राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की मौजूदगी में प्रदेश कार्यसमिति की बैठक, दो राजनीतिक प्रस्ताव पारित, विकास-विरासत और संरक्षण के मुद्दों के साथ चुनाव मैदान में उतरने का संकल्प
हल्द्वानी। उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर भाजपा ने अपना चुनावी मंथन तेज कर दिया है। हल्द्वानी में बुधवार को आयोजित हो रही प्रदेश कार्यसमिति की बैठक पार्टी के लिए महज संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव के लिए जमीनी रिपोर्ट कार्ड तैयार करने की अहम कवायद मानी जा रही है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की मौजूदगी में होने वाली इस बैठक में सरकार, संगठन और विधायकों के कामकाज से लेकर बूथ स्तर तक पार्टी की स्थिति पर चर्चा हो रही है।
बैठक की शुरुआत से पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम, पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत, प्रदेश सरकार के मंत्री, प्रदेश पदाधिकारी, सभी जिलों के अध्यक्ष-महामंत्री तथा मोर्चा-प्रकोष्ठों के पदाधिकारियों ने ध्वजारोहण किया।
दोपहर करीब तीन बजे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन हल्द्वानी पहुंचे। इस दौरान बाबा नीम करौली महाराज की तस्वीर भेंट कर उनका स्वागत किया गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह नजर आया।
शाम को प्रदेश पदाधिकारियों और कोर कमेटी के साथ मंथन
कार्यसमिति के बाद शाम 5 बजे प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक प्रस्तावित है, जबकि शाम 7 बजे कोर कमेटी की बैठक होगी। इन बैठकों में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी शामिल होंगे।
पार्टी नेतृत्व की इन बैठकों को 2027 के चुनाव की रणनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खास तौर पर संगठन की जमीनी स्थिति, विधानसभा क्षेत्रों में विधायकों की सक्रियता और सरकार की योजनाओं के असर को लेकर फीडबैक पर मंथन होने के संकेत हैं।
कार्यसमिति में दो राजनीतिक प्रस्ताव पारित
प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में आज दो राजनीतिक प्रस्ताव पारित किए गए। इसके अलावा ‘विकसित उत्तराखंड से विकसित भारत का संकल्प’ प्रस्ताव केंद्रीय राज्यमंत्री अजय टम्टा ने रखा। पहले राजनीतिक प्रस्ताव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्ष के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के कार्यकाल पर चर्चा की गई। इस दौरान उनके कार्यकाल की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए आभार जताया गया।
दूसरे प्रस्ताव में हल्द्वानी शुद्धिकरण मामले पर कांग्रेस के रुख की निंदा की गई। बैठक में यह संदेश दिया गया कि भाजपा आगामी चुनाव में विकास, विरासत और संरक्षण के मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएगी। पार्टी ने कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला और कहा कि समाज और देश विरोधी राजनीति का जनता के बीच खुलकर विरोध किया जाएगा।
2027 के लिए विधायकों और मंत्रियों का बनेगा रिपोर्ट कार्ड?
भाजपा की इस प्रदेश कार्यसमिति को सबसे ज्यादा चर्चा इसलिए मिल रही है क्योंकि इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मंत्रियों और विधायकों के प्रदर्शन की समीक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक इस बार टिकट के संभावित फैसले में केवल चुनावी सर्वे या पिछले चुनाव के आंकड़े ही निर्णायक नहीं होंगे। संगठन की ओर से तैयार होने वाली जमीनी रिपोर्ट भी अहम भूमिका निभा सकती है।
इस रिपोर्ट में कई बिंदुओं पर फीडबैक लिए जाने की चर्चा है—
- विधानसभा क्षेत्र में विधायक की सक्रियता कितनी है?
- जनता के साथ उनका सीधा संवाद कैसा है?
- स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ तालमेल कैसा है?
- बूथ समितियां कितनी सक्रिय हैं?
- मंडल स्तर पर संगठन की स्थिति कैसी है?
- कमजोर बूथों की पहचान और वहां पार्टी की स्थिति क्या है?
- सरकार की योजनाओं का लाभ आम लोगों तक कितना पहुंचा है?
- विधायक के खिलाफ स्थानीय स्तर पर नाराजगी तो नहीं है?
- संगठन के भीतर गुटबाजी और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय की स्थिति कैसी है?
यानी पार्टी के सामने केवल ‘सरकार कैसी चल रही है’ का सवाल नहीं होगा, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि ‘सरकार और संगठन का चेहरा जनता के बीच कैसा है।’
सरकार से नाराजगी नहीं, विधायक से असंतोष हुआ तो भी खतरे की घंटी
पार्टी के अंदर चल रही चर्चाओं के मुताबिक किसी विधानसभा क्षेत्र में सरकार के प्रति नाराजगी कम होने के बावजूद यदि स्थानीय विधायक को लेकर कार्यकर्ताओं या जनता में असंतोष पाया जाता है, तो इसे गंभीर संकेत माना जा सकता है। इसी तरह जिस क्षेत्र में विधायक की व्यक्तिगत पकड़ मजबूत हो, लेकिन संगठन कमजोर हो या बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं में असंतोष हो, वहां भी पार्टी स्थिति को सुधारने पर जोर दे सकती है।
यही वजह है कि 2027 के टिकट के दावेदारों के लिए हल्द्वानी की कार्यसमिति खास महत्व रखती है। मजबूत रिपोर्ट वाले मौजूदा चेहरों पर पार्टी दोबारा भरोसा कर सकती है, जबकि कमजोर रिपोर्ट वाले क्षेत्रों में नए चेहरे, सामाजिक समीकरण और संगठन से उभरने वाले नामों पर मंथन की संभावना जताई जा रही है। हालांकि पार्टी ने आधिकारिक तौर पर टिकट बदलने को लेकर कोई घोषणा नहीं की है।
महेंद्र भट्ट बोले- बूथ तक तैयार है भाजपा की रणनीति
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के मार्गदर्शन में दूसरी बार काम करने का अवसर मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि हल्द्वानी में हो रही प्रदेश कार्यसमिति बैठक में 2027 के चुनाव को ध्यान में रखते हुए दो महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रस्ताव पारित किए जाएंगे।
भट्ट ने कहा कि पार्टी की बूथ स्तर तक रणनीति तैयार है। उन्होंने निकाय चुनाव में भाजपा के प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि 11 नगर निगमों और सहकारिता के छह जिलों में पार्टी को एकतरफा जीत मिली है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा 2027 का विधानसभा चुनाव पूरी ताकत के साथ लड़ेगी।
अनिल बलूनी का दावा- उत्तराखंड में इतिहास रचेगी भाजपा
भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया संयोजक और गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने कहा कि उत्तराखंड में भाजपा को इतिहास रचना है और तीसरा चुनाव पूरी दमदारी के साथ जीतना है।
उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने अब तक ऐसा कोई काम नहीं किया है, जिससे जनता नाराज हो। विकास कार्यों का उदाहरण देते हुए बलूनी ने कहा कि राज्य बनने के बाद दिल्ली से देहरादून की दूरी और यात्रा समय में बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां यह सफर करीब सात घंटे का होता था, वहीं अब यह घटकर करीब ढाई घंटे रह गया है। बलूनी ने विश्वास जताया कि भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाएगी और उत्तराखंड में स्वर्णिम काल लाने की दिशा में आगे बढ़ेगी।
नैनीताल जिले में राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे को लेकर उत्साह
नैनीताल भाजपा के जिलाध्यक्ष प्रताप सिंह बिष्ट ने कहा कि पूरे जिले में पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच खुशी और उत्साह का माहौल है। उन्होंने इसे ऐतिहासिक अवसर बताते हुए कहा कि कार्यकर्ताओं को अपने युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष को देखने और सुनने का मौका मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि नितिन नवीन के नैनीताल दौरे से पूरे उत्तराखंड में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है। जिले में कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह है और कई स्थानों पर लोग राष्ट्रीय अध्यक्ष के स्वागत के लिए बड़ी संख्या में जुट रहे हैं।
हल्द्वानी से 2027 का संदेश: संगठन मजबूत तो मिशन हैट्रिक मजबूत
हल्द्वानी में भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति को कई मायनों में 2027 के चुनावी रोडमैप की शुरुआती तस्वीर के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी के सामने लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने की चुनौती है और इसके लिए संगठन बूथ से लेकर विधानसभा स्तर तक अपनी ताकत परख रहा है।
