वॉशिंगटन। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा भरोसा जताया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता निश्चित रूप से होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना अच्छा मित्र बताते हुए ट्रंप ने कहा कि भारत और अमेरिका के संबंध बेहद मजबूत हैं और व्यापार वार्ता सही दिशा में आगे बढ़ रही है।
व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा, “हम समझौते तक पहुंचेंगे, क्योंकि मुझे आपके प्रधानमंत्री बहुत पसंद हैं। वह मेरे अच्छे मित्र हैं। हमारे संबंध बहुत अच्छे हैं और हम एक व्यापार समझौता करेंगे।”
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत अंतिम चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। हाल ही में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने भारत का दौरा किया, जहां चार दिनों तक दोनों देशों के अधिकारियों के बीच विस्तृत चर्चा हुई। वार्ता के बाद भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि बातचीत सहयोगात्मक और सकारात्मक माहौल में हुई तथा दोनों देशों ने ऐसे समझौते की दिशा में काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई, जिससे व्यापार और आर्थिक संबंधों को नई मजबूती मिल सके।
ट्रंप ने बातचीत के दौरान भारत की आयात शुल्क नीति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक भारत अमेरिकी उत्पादों पर ऊंचे टैरिफ लगाता रहा, जिससे अमेरिका को समान लाभ नहीं मिल पाया। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अब परिस्थितियां बदल रही हैं और अमेरिका को भारत के साथ व्यापार से बेहतर आर्थिक लाभ मिल रहा है।
उधर, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल पहले ही संकेत दे चुके हैं कि व्यापार समझौते के पहले चरण से जुड़े अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है। अब केवल कुछ तकनीकी और छोटे बिंदुओं पर चर्चा बाकी है। फरवरी में दोनों देशों ने समझौते का प्रारूप तैयार कर लिया था, लेकिन बाद में अमेरिकी शुल्क नीति में बदलाव और न्यायिक फैसलों के चलते कुछ प्रावधानों की दोबारा समीक्षा की जा रही है।
जानकारों के अनुसार, भारत ने समझौते के तहत कई अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों पर शुल्क कम करने या हटाने का प्रस्ताव दिया है। इसके अलावा भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से करीब 500 अरब डॉलर मूल्य के ऊर्जा उत्पाद, विमान, प्रौद्योगिकी उपकरण, कीमती धातुएं और कोकिंग कोल खरीदने की इच्छा भी जताई है। माना जा रहा है कि यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है तो दोनों देशों के व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों को नई गति मिलेगी।
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का अमेरिका को निर्यात 87.3 अरब डॉलर रहा, जबकि अमेरिका से आयात 52.9 अरब डॉलर दर्ज किया गया। अमेरिका वर्तमान में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
इस बीच अमेरिका ने कई देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की नई योजना भी पेश की है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (यूएसटीआर) ने 54 देशों और अर्थव्यवस्थाओं की सूची जारी की है, जिनमें भारत भी शामिल है। अमेरिका का आरोप है कि इन देशों ने जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं।
यूएसटीआर के प्रस्ताव के अनुसार, कुछ देशों पर 10 प्रतिशत और अन्य पर 12.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है। हालांकि भारत और अमेरिका के बीच जारी व्यापार वार्ता को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देश ऐसे समाधान की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जिससे व्यापारिक हितों की रक्षा के साथ आर्थिक सहयोग और मजबूत हो सके।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। यदि वार्ता सफल रहती है तो यह समझौता निवेश, ऊर्जा, तकनीक और विनिर्माण क्षेत्रों में नए अवसरों के द्वार खोल सकता है।

