“अंदरखाने से लीक, बाहर धंधा पीक!”…कुमाऊं में अधिकारियों की मिलीभगत से फल-फूल रहा टैक्स चोरी रैकेट

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हल्द्वानी। कुमाऊं मंडल के रुद्रपुर, काशीपुर, किच्छा और हल्द्वानी में ट्रांसपोर्ट कारोबार की आड़ में टैक्स चोरी का ऐसा संगठित खेल चल रहा है, जिसने पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इस खेल को रोकने के लिए जिम्मेदार राज्य कर विभाग के ही कुछ कथित अधिकारी इसमें संरक्षक की भूमिका निभा रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, यह कोई छिटपुट मामला नहीं बल्कि करोड़ों रुपये के राजस्व को चूना लगाने वाला एक सुनियोजित नेटवर्क है, जो लंबे समय से सक्रिय है। दिल्ली, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश और बरेली जैसे बड़े व्यापारिक केंद्रों से परचून, जूते, कपड़े, कॉस्मेटिक्स और गुटखा जैसे सामान ट्रकों में लादकर बिना वैध कर चुकाए उत्तराखंड में खपाया जा रहा है।

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सीमा पार करते ही शुरू हो जाता है ‘अलर्ट सिस्टम’

जैसे ही टैक्स चोरी का माल लेकर ट्रक उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड सीमा में प्रवेश करता है, पूरा नेटवर्क सक्रिय हो जाता है। ट्रक की लोकेशन, नंबर और रूट की जानकारी पहले से ही संबंधित ट्रांसपोर्ट कारोबारियों और विभाग के कुछ कथित अधिकारियों तक पहुंच जाती है। इसके बाद ड्राइवरों को फोन के जरिए हर पल निर्देश दिए जाते हैं—कहां रुकना है, किस रास्ते से निकलना है और कब चेकिंग से बचना है।

‘इनसाइड इनपुट’ से बचती है कार्रवाई

सबसे गंभीर आरोप यह है कि विभाग के भीतर से ही कार्रवाई की गोपनीय सूचनाएं लीक की जाती हैं। जैसे ही कहीं चेकिंग अभियान की भनक लगती है, ट्रकों को रास्ते में ही खड़ा करवा दिया जाता है या वैकल्पिक मार्गों से निकाल लिया जाता है। इस तरह पूरा ऑपरेशन इतनी सटीकता से चलता है कि कार्रवाई अक्सर कागजों तक ही सीमित रह जाती है।

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ईमानदार कारोबारी हो रहे परेशान

इस अवैध खेल का सबसे बड़ा नुकसान उन व्यापारियों को उठाना पड़ रहा है, जो नियमों का पालन करते हुए टैक्स भरते हैं। टैक्स चोरी कर लाया गया सस्ता माल बाजार में कम कीमत पर बिकता है, जिससे वैध कारोबारियों की प्रतिस्पर्धा खत्म होती जा रही है।

राजस्व को करोड़ों का नुकसान, फिर भी खामोशी क्यों?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब यह पूरा नेटवर्क खुला रहस्य बन चुका है, तो फिर शासन और प्रशासन अब तक चुप क्यों है? क्या उच्च स्तर तक इसकी जानकारी नहीं है, या फिर कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई जा रही है?

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कार्रवाई नहीं हुई तो बढ़ेगा ‘सिस्टम पर अविश्वास’

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस संगठित टैक्स चोरी पर जल्द सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह न केवल सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाएगा, बल्कि आम जनता और व्यापारियों का सिस्टम पर भरोसा भी कमजोर करेगा।

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन इस “संगठित खेल” पर लगाम कसने के लिए ठोस कदम उठाएगा, या फिर यह नेटवर्क इसी तरह बेखौफ चलता रहेगा।

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