हल्द्वानी। कुमाऊं मंडल के रुद्रपुर, काशीपुर, किच्छा और हल्द्वानी में ट्रांसपोर्ट कारोबार की आड़ में चल रही टैक्स चोरी अब एक संगठित नेटवर्क का रूप ले चुकी है। हालात ऐसे हैं कि जिम्मेदार विभाग इस पूरे खेल के सामने बेबस नजर आ रहे हैं, जबकि टैक्स चोर कारोबारी खुलेआम नियमों को ठेंगा दिखाकर राजस्व को भारी चूना लगा रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक यह खेल वर्षों से जारी है, लेकिन अब इसकी जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि इसे रोकना चुनौती बन गया है। सबसे गंभीर आरोप विभागीय लचर कार्यप्रणाली और कुछ अधिकारियों-कर्मचारियों की कथित मिलीभगत पर लग रहे हैं। बताया जाता है कि ट्रांसपोर्ट के जरिए बिना बिल और बिना बिल्टी माल की ढुलाई बड़े पैमाने पर की जा रही है और कागजों में हेरफेर कर टैक्स से बचा जा रहा है।
परचून, कपड़ा, जूता, कॉस्मेटिक, गुटका (तंबाकू), स्क्रैप और ईंट कारोबार इस अवैध नेटवर्क के प्रमुख माध्यम बने हुए हैं। यही नहीं, सूत्रों का दावा है कि कुछ कारोबारी हर महीने एक तय रकम संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाते हैं, जिसके बदले पूरे महीने चेकिंग से लेकर कार्रवाई तक सब कुछ ठप रहता है। न गाड़ियों को रोका जाता है और न ही दस्तावेजों की सख्ती से जांच होती है।
इस पूरे खेल का सबसे बड़ा नुकसान सरकारी खजाने को हो रहा है। हर दिन लाखों-करोड़ों रुपये का टैक्स बचाया जा रहा है, जिससे राज्य की राजस्व व्यवस्था पर सीधा असर पड़ रहा है। वहीं, नियमों का पालन करने वाले ईमानदार व्यापारी इस असमान प्रतिस्पर्धा में पिछड़ते जा रहे हैं।
हैरानी की बात यह है कि टैक्स चोरी का यह मामला लगातार चर्चा में रहने के बावजूद जिम्मेदार विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। न बड़े स्तर की जांच दिख रही है और न ही किसी अधिकारी या कारोबारी पर सख्त कार्रवाई की खबर।
ऐसे में सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावे भी कटघरे में खड़े नजर आ रहे हैं। जमीनी सच्चाई यही बताती है कि कुमाऊं में टैक्स चोरी का यह नेटवर्क अब सिर्फ अवैध कारोबार नहीं, बल्कि प्रशासनिक ढिलाई और कथित सांठगांठ का बड़ा उदाहरण बन चुका है।
अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन इस ‘टैक्स सिंडिकेट’ पर नकेल कसने के लिए सख्त कदम उठाता है या फिर यह खेल यूं ही बेखौफ चलता रहेगा।

