टैक्स चोरी पर ‘इनसाइड गेम’…कार्रवाई सिर्फ दिखावे तक सीमित, बड़े खिलाड़ियों को राहत

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हल्द्वानी। उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में ट्रांसपोर्ट सेक्टर के जरिए हो रही कथित टैक्स चोरी को लेकर राज्य कर विभाग की कार्रवाई सवालों के घेरे में है। आरोप है कि विभाग ने सख्ती का दिखावा तो शुरू किया है, लेकिन निशाना केवल छोटे वाहन और छोटे कारोबारी ही बन रहे हैं, जबकि बड़े स्तर पर टैक्स चोरी करने वाले ट्रांसपोर्टरों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

सूत्रों के मुताबिक विभागीय टीमों ने हाल के दिनों में चेकिंग अभियान चलाकर कई छोटे वाहनों का भौतिक सत्यापन किया और अनियमितताएं मिलने पर अर्थदंड भी लगाया। हालांकि यह कार्रवाई रुद्रपुर, काशीपुर, किच्छा और हल्द्वानी जैसे प्रमुख केंद्रों में बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी के आरोपों के बीच नाकाफी मानी जा रही है।

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‘संरक्षण’ में चलता खेल?

सूत्रों का दावा है कि टैक्स चोरी के इस कथित नेटवर्क में कुछ अधिकारियों की मिलीभगत भी सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि उच्च स्तर से सख्ती के संकेत मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों ने कुछ समय के लिए टैक्स चोरी के माल की आवाजाही रोकने के निर्देश दिए हैं। वहीं जिन कारोबारियों से कथित रूप से गहरे संबंध हैं, उन्हें “अपने जोखिम पर” माल मंगाने की बात कही गई है।

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इस कथित ‘फरमान’ के बाद ट्रांसपोर्ट कारोबारियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। यदि माल पकड़ा जाता है, तो पूरी जिम्मेदारी कारोबारी पर ही आएगी—ऐसा संदेश भी दिए जाने की चर्चा है।

अंदरखाने बढ़ी नाराजगी

सूत्र बताते हैं कि टैक्स चोरी से होने वाली कमाई का एक हिस्सा कथित तौर पर संबंधित अधिकारियों तक पहुंचता रहा है। ऐसे में अचानक सख्ती और माल की आवाजाही पर रोक से कई कारोबारियों में नाराजगी भी पनप रही है। उनका कहना है कि “पहले से तय व्यवस्थाओं” के बावजूद अब जोखिम पूरी तरह उन पर डाल दिया गया है।

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बड़े खिलाड़ियों पर कब कार्रवाई?

मौजूदा स्थिति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विभाग बड़े स्तर पर टैक्स चोरी में लिप्त ट्रांसपोर्टरों पर भी सख्त कार्रवाई करेगा या अभियान छोटे स्तर तक ही सीमित रहेगा। जानकारों का मानना है कि यदि पारदर्शी और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई, तो राजस्व को भारी नुकसान के साथ-साथ विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठते रहेंगे।

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