्बेट टाइगर रिजर्व का निदेशक बनाया गया था। पिछले वर्ष उन्हें मुख्य वन संरक्षक के पद पर पदोन्नति भी मिली थी।
सोशल मीडिया पर साझा किया इस्तीफे का फैसला
इन दिनों डॉ. बडोला दस दिन के अवकाश पर चल रहे थे। शुक्रवार को उन्होंने सोशल मीडिया पर भारतीय वन सेवा से स्वेच्छा से सेवानिवृत्त होने के निर्णय की जानकारी दी। इसके बाद वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच उनके फैसले को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं।
डॉ. बडोला ने कहा कि उन्होंने शासन को अपना इस्तीफा भेज दिया है। हालांकि, उन्होंने इसके पीछे किसी विशेष वजह का खुलासा नहीं किया।
बोले- सेवाकाल में अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास किया
अपने संदेश में डॉ. बडोला ने लिखा कि उन्होंने व्यक्तिगत कारणों से भारतीय वन सेवा से स्वेच्छा से सेवानिवृत्त होने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि एक साधारण परिवार के व्यक्ति के लिए प्रतिष्ठित भारतीय सेवा में शामिल होना किसी सपने से कम नहीं था।
उन्होंने अपने पूरे सेवाकाल के दौरान अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास करने की बात कही। साथ ही उम्मीद जताई कि भविष्य में भी वह इसी तरह अपना योगदान देते रहेंगे और राष्ट्र निर्माण में हर संभव तरीके से भूमिका निभाएंगे।

