नई दिल्ली। भारतीय रेलवे को आधुनिक और अधिक सक्षम बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों पर लगातार बढ़ रहे यात्री और माल यातायात के दबाव को कम करने के लिए केंद्रीय कैबिनेट ने सात प्रमुख हाई डेंसिटी नेटवर्क (HDN) कॉरिडोर को चार-ट्रैक यानी फोर-लेन करने की परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इस फैसले के बाद इन महत्वपूर्ण रेल मार्गों पर अतिरिक्त ट्रैक बिछाने का रास्ता साफ हो गया है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने केंद्रीय कैबिनेट की बैठक के बाद बताया कि देश के प्रमुख महानगरों और औद्योगिक केंद्रों को जोड़ने वाले इन सात कॉरिडोर की क्षमता बढ़ाई जाएगी। इनमें दिल्ली-हावड़ा, हावड़ा-मुंबई, दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-गुवाहाटी, दिल्ली-चेन्नई, हावड़ा-चेन्नई और मुंबई-चेन्नई रेल मार्ग शामिल हैं। इन रूटों पर अतिरिक्त ट्रैक बनने के बाद रेलवे के पास एक साथ अधिक ट्रेनों के संचालन की क्षमता होगी।
दरअसल, देश के इन प्रमुख रेल मार्गों पर यात्री ट्रेनों के साथ मालगाड़ियों का भी भारी दबाव रहता है। सीमित ट्रैक क्षमता के कारण कई बार ट्रेनों को क्रॉसिंग, आउटर या स्टेशनों पर दूसरी ट्रेन को रास्ता देने के लिए रोकना पड़ता है। फोर-लेन नेटवर्क बनने के बाद इस समस्या को काफी हद तक कम करने में मदद मिलेगी। रेलवे को यात्री और मालगाड़ियों के लिए अलग-अलग पाथ उपलब्ध कराने में आसानी होगी, जिससे ट्रेनों के संचालन को अधिक सुचारु बनाया जा सकेगा।
इस परियोजना का असर देश के कई बड़े शहरों और औद्योगिक केंद्रों पर भी पड़ेगा। दिल्ली-हावड़ा रूट के तहत कानपुर, प्रयागराज, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, पटना और आसनसोल जैसे महत्वपूर्ण शहरों को फायदा मिलेगा। दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर पर मथुरा, कोटा, रतलाम, वडोदरा और सूरत जैसे शहरों में रेल कनेक्टिविटी और संचालन क्षमता बेहतर होने की उम्मीद है।
इसी तरह दिल्ली-चेन्नई कॉरिडोर आगरा, ग्वालियर, झांसी, भोपाल, नागपुर और विजयवाड़ा जैसे प्रमुख शहरों को जोड़ता है। मुंबई-चेन्नई मार्ग में पुणे समेत कई बड़े व्यापारिक और औद्योगिक केंद्र आते हैं। इन रूटों की क्षमता बढ़ने से यात्रियों के साथ-साथ उद्योगों और कारोबार के लिए माल ढुलाई को भी गति मिल सकती है।
रेलवे के लिए इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भविष्य में व्यस्त रूटों पर ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की गुंजाइश पैदा होगी। नई यात्री ट्रेनों को संचालित करने के साथ मौजूदा ट्रेनों के फेरे बढ़ाने में भी आसानी होगी। वहीं मालगाड़ियों के लिए अलग रेल पाथ मिलने से माल ढुलाई की गति और क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
रेल मंत्री के अनुसार, यह फैसला पिछले करीब 12 वर्षों से जारी रेलवे के व्यापक आधुनिकीकरण अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सरकार का लक्ष्य रेलवे के बुनियादी ढांचे को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है, ताकि बढ़ते यात्री और माल यातायात को बेहतर तरीके से संभाला जा सके।
चार ट्रैक उपलब्ध होने के बाद ट्रेनों को एक-दूसरे के लिए रास्ता देने की जरूरत कम होगी। इसका सीधा असर ट्रेन संचालन की गति और समयपालन पर पड़ सकता है। खासतौर पर लंबी दूरी की ट्रेनों के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि व्यस्त सेक्शन में बार-बार रुकने की समस्या कम होने से यात्रा समय को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
देश की अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ रेल परिवहन पर दबाव भी लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में दिल्ली, मुंबई, हावड़ा, चेन्नई और गुवाहाटी जैसे प्रमुख शहरों को जोड़ने वाले हाई डेंसिटी कॉरिडोर की क्षमता बढ़ाना रेलवे के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।
