पेंटागन रिपोर्ट से मचा भूचाल…‘ईरान अब भी मजबूत’, ट्रंप के दावों पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक तनाव

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वॉशिंगटन। अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन की खुफिया शाखा की एक नई रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज कर दी है। रिपोर्ट में साफ संकेत दिए गए हैं कि हालिया संघर्षों के बावजूद ईरान की सैन्य क्षमता अभी भी काफी मजबूत बनी हुई है। इस आकलन ने अमेरिकी नेतृत्व, खासकर पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप और अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने हाल ही में दावा किया था कि टकराव के दौरान ईरान की सैन्य ताकत को भारी नुकसान पहुंचा है। हालांकि, पेंटागन की आंतरिक खुफिया रिपोर्ट इस दावे से मेल नहीं खाती और बताती है कि ईरान का सैन्य ढांचा अभी भी प्रभावी और सक्रिय स्थिति में है।

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इस बीच ट्रंप ने एक बड़ा राजनीतिक कदम उठाते हुए ईरान के साथ युद्धविराम को आगे बढ़ाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि यह फैसला पाकिस्तान के नेतृत्व द्वारा संभावित सैन्य कार्रवाई को टालने की अपील के बाद लिया गया। यह घोषणा युद्धविराम की समय-सीमा खत्म होने से कुछ घंटे पहले की गई, जिससे कूटनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है।

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वहीं, ईरान की ओर से इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरानी संसद अध्यक्ष के सलाहकार महदी मोहाम्मदी ने अमेरिका के इस कदम को सिरे से खारिज करते हुए कहा, “हारने वाला पक्ष शर्तें तय नहीं कर सकता।” उन्होंने साफ तौर पर संकेत दिया कि ईरान अमेरिकी दबाव या घेराबंदी को स्वीकार करने के मूड में नहीं है।

मोहाम्मदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “घेराबंदी और बमबारी में कोई खास अंतर नहीं है, और दोनों का जवाब समान तरीके से दिया जाना चाहिए।” उनके इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि क्षेत्र में तनाव कम होने के बजाय और बढ़ सकता है।

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गौरतलब है कि इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच करीब 21 घंटे तक चली बातचीत भी किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। इसके चलते पश्चिम एशिया में अस्थिरता और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि पश्चिम एशिया में ईरान की सैन्य उपस्थिति अभी भी मजबूत और प्रभावशाली बनी हुई है, जिसे पूरी तरह कमजोर नहीं किया जा सका है।

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