Uttarakhand: कंगना रनौत पर रामदेव का पलटवार, बोले- ‘ओछे लोगों’ पर टिप्पणी नहीं करना चाहता

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हरिद्वार। अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत तथा योग गुरु स्वामी रामदेव के बीच चल रही जुबानी जंग थमने का नाम नहीं ले रही है। कंगना के तंज के बाद अब रामदेव ने एक बार फिर पलटवार किया है। हालांकि, उन्होंने कंगना का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया, लेकिन उनके बयान को लेकर पूछे गए मीडिया के सवाल पर उन्होंने तीखी टिप्पणी की।

मीडिया से बातचीत के दौरान स्वामी रामदेव ने कहा कि वह इस विवाद को आगे नहीं बढ़ाना चाहते। उन्होंने कहा, “देखो, जिन लोगों के बारे में… अभी क्या बोलूं, मैं विवाद को बढ़ावा नहीं देना चाहता।” इसके बाद उन्होंने अपने योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि स्वामी रामदेव क्या हैं और देश के लिए उनका योगदान क्या है, यह देश जानता है।

रामदेव ने आगे कहा कि वह ऐसे लोगों के बारे में कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते। उनके इस बयान को कंगना रनौत के हालिया तंज के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है।

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सरकारी नौकरी में गड़बड़ी को लेकर शुरू हुआ विवाद

दरअसल, दोनों के बीच यह जुबानी जंग सरकारी नौकरियों में कथित गड़बड़ियों को लेकर शुरू हुई। कुछ दिन पहले स्वामी रामदेव ने सरकारी नौकरी के इंटरव्यू में होने वाली कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाते हुए आंदोलन की चेतावनी दी थी।

रामदेव के इस बयान पर कंगना रनौत ने तंज कसा था। इसके बाद सोशल मीडिया और सार्वजनिक बयानों के जरिए दोनों के बीच बयानबाजी शुरू हो गई। अब रामदेव के ताजा बयान ने इस विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है।

हालांकि, रामदेव ने अपने ताजा बयान में कंगना का नाम नहीं लिया और यह भी कहा कि वह विवाद को बढ़ावा नहीं देना चाहते। इसके बावजूद उनके ‘ओछे लोगों’ वाले बयान को कंगना के प्रति उनकी प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।

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‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ के समर्थन में रामदेव

इसी दौरान स्वामी रामदेव ने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ यानी देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की व्यवस्था का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यदि देश में एक साथ चुनाव की व्यवस्था लागू होती है तो शिक्षा और विकास के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

रामदेव के मुताबिक, देश में बार-बार चुनाव होने के कारण साल के कई महीने चुनावी प्रक्रिया में निकल जाते हैं। चुनावी ड्यूटी में शिक्षकों और दूसरे सरकारी कर्मचारियों की तैनाती होने से उनके नियमित काम भी प्रभावित होते हैं।

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‘शिक्षकों को बच्चों के लिए ज्यादा समय मिलेगा’

रामदेव ने कहा कि एक साथ चुनाव होने से शिक्षकों को चुनावी ड्यूटी से अपेक्षाकृत राहत मिलेगी और वे बच्चों की पढ़ाई पर ज्यादा समय दे सकेंगे। उनका मानना है कि इससे शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।

उन्होंने यह भी कहा कि बार-बार चुनाव होने से सरकारी मशीनरी का बड़ा हिस्सा चुनावी प्रक्रिया में व्यस्त हो जाता है। यदि चुनाव एक साथ कराए जाएं तो सरकारों और प्रशासन को विकास कार्यों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलेगा।

रामदेव के मुताबिक, ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ से चुनावी गतिविधियों में लगने वाले समय और संसाधनों की बचत हो सकती है तथा सरकारों का ध्यान लंबे समय की विकास योजनाओं पर अधिक केंद्रित किया जा सकता है।

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