आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: काटने पर अब सरकार ही नहीं, डॉग फीडर्स भी होंगे जिम्मेदार

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नई दिल्ली। आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों और उनसे हो रही मौतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (13 जनवरी) को बेहद सख्त रुख अपनाया। शीर्ष अदालत ने साफ संकेत दिए कि रिहायशी इलाकों में आवारा कुत्तों द्वारा किसी व्यक्ति को काटने से यदि चोट या मौत होती है, तो इसके लिए अब केवल राज्य सरकारें या नगर निकाय ही नहीं, बल्कि कुत्तों को पालने और खुले में उन्हें खाना खिलाने वाले लोग और संगठन भी जिम्मेदार ठहराए जा सकते हैं।

Stray Dogs Menace: Supreme Court Issues Strong Warning to States and Dog Feeders: न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ इस मामले में स्वतः संज्ञान याचिका पर सुनवाई कर रही थी। कोर्ट ने टिप्पणी की कि जो लोग वास्तव में आवारा कुत्तों के प्रति सहानुभूति रखते हैं, उन्हें उन्हें अपने घरों या परिसरों में रखना चाहिए, न कि सड़कों पर छोड़कर आम नागरिकों की जान खतरे में डालनी चाहिए।

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सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा कि कुत्तों के काटने से बच्चों या बुजुर्गों की मृत्यु अथवा गंभीर चोट के हर मामले में राज्य सरकारों से भारी मुआवजा वसूला जाएगा, क्योंकि बीते पांच वर्षों में नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन में गंभीर लापरवाही सामने आई है। साथ ही, आवारा कुत्तों को खाना खिलाने वालों की जिम्मेदारी और जवाबदेही भी तय की जाएगी।

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न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने भी पीठ की राय से सहमति जताते हुए सवाल उठाया कि जब एक 9 साल के बच्चे पर कुत्तों का हमला होता है, तो उसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी? उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत इस गंभीर सामाजिक समस्या से आंखें मूंदकर नहीं बैठ सकती।

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गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट 7 नवंबर, 2025 के अपने आदेश में संशोधन की मांग से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। यह मामला पिछले वर्ष 28 जुलाई को शुरू हुए उस स्वतः संज्ञान से जुड़ा है, जो राष्ट्रीय राजधानी में आवारा कुत्तों के काटने से फैलने वाले रेबीज, विशेषकर बच्चों से संबंधित एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर दर्ज किया गया था।

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