रोम/पेरिस/तिराना: यूरोप के कई देशों में महंगाई, बढ़ती ईंधन कीमतों, आवास संकट और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति को लेकर लोगों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई देने लगा है। अल्बानिया की राजधानी तिराना में सरकार विरोधी प्रदर्शन लगातार आठवें दिन भी जारी रहे। इटली में सप्ताहांत की हिंसा और लूटपाट के बाद सरकार ने सख्त सुरक्षा उपायों को मंजूरी दी है, जबकि दक्षिणी इटली में ट्रक चालकों की हड़ताल से सुपरमार्केट और पेट्रोल पंपों पर आपूर्ति प्रभावित होने लगी है। वहीं, फ्रांस के कई इलाकों में हिंसा के बाद कर्फ्यू और सुरक्षा प्रतिबंध बढ़ा दिए गए हैं। स्पेन और पुर्तगाल में भी आवास की बढ़ती कीमतों के खिलाफ विरोध तेज हो रहा है।
अल्बानिया में सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरे छात्र
अल्बानिया की राजधानी तिराना में मंगलवार को प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच फिर झड़पें हुईं। पुलिस ने भीड़ को पीछे हटाने के लिए आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। लगातार आठवें दिन जारी आंदोलन में अब हाईस्कूल और विश्वविद्यालयों के छात्र भी शामिल हो गए हैं। छात्र ट्यूशन फीस कम करने, शिक्षा पर सरकारी निवेश बढ़ाने और शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। व्यापक आंदोलन के बीच समाजवादी प्रधानमंत्री एदी रामा के इस्तीफे की मांग भी उठ रही है।
पिछले कई दिनों से प्रदर्शनकारी पुलिस पर पत्थर, आग लगाने वाली बोतलें, फ्लेयर्स और पटाखे फेंक रहे हैं। पुलिस ने जवाब में लाठीचार्ज, आंसू गैस और वाटर कैनन का सहारा लिया है। राजधानी के मध्य हिस्से में लगातार तनाव बना हुआ है।
यह आंदोलन कई महीनों से चल रहे प्रदर्शनों के बीच और तेज हुआ है। तथाकथित फ्लेमिंगो आंदोलन ने देश के दक्षिणी तट पर प्रस्तावित एक बड़े लग्जरी पर्यटन प्रोजेक्ट के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किए थे। यह परियोजना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर द्वारा स्थापित निवेश कंपनी से जुड़ी बताई गई है।
प्रधानमंत्री एदी रामा ने मंगलवार को शिक्षकों और तिराना के स्कूल प्रतिनिधियों से मुलाकात के बाद प्रदर्शनकारियों के एक वर्ग पर हिंसा के जरिए सरकार गिराने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि महंगाई, आवास, सुरक्षित भविष्य और बेहतर अवसरों से जुड़ी लोगों की चिंताएं वास्तविक हैं, लेकिन कुछ लोग इन समस्याओं का इस्तेमाल हिंसा फैलाने के लिए कर रहे हैं।
इटली में हिंसा के बाद सख्त सुरक्षा कानून
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार ने सप्ताहांत में कई शहरों में हुई हिंसा और लूटपाट के बाद मंगलवार को कड़े सुरक्षा उपायों को मंजूरी दी। नए प्रावधानों में प्रदर्शन के दौरान हिंसक गतिविधियों, दंगों और तोड़फोड़ के मामलों में सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। नाबालिगों के अपराधों के कुछ मामलों में उनके माता-पिता को भी आर्थिक रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकेगा।
वित्तीय केंद्र मिलान सहित उत्तरी इटली के कई शहरों में सप्ताहांत के दौरान युवाओं के समूहों ने दुकानों के शीशे तोड़े, लूटपाट की और पुलिस पर हमले किए थे। इसके बाद सरकार ने सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा नियम कड़े करने का फैसला लिया।
नए नियमों के तहत कम से कम पांच लोगों के समूह में प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालने के मामलों में पांच साल तक की जेल और अधिकतम 20 हजार यूरो के जुर्माने का प्रावधान बताया गया है। चेहरा छिपाने या किसी व्यक्ति के घायल होने की स्थिति में सजा बढ़ सकती है। अधिकारियों को नुकसान की भरपाई तत्काल कराने का अधिकार भी दिया गया है।
प्रावधानों के अनुसार, कुछ परिस्थितियों में पुलिस 14 से 17 वर्ष के किशोरों को अपराध किए बिना भी हिरासत में ले सकेगी, यदि उनके खतरनाक होने के पर्याप्त संकेत हों। इससे पहले ऐसी शक्ति वयस्कों के मामलों में लागू थी।
मिलान में सुरक्षा मजबूत करने के लिए 2026 के अंत तक पुलिस के साथ 500 सैनिकों की तैनाती की योजना भी बनाई गई है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, सैनिक महत्वपूर्ण स्थानों की सुरक्षा और संवेदनशील इलाकों की निगरानी में मदद करेंगे। हालांकि, सरकार के आलोचकों का कहना है कि केवल सख्त कानून बनाने से अपराध और सामाजिक अव्यवस्था के मूल कारण दूर नहीं होंगे।
ट्रक चालकों की हड़ताल से खाद्य आपूर्ति पर असर
इटली में बढ़ती ईंधन कीमतों को लेकर ट्रक चालकों की हड़ताल ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दक्षिणी शहर नेपल्स में करीब एक सप्ताह से जारी हड़ताल के कारण कुछ सुपरमार्केट की अलमारियां खाली होने लगी हैं और पेट्रोल पंपों पर भी आपूर्ति प्रभावित होने की खबरें हैं।
एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार को प्रदर्शनकारियों ने नेपल्स के पास स्थित सुपरमार्केट वितरण गोदामों में ताजा खाद्य पदार्थों और अन्य सामान की लोडिंग-अनलोडिंग रोक दी। इससे बाजारों तक सामान पहुंचने में बाधा आई है।
कुछ सुपरमार्केट ने ग्राहकों को नोटिस जारी कर बताया कि हड़ताल के कारण कई उत्पाद अस्थायी रूप से उपलब्ध नहीं हो सकते या सीमित मात्रा में मिलेंगे। सिसिली में ताजा पास्ता, पैकेटबंद पनीर, मांस और सब्जियों की कमी की खबरें सामने आई हैं। कैलाब्रिया और पुगलिया के कुछ इलाकों में भी सामान की आपूर्ति प्रभावित हुई है। कुछ स्थानों पर जरूरत से ज्यादा खरीदारी को भी कमी की एक वजह बताया गया है।
फ्रांस में कर्फ्यू बढ़ा, आवास संकट के खिलाफ भी आंदोलन
फ्रांस में सप्ताहांत के दौरान हुई हिंसा, तोड़फोड़ और लूटपाट के बाद कई शहरों में सुरक्षा प्रतिबंध सख्त कर दिए गए हैं। पेरिस में स्थानीय अधिकारियों ने लगातार दूसरी रात कर्फ्यू लागू किया। फ्रांस इन्फो के मुताबिक, पेरिस पुलिस प्रीफेक्चर ने मंगलवार रात 11 बजे से बुधवार सुबह छह बजे तक प्लास द ला रिपब्लिक और लेस हॉल्स के कुछ हिस्सों में प्रतिबंध बढ़ाया।
सप्ताहांत में फ्रांस के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार को सैकड़ों हजार लोग सड़कों पर उतरे और कई स्थानों पर हिंसा की घटनाएं हुईं।
यूरोप में विरोध प्रदर्शनों के कारण अलग-अलग हैं, लेकिन महंगाई, ईंधन की ऊंची कीमतें, महंगे मकान और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर असंतोष कई देशों में प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। स्पेन और पुर्तगाल में आवास संकट के खिलाफ टेंट कैंप लगाकर विरोध जताया जा रहा है, जबकि ग्रीस में भी रैलियों और प्रदर्शनों की योजना बनाई गई थी।
अल्बानिया में शिक्षा व्यवस्था और भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन सरकार विरोधी रूप ले चुका है। इटली में हड़ताल से आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हो रही है और फ्रांस में हिंसा के बाद सुरक्षा प्रतिबंध बढ़ाए जा रहे हैं। इन घटनाओं ने यूरोप के कई देशों में बढ़ते आर्थिक दबाव और सामाजिक असंतोष को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

