अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर: ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी, चीन की तेल सप्लाई पर संकट, रूस आया समर्थन में

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तेहरान। मध्य-पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने वैश्विक कूटनीति और ऊर्जा बाजारों की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों पर सख्त नियंत्रण लागू कर दिया है और ईरानी पोर्ट्स के आसपास नौसैनिक नाकेबंदी शुरू कर दी है। अमेरिका ने कहा है कि यह कदम ईरान पर दबाव बढ़ाने और उसकी समुद्री गतिविधियों को सीमित करने के लिए उठाया गया है।

अमेरिकी विदेश मंत्री स्कॉट बेसेंट ने दावा किया है कि इस कार्रवाई के बाद ईरान अब चीन को पहले की तरह तेल आपूर्ति नहीं कर पाएगा। उनका कहना है कि अमेरिका की रणनीति ईरान की तेल निर्यात क्षमता को कमजोर करने और उसके आर्थिक स्रोतों पर चोट पहुंचाने की है। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में हलचल तेज हो गई है।

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इसी बीच रूस ने खुलकर चीन के समर्थन में उतरते हुए कहा है कि यदि ईरान की आपूर्ति बाधित होती है तो वह चीन की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार है। माना जा रहा है कि इस घटनाक्रम से वैश्विक स्तर पर नए सामरिक समीकरण बन सकते हैं और अमेरिका-रूस के बीच तनाव भी और गहरा सकता है।

हालांकि कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अमेरिकी नाकेबंदी के बावजूद ईरान के कम से कम तीन जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य पार करने में सफल रहे हैं। वहीं अमेरिकी बलों ने हाल के दिनों में कई जहाजों को वापस मोड़ने की कार्रवाई की है।

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उधर, अमेरिका-ईरान के बीच हालात और बिगड़ते नजर आए जब 11-12 अप्रैल को इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई। वार्ता विफल रहने के बाद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है।

इसी तनावपूर्ण माहौल के बीच बुधवार को तेहरान में एक जोरदार विस्फोट की खबर सामने आई, जिसमें कम से कम तीन लोगों के घायल होने की सूचना है। हालांकि विस्फोट के कारणों को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसे मौजूदा तनाव से जोड़कर देखा जा रहा है।

अब दोनों देशों के बीच अगले दौर की वार्ता 16 अप्रैल को होने की संभावना जताई जा रही है। पाकिस्तान की मध्यस्थता अपेक्षित सफलता नहीं दिला सकी, जिसके बाद अमेरिका अब नए कूटनीतिक विकल्प तलाश रहा है।

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सूत्रों के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से करीब 40 मिनट तक फोन पर बातचीत की। इस दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा, वैश्विक समुद्री व्यापार और मध्य-पूर्व में शांति बहाली जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। माना जा रहा है कि अमेरिका अब क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भारत की भूमिका को अहम मानकर चल रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिका-ईरान के बीच तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें 16 अप्रैल की संभावित वार्ता पर टिकी हैं, जो तय करेगी कि हालात कूटनीति की ओर बढ़ेंगे या संघर्ष की दिशा में।

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