ट्रांसफर की अर्जी बनी चर्चा का विषय, जांच रिपोर्ट के बाद ही होगा फैसला
देहरादून/रुद्रपुर। सरकारी विभागों में तबादले के लिए तमाम तरह के आवेदन आते हैं, लेकिन उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग में इन दिनों एक ऐसे आवेदन की चर्चा जोरों पर है जिसने अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों तक सभी को हैरान कर दिया है। रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज में तैनात एक वरिष्ठ चिकित्सक ने अपना तबादला हल्द्वानी कराने के लिए ऐसा प्रार्थना पत्र भेजा कि मामला सीधे जांच के दायरे में पहुंच गया।
डॉक्टर ने अपने आवेदन में खुद को एक-दो नहीं बल्कि करीब दस गंभीर बीमारियों से पीड़ित बताते हुए हल्द्वानी स्थानांतरण की मांग की। उनका मानना था कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और पारिवारिक परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें राहत मिल जाएगी, लेकिन हुआ ठीक इसके उलट। स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने ट्रांसफर फाइल आगे बढ़ाने के बजाय चिकित्सक की मेडिकल जांच कराने के निर्देश जारी कर दिए। सूत्र बताते हैं कि उक्त वरिष्ठ चिकित्सक का विवादों से पुराना नाता है। बताया जाता है कि पूर्व में उक्त चिकित्सक हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में तैनात थे, जिन्हे लापरवाही के चलते सस्पेंड भी किया गया था। इसके बाद इन्हें स्थानांतरण कर अल्मोड़ा भेजा गया था।
परिवार हल्द्वानी में, नौकरी रुद्रपुर में
सूत्रों के अनुसार मूल रूप से हल्द्वानी निवासी यह वरिष्ठ चिकित्सक वर्तमान में रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज में तैनात हैं। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री को भेजे आवेदन में कहा कि उनका परिवार हल्द्वानी में रहता है, जबकि उन्हें रोजाना स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद रुद्रपुर में कार्य करना पड़ रहा है।
डॉक्टर ने दावा किया कि वे कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं और इनका असर उनके दैनिक जीवन और कार्यक्षमता पर पड़ रहा है। ऐसे में उन्हें हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में तैनाती दी जानी चाहिए ताकि उपचार और पारिवारिक सहयोग दोनों आसानी से मिल सकें।
आवेदन में गिनाईं बीमारियों की लंबी सूची
प्रार्थना पत्र में चिकित्सक ने जिन बीमारियों का उल्लेख किया है, उनमें मधुमेह (डायबिटीज), उच्च रक्तचाप, एलर्जिक अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, स्पॉन्डिलाइटिस, आंखों की समस्या, पेनक्रियाज संबंधी बीमारी, गर्दन की गंभीर परेशानी समेत कई अन्य स्वास्थ्य समस्याएं शामिल हैं।आवेदन में यह भी कहा गया कि इन बीमारियों के कारण उन्हें रोजमर्रा के कार्यों को करने में भी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
मंत्री ने लिया गंभीरता से संज्ञान
जब यह आवेदन स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के पास पहुंचा तो उन्होंने इसे सामान्य तबादला प्रकरण की तरह नहीं लिया। मंत्री का कहना था कि यदि कोई चिकित्सक स्वयं को इतनी गंभीर बीमारियों से ग्रस्त बता रहा है तो उसकी स्वास्थ्य स्थिति का सत्यापन जरूरी है।
सूत्रों के मुताबिक मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पहले चिकित्सक की मेडिकल जांच कराई जाए। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय किया जाएगा कि स्थानांतरण का अनुरोध उचित है या नहीं।
झूठ निकला दावा तो होगी कार्रवाई
मामले को लेकर सरकार का रुख भी काफी सख्त नजर आ रहा है। मंत्री ने संकेत दिए हैं कि यदि आवेदन में दर्ज स्वास्थ्य संबंधी दावे सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार राहत पर विचार किया जा सकता है, लेकिन यदि तथ्यों में गड़बड़ी या गलत जानकारी सामने आती है तो संबंधित चिकित्सक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी हो सकती है।
विभाग में चर्चा का सबसे बड़ा विषय
इस पूरे घटनाक्रम के बाद स्वास्थ्य विभाग में यह मामला चर्चा का केंद्र बन गया है। विभागीय कर्मचारी और अधिकारी भी इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई लोग मजाकिया अंदाज में कह रहे हैं कि डॉक्टर साहब ने तबादले की फाइल भेजी थी, लेकिन वह सीधे मेडिकल बोर्ड तक पहुंच गई।
बीमारी के नाम पर तबादले नहीं होंगे आसान
मामले के बीच स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने साफ संकेत दिए हैं कि गंभीर बीमारी का हवाला देकर तबादला कराने की कोशिश करने वाले चिकित्सकों और कर्मचारियों की अब गहन जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार वास्तविक रूप से बीमार कर्मचारियों के प्रति संवेदनशील है, लेकिन नियमों का दुरुपयोग किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

