Uttarakhand: धामी कैबिनेट के 13 फैसले…सेवामुक्त अग्निवीरों को भर्ती में छूट, बाल वीरता पुरस्कार योजना को मंजूरी

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हरिद्वार। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सोमवार को हरिद्वार के मेला नियंत्रण सभागार में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य के विकास, प्रशासनिक सुधार, युवाओं और जनहित से जुड़े 13 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने सेवामुक्त अग्निवीरों को समूह ‘ग’ के वर्दीधारी पदों पर भर्ती में छूट देने संबंधी नई नियमावली, मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार योजना, बाढ़ मैदान परिक्षेत्रण नियमावली और नए अग्निशमन एवं आपात सेवा विधेयक सहित कई प्रस्तावों पर मुहर लगाई।

बैठक में कारोबार को सरल बनाने के लिए जन विश्वास संशोधन विधेयक को विधानसभा में प्रस्तुत करने, हरिद्वार स्थित मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान के विकास के लिए सोसायटी गठित करने और स्वजल एवं राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन के 215 पदों की निरंतरता बढ़ाने का निर्णय भी लिया गया। इसके अलावा विधानसभा के वर्ष 2026 के तृतीय सत्र को आहूत करने के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया गया।

अग्निवीरों को भर्ती में छूट, बाल वीरता पुरस्कार योजना मंजूर

कैबिनेट ने राज्याधीन सेवाओं में समूह ‘ग’ के सीधी भर्ती वाले वर्दीधारी पदों पर सेवामुक्त अग्निवीरों के सेवायोजन के लिए नई क्षैतिज आरक्षण नियमावली को मंजूरी दी। वर्ष 2025 की नियमावली में सेवामुक्त अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण, अधिकतम आयु सीमा और शारीरिक दक्षता परीक्षा में छूट का प्रावधान था। केंद्र सरकार के नवीन दिशा-निर्देशों के अनुरूप नई नियमावली तैयार की गई है, जिसमें लिखित परीक्षा और शारीरिक मानक परीक्षा में छूट के प्रावधान शामिल किए गए हैं।

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बच्चों के साहस और वीरता को प्रोत्साहित करने के लिए मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार योजना को भी मंजूरी दी गई। इसके तहत विपरीत परिस्थितियों में धैर्य, असाधारण साहस, पराक्रम और मानवीय संवेदना का परिचय देने वाले बच्चों को सम्मानित किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य ऐसे बच्चों को प्रोत्साहित करना और उन्हें अन्य बच्चों के लिए प्रेरणास्रोत बनाना है।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में निर्माण और विकास गतिविधियों पर रहेगा नियमन

कैबिनेट ने उत्तराखण्ड बाढ़ मैदान परिक्षेत्रण नियमावली, 2026 को मंजूरी दी। इसके माध्यम से बाढ़ संभावित क्षेत्रों में भूमि के उपयोग और विकास गतिविधियों को विनियमित करने के लिए विस्तृत प्रक्रिया, मानक और कार्यप्रणाली तय की जाएगी। इसका उद्देश्य नदियों के प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखने के साथ जन-धन, संपत्ति और महत्वपूर्ण आधारभूत ढांचे को बाढ़ से होने वाले नुकसान से सुरक्षित रखना है।

प्रदेश में अग्निशमन और आपात सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए उत्तराखण्ड अग्निशमन एवं आपात सेवा विधेयक, 2026 को विधानसभा में प्रस्तुत करने की मंजूरी दी गई। भारत सरकार के मॉडल फायर सर्विस बिल, 2019 के अनुरूप तैयार इस विधेयक में औद्योगिक विकास, बढ़ते शहरीकरण, आपदाओं और आग की संभावित घटनाओं से जुड़ी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए मौजूदा कानून को नए सिरे से तैयार करने का प्रस्ताव है।

छोटे अपराधों में राहत देने की दिशा में कदम

व्यापारिक गतिविधियों को सरल बनाने और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए द्वितीय उत्तराखण्ड जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक, 2026 को विधानसभा में पेश करने की मंजूरी दी गई। इसके तहत छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने, मामूली तकनीकी और प्रक्रियात्मक गलतियों के लिए नागरिक दंड तथा प्रशासनिक कार्रवाई का प्रावधान करने और अप्रचलित एवं अनावश्यक कानूनी प्रावधानों को हटाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

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कैबिनेट ने उत्तराखण्ड निवेश और आधारिक संरचना (विकास और विनियम) अधिनियम, 2023 की अनुसूची-3 में संशोधन को भी मंजूरी दी। इसके अंतर्गत सार्वजनिक अभिकरणों, स्थानीय निकायों, राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों और वित्तीय रूप से स्वायत्त संस्थाओं की परिसंपत्तियों के विनिवेश एवं मुद्रीकरण से प्राप्त आय का 92 प्रतिशत हिस्सा संबंधित सार्वजनिक अभिकरणों को दिए जाने का प्रावधान किया गया है। इससे परिसंपत्तियों के प्रबंधन और आधारभूत ढांचे के विकास को गति मिलने की उम्मीद है।

प्राच्य शोध संस्थान का होगा विस्तार

हरिद्वार के ऋषिकुल स्थित श्री मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान के विकास और विस्तार के लिए सोसायटी के गठन को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई। संस्थान को योग एवं ध्यान केंद्र, आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान केंद्र, ज्योतिष एवं प्राच्य अध्ययन केंद्र, ललित कला केंद्र, हिंदू अध्ययन एवं दर्शन केंद्र तथा आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। इसका उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा, प्राचीन विज्ञान, संस्कृति और आधुनिक शोध को बढ़ावा देना है।

कैबिनेट ने स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत परियोजना प्रबंधन इकाई, स्वजल और राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन के कुल 215 पदों की निरंतरता 1 मार्च 2026 से 28 फरवरी 2027 तक बढ़ाने को मंजूरी दी। इनमें स्वजल के 189 और राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन के 26 पद शामिल हैं। संबंधित कर्मचारियों को पूर्व की भांति वेतन और मानदेय का भुगतान राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन करेगा।

आवासीय परियोजना और भू-उपयोग परिवर्तन को मंजूरी

हरिद्वार जिले की भगवानपुर तहसील के ग्राम सिसौना में प्रस्तावित किफायती आवासीय परियोजना के पहुंच मार्ग की चौड़ाई में शिथिलता देने का निर्णय लिया गया। करीब 8.1169 हेक्टेयर भूमि पर प्रस्तावित परियोजना के लिए निर्धारित नौ मीटर चौड़े पहुंच मार्ग के स्थान पर उपलब्ध छह मीटर चौड़े मार्ग को देखते हुए तीन मीटर की शिथिलता मंजूर की गई।

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ऊधमसिंह नगर जिले की बाजपुर तहसील के ग्राम भौना इस्लामनगर में 24,280 वर्गमीटर भूमि के औद्योगिक से आवासीय भू-उपयोग परिवर्तन संबंधी शासनादेश में खसरा संख्या की त्रुटि सुधारने को भी मंजूरी दी गई। शासनादेश में गलत दर्ज खसरा संख्या 321/1अ के स्थान पर सही संख्या 321/2अ अंकित की जाएगी।

संस्कृति विभाग के वित्तीय अधिकारों में बदलाव

कैबिनेट ने उत्तराखण्ड वित्तीय हस्तपुस्तिका के संबंधित प्रावधान में संशोधन को मंजूरी दी। इसके तहत संस्कृति विभाग के विभागाध्यक्ष के रूप में निदेशक, कला एवं संस्कृति विभाग के स्थान पर महानिदेशक, संस्कृति निदेशालय, उत्तराखण्ड का नाम दर्ज किया जाएगा। इससे विभाग की मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था के अनुरूप वित्तीय अधिकारों का संचालन किया जा सकेगा।

इसके अलावा मंत्रिमंडल ने उत्तराखण्ड विधानसभा के वर्ष 2026 के तृतीय सत्र को आहूत करने की मंजूरी दी। सत्र की तिथि और स्थान तय करने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को अधिकृत किया गया।

बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का उत्तराखण्ड के विकास में निरंतर सहयोग के लिए आभार भी व्यक्त किया गया। कैबिनेट ने राज्य की पर्वतीय, सीमावर्ती और सामरिक परिस्थितियों को देखते हुए भविष्य में भी विकास संबंधी प्राथमिकताओं के अनुरूप केंद्र से सहयोग जारी रहने की अपेक्षा जताई।

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