Haldwani: शोध में एआई का उपयोग कॉपी-पेस्ट के लिए नहीं, गुणवत्ता बढ़ाने के लिए हो : प्रो. गिरिजा प्रसाद पांडे

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हल्द्वानी। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी के निदेशालय शोध एवं नवाचार की ओर से पीएचडी शोधार्थियों की छमाही प्रगति समीक्षा के लिए आयोजित दो दिवसीय शोध कार्यशाला का मंगलवार को शुभारंभ हुआ। 18 और 19 अगस्त को विश्वविद्यालय के सीडीएस जनरल बिपिन रावत बहुउद्देशीय सभागार में आयोजित कार्यशाला के पहले दिन शोध संस्कृति, सामाजिक विज्ञान अनुसंधान, क्रॉस-कल्चरल उद्यमिता और शोध में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विचार रखे।

कार्यशाला के उद्घाटन सत्र का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और विश्वविद्यालय के कुलगीत के साथ हुआ। निदेशक शोध प्रो. गिरिजा प्रसाद पांडे ने स्वागत संबोधन में कहा कि पूरी दुनिया में रिसर्च और डेवलपमेंट को लेकर गंभीर चर्चा हो रही है। उन्होंने शोधार्थियों से कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल केवल कॉपी-पेस्ट करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका उपयोग शोध को बेहतर बनाने के लिए किया जाना चाहिए।

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उन्होंने कहा कि शोध में लगाए गए चार-पांच वर्षों का लाभ केवल शोधार्थी तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका परिणाम राज्य, राष्ट्र और वैश्विक समुदाय के लिए उपयोगी होना चाहिए।

पीएचडी बड़ी उपलब्धि के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी : प्रो. संजीव शर्मा

उद्घाटन सत्र में महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी, बिहार के पूर्व कुलपति एवं चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के राजनीति विज्ञान विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. संजीव शर्मा ने “Emerging Dimensions of Social Science Research” विषय पर व्याख्यान दिया।

उन्होंने शोध के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लोग अपने जीवन के 10 सेकंड भी किसी अनचाही कॉल को नहीं देना चाहते, लेकिन शोध के लिए पांच वर्ष का समय देते हैं। इसलिए शोध के महत्व और उद्देश्य को समझना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि करोड़ों लोगों में से कोई एक व्यक्ति पीएचडी तक पहुंचता है। ऐसे में पीएचडी केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि अपने साथ बड़ी जिम्मेदारी भी लेकर आती है। शोधार्थियों को अपने शोध को समाज की वास्तविक जरूरतों से जोड़ने का प्रयास करना चाहिए।

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प्रोफेशनलिज्म ही बनाता है पहचान : द्वारिका प्रसाद रतूड़ी

उद्यमी, अभिनेता एवं समाजसेवी द्वारिका प्रसाद रतूड़ी ने “Cross-Cultural Entrepreneurship and Global Strategy” विषय पर शोधार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि चाहे फिल्म का सेट हो या बिजनेस बोर्ड रूम, राष्ट्रीयता से अधिक महत्व प्रोफेशनलिज्म का होता है।

उन्होंने समय की पाबंदी, बेहतर तैयारी, अनुशासन और टीम के प्रति सम्मान को सफलता के महत्वपूर्ण आधार बताते हुए शोधार्थियों से बड़े सपने देखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नई संस्कृतियों से सीखना जरूरी है, लेकिन इसके साथ अपनी संस्कृति से जुड़े रहना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

शोध के परिणाम जमीन पर दिखाई देने चाहिए : प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी

कार्यशाला के अध्यक्ष एवं उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी सामर्थ्य का सदुपयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का प्रयास है कि शिक्षार्थियों से उनके अध्ययन के बाद भी निरंतर जुड़ाव बना रहे।

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कुलपति ने शोध में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग को गुणवत्ता बढ़ाने में सहायक बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शोध का वास्तविक महत्व तभी सामने आता है, जब उसके परिणाम जमीनी स्तर पर दिखाई दें। शोध को समाज और वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ना जरूरी है, तभी उसके बेहतर परिणाम सामने आ सकते हैं।

शोधार्थियों ने प्रस्तुत की छमाही प्रगति

उद्घाटन सत्र के बाद कार्यशाला के प्रथम दिन के दूसरे प्रमुख चरण में विश्वविद्यालय के विभिन्न विषयों के पीएचडी शोधार्थियों की छमाही प्रगति प्रस्तुतियां आयोजित की गईं। शोधार्थियों ने अपने-अपने शोध कार्य की अब तक की प्रगति विशेषज्ञों और समीक्षा समिति के सदस्यों के समक्ष प्रस्तुत की।

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