21 लाख की नौकरी छोड़ बना ‘आईआईटियन बाबा’, अब दुष्कर्म और शोषण के आरोपों में जांच के घेरे में

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मथुरा। आईआईटी रुड़की से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद मुंबई में 21 लाख रुपये सालाना पैकेज वाली नौकरी छोड़कर आध्यात्मिक जीवन अपनाने वाले अभिषेक मिश्रा उर्फ आदिकर्ता नारायण दास अब गंभीर आरोपों के चलते सुर्खियों में हैं। खुद को आध्यात्मिक गुरु और श्रीकृष्ण का अवतार बताने वाले इस तथाकथित बाबा पर युवतियों को बहलाने, उनका शोषण करने और भक्ति की आड़ में नेटवर्क चलाने के आरोप लगे हैं। पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है।

पुलिस के अनुसार, मूल रूप से ओडिशा के भुवनेश्वर निवासी अभिषेक मिश्रा ने वर्ष 2021 में आईआईटी रुड़की से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की थी। इसके बाद उसे मुंबई की एक प्रतिष्ठित कंपनी में 21 लाख रुपये वार्षिक पैकेज पर नौकरी मिली। लेकिन कुछ समय बाद उसने नौकरी छोड़ दी और मथुरा के राधाकुंड में आकर आध्यात्मिक जीवन अपनाने लगा।

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बताया जा रहा है कि अभिषेक की मां, जो एक सरकारी विद्यालय में प्रधानाध्यापिका थीं, सेवानिवृत्ति के बाद भक्ति के उद्देश्य से राधाकुंड आ गई थीं। अभिषेक भी समय-समय पर यहां आता था और धीरे-धीरे उसका मन अध्यात्म की ओर आकर्षित होने लगा। करीब एक वर्ष नौकरी करने के बाद उसने कॉर्पोरेट जीवन छोड़ दिया और स्थायी रूप से राधाकुंड आ गया।

कुछ समय बाद उसने अपना नाम बदलकर आदिकर्ता नारायण दास रख लिया और धार्मिक प्रवचन तथा आध्यात्मिक गतिविधियों के माध्यम से युवाओं को जोड़ना शुरू कर दिया। जांच में सामने आया है कि वह सोशल मीडिया और ऑनलाइन जूम मीटिंग्स के जरिए देशभर के बीटेक, एमटेक और अन्य उच्च शिक्षित युवक-युवतियों से संपर्क करता था। अध्यात्म और ज्ञान के नाम पर लोगों को प्रभावित कर उन्हें राधाकुंड बुलाने का सिलसिला शुरू हुआ।

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मामला तब उजागर हुआ जब छत्तीसगढ़ के कोरबा क्षेत्र की एक नर्सिंग छात्रा ने आरोप लगाया कि उसे नशीला पदार्थ मिलाकर पेय पदार्थ पिलाया गया और उसके साथ दुष्कर्म किया गया। शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

जांच के दौरान तीन अन्य युवतियों और एक युवक ने भी आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि आश्रम में युवाओं पर मानसिक दबाव बनाया जाता था और विरोध करने वालों को डराया-धमकाया जाता था।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपी के साथ कुछ ऐसे लोग भी जुड़े थे जो उसके लिए सुरक्षा कवच का काम करते थे। ये लोग आश्रम के भीतर उसकी गतिविधियों पर सवाल उठाने वालों को चुप कराने और भय का माहौल बनाने में भूमिका निभाते थे। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क और उससे जुड़े लोगों की तलाश कर रही है।

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जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी का लैपटॉप भी बरामद किया है। अधिकारियों को उम्मीद है कि डिजिटल साक्ष्यों की जांच से वित्तीय लेन-देन, ऑनलाइन गतिविधियों, देश-विदेश में जुड़े संपर्कों और कथित नेटवर्क से संबंधित कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।

एसपी ग्रामीण सुरेश चंद्र रावत ने बताया कि मामले की जांच जारी है और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। पुलिस हर पहलू की गहनता से पड़ताल कर रही है। फिलहाल आरोपों की सत्यता की जांच की जा रही है और आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी।

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