विकास दाबड़ा, किच्छा। किच्छा विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए ऑनलाइन दर्ज की गईं करीब 2700 फॉर्म-7 आपत्तियों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विधायक तिलक राज बेहड़ ने इस पूरे मामले को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए भारत निर्वाचन आयोग, उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और मतदाता पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) किच्छा को ज्ञापन भेजकर उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग की है।
विधायक ने कहा कि उनके निर्देश पर बीएलए-1 भूपेंद्र पाल सिंह के माध्यम से आयोग को विस्तृत शिकायत भेजी गई है। उनका आरोप है कि मामले को सार्वजनिक रूप से उठाने के बावजूद 5 अगस्त को ही 269 नई ऑनलाइन फॉर्म-7 आपत्तियां और दर्ज कर दी गईं, जिसकी सूची भी ईआरओ को सौंप दी गई है।
उन्होंने बताया कि 2 अगस्त से 5 अगस्त 2026 तक प्रकाशित फॉर्म-10 के अनुसार किच्छा विधानसभा क्षेत्र में लगभग 2700 ऑनलाइन फॉर्म-7 आपत्तियां दर्ज हो चुकी हैं। बीएलए द्वारा जिन मतदाताओं से संपर्क किया गया, उनमें से अधिकांश ने स्पष्ट कहा कि उन्होंने स्वयं कोई ऑनलाइन फॉर्म-7 आवेदन नहीं किया और न ही किसी अन्य व्यक्ति को इसके लिए अधिकृत किया है। यदि किसी अन्य व्यक्ति ने उनके नाम का उपयोग कर आवेदन किया है तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ गंभीर छेड़छाड़ है।
विधायक बेहड़ ने आशंका जताई कि कई मामलों में संबंधित मतदाताओं के मोबाइल पर ओटीपी सत्यापन किए बिना तथा आवश्यक पहचान दस्तावेजों के अभाव में भी ऑनलाइन आवेदन स्वीकार किए गए हो सकते हैं। यदि जांच में यह सही पाया जाता है तो यह निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करेगा।
उन्होंने निर्वाचन आयोग से मांग की कि सभी 2700 संदिग्ध फॉर्म-7 आवेदन और 5 अगस्त को दर्ज 269 नई आपत्तियों की तत्काल उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। जांच पूरी होने तक इन पर कोई कार्रवाई न की जाए तथा जो आवेदन फर्जी या नियमों के विपरीत पाए जाएं, उन्हें तत्काल निरस्त किया जाए।
विधायक ने यह भी मांग की कि प्रत्येक मामले में नियमानुसार संबंधित आपत्तिकर्ता को फॉर्म-13 और संबंधित मतदाता को फॉर्म-14 के माध्यम से नोटिस जारी कर निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित की जाए।
तिलक राज बेहड़ ने कहा कि यदि जांच में किसी व्यक्ति, एजेंसी या संगठित गिरोह द्वारा फर्जी या दुर्भावनापूर्ण तरीके से मतदाताओं के नाम हटाने के उद्देश्य से आवेदन दर्ज कराने की पुष्टि होती है, तो उनके खिलाफ कड़ी वैधानिक और दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा, “मतदाता का अधिकार लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है। किसी भी मतदाता का नाम फर्जी तरीके से मतदाता सूची से हटाने का प्रयास किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।” साथ ही उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग से पूरे मामले का स्वतः संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की।

