करुणा, प्रेम और सह-अस्तित्व का संदेश लेकर मना ‘मानव एकता दिवस’, हल्द्वानी में विशाल सत्संग

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हल्द्वानी: करुणा, प्रेम और मानवता के उच्च आदर्शों को समर्पित ‘मानव एकता दिवस’ के अवसर पर हल्द्वानी में आध्यात्मिक चेतना और सेवा-भाव का अद्भुत संगम देखने को मिला। संत निरंकारी सत्संग भवन, गौजाजाली बरेली रोड में आयोजित भव्य सत्संग में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर मानव एकता, परोपकार और सह-अस्तित्व का संदेश आत्मसात किया।

यह आयोजन युगदृष्टा बाबा गुरबचन सिंह जी की पावन स्मृति में, सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता जी के आशीर्वाद से सम्पन्न हुआ। सत्संग के दौरान हल्द्वानी ब्रांच के प्रचारक गोविन्द सिंह बिष्ट ने अपने संबोधन में कहा कि सच्चे ज्ञान के माध्यम से समाज को अंधविश्वास और कुरीतियों से मुक्त कर सेवा, सद्भाव और सकारात्मक सोच की दिशा में अग्रसर करना ही मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य है।

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उन्होंने बताया कि बाबा गुरबचन सिंह जी के मार्गदर्शन में नशामुक्ति, सादा विवाह और समाजसेवा जैसे अभियानों की मजबूत नींव रखी गई, जिसे आगे बढ़ाते हुए बाबा हरदेव सिंह जी ने “रक्त नाड़ियों में बहे, नालियों में नहीं” का प्रेरणादायक संदेश देकर रक्तदान को सेवा का अभिन्न अंग बना दिया।

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इस अवसर पर देशभर के लगभग 200 स्थानों पर रक्तदान शिविरों का आयोजन किया गया, जिसमें करीब 40,000 यूनिट रक्त संग्रहित किया गया। संत निरंकारी मण्डल के सचिव जोगिन्दर सुखीजा ने जानकारी दी कि वर्षभर में 705 स्थानों पर ऐसे शिविर आयोजित किए जाएंगे, जो मानव सेवा की इस परंपरा को और सशक्त बनाएंगे।

उल्लेखनीय है कि पिछले चार दशकों से जारी इस सेवा अभियान के तहत अब तक 9,174 रक्तदान शिविरों के माध्यम से लगभग 15 लाख यूनिट रक्त एकत्रित किया जा चुका है, जो मानवता के प्रति मिशन की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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पूरे आयोजन के दौरान स्वच्छता, अनुशासन और सेवा-भाव का विशेष ध्यान रखा गया। यह कार्यक्रम केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि करुणा, प्रेम और सामाजिक उत्तरदायित्व का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया, जिसने “मानव को मानव हो प्यारा, एक-दूजे का बने सहारा” के संदेश को सार्थक रूप में साकार किया।

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