सम्राट चौधरी बने बिहार के 24वें मुख्यमंत्री, 75 साल में पहली बार भाजपा के हाथ सत्ता की कमान

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पटना। बिहार की राजनीति में बुधवार को एक नया अध्याय जुड़ गया, जब राजधानी पटना स्थित लोकभवन में सम्राट चौधरी ने राज्य के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण कर इतिहास रच दिया। राज्यपाल सैय्यद अता हसनैन ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। बिहार के गठन के बाद बीते 75 वर्षों में यह पहला मौका है जब भारतीय जनता पार्टी का कोई नेता मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचा है। इस ऐतिहासिक क्षण ने राज्य की राजनीतिक दिशा और सत्ता संतुलन दोनों को नई परिभाषा दे दी है।

सम्राट चौधरी के साथ जेडीयू कोटे से वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। हालांकि नई एनडीए सरकार के गठन के बावजूद मंत्रिमंडल का विस्तार फिलहाल नहीं किया गया है और कैबिनेट में अभी 33 मंत्री पद खाली हैं। माना जा रहा है कि आगामी दिनों में गठबंधन दलों के बीच सहमति के बाद मंत्रिमंडल विस्तार किया जाएगा।

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शपथ ग्रहण समारोह में एनडीए के कई बड़े चेहरे मौजूद रहे। समारोह में बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, एलजेपी नेता चिराग पासवान और हम प्रमुख जीतन राम मांझी समेत कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी ने इसे शक्ति प्रदर्शन का रूप दे दिया।

सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने महज नौ साल पहले ही बीजेपी का दामन थामा था। अपने तेजतर्रार और आक्रामक राजनीतिक अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले सम्राट ने करीब 26 साल पहले विधायक के रूप में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने संगठन और सरकार दोनों में अपनी मजबूत पकड़ बनाई। वर्ष 2024 में वह पहली बार उपमुख्यमंत्री बने और 2025 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की बड़ी जीत के बाद दोबारा उपमुख्यमंत्री पद संभाला। अब पार्टी नेतृत्व ने उन पर भरोसा जताते हुए बिहार की कमान सौंप दी है।

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सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही उनके सामने कई बड़ी चुनौतियां भी खड़ी हैं। उन्हें न केवल बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था को संभालना होगा, बल्कि एनडीए गठबंधन में संतुलन बनाए रखने, सहयोगी दलों को साथ लेकर चलने और जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की भी जिम्मेदारी निभानी होगी।

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गौरतलब है कि इससे पहले मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार ने पद से इस्तीफा देकर सत्ता परिवर्तन का रास्ता साफ किया। लंबे समय तक बिहार की राजनीति में बीजेपी सहयोगी दल की भूमिका में रही, लेकिन इस बार समीकरण पूरी तरह बदल गए। पार्टी न केवल राज्य की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी, बल्कि पहली बार मुख्यमंत्री पद पर भी अपना कब्जा जमाने में सफल रही।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में बीजेपी का यह उदय आने वाले वर्षों में राज्य की राजनीति की दिशा बदल सकता है। सम्राट चौधरी के नेतृत्व में पार्टी अब सीधे जनता के बीच अपनी सरकार के कामकाज के आधार पर खुद को स्थापित करने की तैयारी में है।

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