गदरपुर के सनातन धर्म मंदिर में बाल स्वरूप प्रस्तुति ने मोहा श्रद्धालुओं का मन, राधे-राधे और जय श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंजा परिसर
गदरपुर। जन्माष्टमी के उल्लास में शुक्रवार को श्री सनातन धर्म मंदिर, बुध बाजार का वातावरण उस समय और भी भक्तिमय हो गया, जब मंदिर परिसर में 102 नन्हे बच्चे भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के बाल स्वरूप में सजकर पहुंचे। किसी के सिर पर मोरपंख सजा था तो किसी के हाथ में बांसुरी, कोई नटखट कान्हा की अदाओं से सबका दिल जीत रहा था तो कोई राधा रानी के रूप में अपनी मासूमियत से आकर्षण का केंद्र बना हुआ था। बच्चों की मनमोहक वेशभूषा, मासूम मुस्कान और उत्साह ने श्रद्धालुओं और अभिभावकों को भाव-विभोर कर दिया।

श्री सनातन धर्म युवा मंच, बुध बाजार, गदरपुर की ओर से आयोजित ‘नटखट कान्हा एवं प्यारी राधा बाल स्वरूप प्रस्तुति’ में बड़ी संख्या में बच्चों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर में चारों ओर भक्ति और उल्लास का माहौल नजर आया। बच्चों को कान्हा और राधा के रूप में देखने के लिए अभिभावकों में भी खासा उत्साह रहा। हर कोई अपने नन्हे-मुन्नों की तस्वीरें कैमरे में कैद करता नजर आया।
कार्यक्रम का शुभारंभ श्री सनातन धर्म सभा के अध्यक्ष राजकुमार भुड्डी और श्री सनातन धर्म युवा मंच के अध्यक्ष संजीव झाम ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके बाद बाल स्वरूप प्रस्तुति का सिलसिला शुरू हुआ। जैसे-जैसे बच्चे मंच पर पहुंचते गए, मंदिर परिसर तालियों की गड़गड़ाहट और जयकारों से गूंजता रहा।

नन्हे प्रतिभागियों ने भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के बाल स्वरूप को अपनी मासूम अदाओं और आकर्षक वेशभूषा के जरिए जीवंत कर दिया। किसी ने कान्हा बनकर बांसुरी थामी तो किसी ने राधा के रूप में मनमोहक अंदाज से सबका ध्यान खींचा। बच्चों के उत्साह ने आयोजन में चार चांद लगा दिए।
बाल स्वरूपों और प्रस्तुतियों का मूल्यांकन निर्णायक मंडल की सदस्य मोनिका भुड्डी, सोलकी अनेजा और देवांगनी तनेजा ने किया। निर्णायकों ने बच्चों की वेशभूषा, प्रस्तुति, आत्मविश्वास और आकर्षक बाल स्वरूप के आधार पर प्रतिभागियों का मूल्यांकन किया। प्रतियोगिता को दो आयु वर्गों में बांटा गया था।

0 से 5 वर्ष आयु वर्ग में अविराज गगनेजा ने प्रथम स्थान हासिल किया। आरम्या गाबा द्वितीय और गुरताज सिंह तृतीय स्थान पर रहे। वहीं 5 से 10 वर्ष आयु वर्ग में अवनी बादलानी ने प्रथम, गौरी ने द्वितीय और अविराज सुखीजा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
विजेता बच्चों को श्री सनातन धर्म सभा और श्री सनातन धर्म युवा मंच के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने स्मृति चिह्न और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया। पुरस्कार मिलने पर बच्चों के चेहरे पर खुशी देखते ही बनती थी, वहीं अभिभावकों ने भी तालियों के साथ नन्हे विजेताओं का उत्साह बढ़ाया।

कार्यक्रम के दौरान पूरा मंदिर परिसर ‘राधे-राधे’ और ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयकारों से गूंजता रहा। बच्चों की प्रस्तुतियों ने जहां श्रद्धालुओं का मन मोह लिया, वहीं आयोजन ने जन्माष्टमी के धार्मिक उत्सव को बच्चों की भागीदारी से एक अलग रंग दे दिया। अभिभावकों की सक्रिय सहभागिता ने भी कार्यक्रम को खास बना दिया।
कार्यक्रम का मंच संचालन श्रृंखला चावला और सहायक दीपांशु ने किया। दोनों ने प्रभावी और उत्साहपूर्ण संचालन से पूरे कार्यक्रम को जीवंत बनाए रखा। उनकी वाक्पटुता और मंच संचालन की शैली को उपस्थित लोगों ने सराहा।
आयोजन को सफल बनाने में राजकुमार भुड्डी, समन मुंजाल, कृष्णलाल सुधा, अशोक हुड़िया, विजय छाबड़ा, अशोक भुड्डी, सोमनाथ छाबड़ा, लेखराज भुड्डी, जयकिशन भुड्डी, धीरज गुलाटी, अंकित खेड़ा, दीपक भुड्डी, विक्की मुरादिया, हिमांशु सुखीजा और आशीष शाही सहित मंच के पदाधिकारियों एवं सदस्यों का विशेष सहयोग रहा। आयोजकों ने सभी प्रतिभागी बच्चों और उनके अभिभावकों का आभार जताया।
युवा मंच के अध्यक्ष संजीव झाम ने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में बच्चों की भागीदारी उन्हें अपनी सनातन संस्कृति, संस्कारों और धार्मिक परंपराओं से जोड़ने का प्रभावी माध्यम है। जन्माष्टमी जैसे पर्व केवल पूजा और उत्सव तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने का अवसर भी मिलता है। उन्होंने कहा कि बच्चों की सहभागिता से ऐसे आयोजनों की सुंदरता बढ़ने के साथ उनमें अपनी संस्कृति के प्रति प्रेम, आस्था और संस्कार भी मजबूत होते हैं।
