ईरान की मिसाइल ताकत पर ट्रंप का बड़ा दावा, बोले- सैन्य क्षमता का बड़ा हिस्सा तबाह

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वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान की सैन्य क्षमता को लेकर बड़ा दावा करते हुए कहा है कि हालिया संघर्ष के बाद तेहरान की मिसाइल ताकत को गंभीर नुकसान पहुंचा है। उनके अनुसार ईरान के पास अब अपनी पूर्व मिसाइल क्षमता का केवल एक छोटा हिस्सा ही बचा है और वह फिलहाल परमाणु हथियार विकसित करने की स्थिति में भी नहीं है।

एनबीसी न्यूज के चर्चित कार्यक्रम Meet the Press को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी कार्रवाई ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को बुरी तरह प्रभावित किया है। उन्होंने दावा किया कि ईरान के पास अब उसकी पहले की मिसाइल क्षमता का केवल 21 से 22 प्रतिशत हिस्सा ही शेष रह गया है।

ट्रंप ने कहा, “ईरान के पास अभी भी मिसाइलें हैं, लेकिन जब हमने अभियान शुरू किया था, तब जितनी थीं, अब उतनी नहीं हैं। उनकी क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है।”

खुफिया रिपोर्टों से अलग है ट्रंप का दावा

हालांकि ट्रंप के दावे और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के आकलन में अंतर दिखाई देता है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी सांसदों को दी गई एक गोपनीय ब्रीफिंग में बताया गया था कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास स्थित अपनी अधिकांश मिसाइल साइटों पर फिर से परिचालन नियंत्रण स्थापित कर लिया है।

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रिपोर्ट के मुताबिक, संघर्ष से पहले मौजूद मिसाइल भंडार का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा अब भी ईरान के पास मौजूद है। इससे ट्रंप के दावों और खुफिया एजेंसियों के मूल्यांकन के बीच स्पष्ट अंतर सामने आता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में हालात सामान्य होने का भरोसा

होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव पर ट्रंप ने विश्वास जताया कि स्थिति जल्द सामान्य हो जाएगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने क्षेत्र में कई वाणिज्यिक तेल टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की है।

हालांकि उन्होंने सटीक संख्या बताने से इनकार करते हुए कहा कि “बहुत सारे” जहाजों को सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराया गया है।

ट्रंप का मानना है कि क्षेत्रीय तनाव कम होने के बाद वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता लौटेगी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिल सकती है। उन्होंने कहा कि हालात पूरी तरह सामान्य होने पर तेल की कीमतें पहले से भी नीचे आ सकती हैं।

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ईंधन कीमतों पर बढ़ा राजनीतिक दबाव

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका में पेट्रोल और ऊर्जा कीमतें राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बनी हुई हैं। आगामी मध्यावधि चुनावों से पहले महंगाई और ईंधन की बढ़ती लागत को लेकर रिपब्लिकन पार्टी और ट्रंप प्रशासन पर दबाव बना हुआ है।

विश्लेषकों का मानना है कि मध्य-पूर्व में स्थिरता और तेल की कीमतों में कमी अमेरिकी उपभोक्ताओं को राहत देने के साथ-साथ राजनीतिक रूप से भी ट्रंप प्रशासन के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।

ईरान के साथ रिश्तों पर भी दिए सकारात्मक संकेत

शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने ईरान के साथ मौजूदा हालात को लेकर आशावादी रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि “ईरान के साथ स्थिति काफी अच्छी लग रही है,” हालांकि उन्होंने इसके बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी।

इस बयान को दोनों देशों के बीच तनाव कम होने की संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि अब तक किसी नई कूटनीतिक पहल की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।

अर्थव्यवस्था और रोजगार आंकड़ों की भी सराहना

विदेश नीति के मुद्दों के साथ-साथ ट्रंप ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लेकर भी सकारात्मक तस्वीर पेश की। उन्होंने हाल में जारी रोजगार आंकड़ों को उम्मीद से बेहतर बताते हुए कहा कि देश में विनिर्माण क्षेत्र में निवेश तेजी से बढ़ रहा है और नई फैक्ट्रियां स्थापित की जा रही हैं।

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ट्रंप ने दावा किया कि उनकी आर्थिक नीतियों के कारण निवेश और रोजगार में वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि मजबूत आर्थिक विकास का अर्थ हमेशा महंगाई बढ़ना नहीं होता और बेहतर रोजगार आंकड़े अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत हैं।

साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि वे ब्याज दरों में कटौती के पक्षधर हैं, हालांकि अंतिम निर्णय अमेरिकी केंद्रीय बैंक के अधिकार क्षेत्र में आता है।

कई मोर्चों पर केंद्रित है प्रशासन

ट्रंप प्रशासन इस समय विदेश नीति, ऊर्जा सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), निवेश, रोजगार और महंगाई जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर एक साथ काम कर रहा है। ऐसे में ईरान, तेल बाजार और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लेकर राष्ट्रपति के ताजा बयान आने वाले महीनों में वैश्विक और घरेलू राजनीति दोनों के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

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