टैक्स चोरी का ‘नाइट ऑपरेशन’!…अब अंधेरे में ट्रकों से उतर रहा करोड़ों का माल, सवालों में विभाग

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हल्द्वानी/रुद्रपुर: कुमाऊं मंडल में ट्रांसपोर्ट कारोबार की आड़ में चल रहा टैक्स चोरी का संगठित खेल अब और भी सुनियोजित तरीके से संचालित किया जा रहा है। पहले जहां यह अवैध धंधा दिनदहाड़े चलता था, वहीं अब विभागीय सख्ती का दिखावा होते ही कारोबारियों ने अपना पूरा नेटवर्क रात के अंधेरे में शिफ्ट कर दिया है। उत्तराखंड बॉर्डर से सटे रुद्रपुर, काशीपुर, किच्छा से लेकर हल्द्वानी तक सक्रिय इस टैक्स चोरी नेटवर्क पर राज्य कर विभाग की कार्रवाई पूरी तरह बेअसर साबित हो रही है।

हालात यह हैं कि दिन में विभागीय टीमें चेकिंग का दिखावा करती नजर आती हैं, लेकिन जैसे ही शाम ढलती है, यूपी बॉर्डर से टैक्स चोरी का माल लेकर भारी-भरकम ट्रक बेखौफ उत्तराखंड में प्रवेश कर जाते हैं। ये ट्रक मुख्य मार्गों से गुजरते हुए सीधे कथित ट्रांसपोर्ट कारोबारियों के गोदामों तक पहुंचते हैं, जहां रातों-रात माल उतारकर ट्रक वापस राज्य से बाहर भेज दिए जाते हैं।

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सूत्रों की मानें तो इस अवैध कारोबार में परचून, कपड़ा, जूते, कॉस्मेटिक, गुटखा और तंबाकू जैसे सामान बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी कर मंगाए जा रहे हैं। इससे सरकार को हर महीने लाखों नहीं बल्कि करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।

विभागीय अफसरों पर गंभीर आरोप, संरक्षण में फल-फूल रहा नेटवर्क

इस पूरे मामले का सबसे सनसनीखेज पहलू यह है कि राज्य कर विभाग के ही कुछ अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। विश्वसनीय सूत्रों का दावा है कि उक्त कथित अधिकारी अपने उच्चाधिकारियों के संरक्षण में टैक्स चोरी के इस नेटवर्क को न केवल बचा रहे हैं, बल्कि इसे बढ़ावा देने का काम भी कर रहे हैं।

बताया जा रहा है कि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी और टैक्स चोरी में शामिल कारोबारी तक इन कथित अफसरों की भूमिका से पूरी तरह वाकिफ हैं, लेकिन अंदरखाने सब कुछ जानते हुए भी कोई खुलकर बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा। दबी जुबान में चर्चा है कि संबंधित अधिकारी भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे हैं, और इनकी मिलीभगत के बिना यह पूरा नेटवर्क इतने बड़े स्तर पर संचालित होना संभव नहीं।

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चेकिंग की सूचना पहले ही पहुंचा दी जाती है

सूत्रों का यह भी दावा है कि जब-जब विभाग की ओर से चेकिंग अभियान चलाया जाता है, उससे पहले ही कथित अधिकारियों द्वारा रुद्रपुर, काशीपुर, किच्छा और हल्द्वानी के टैक्स चोरी से जुड़े कारोबारियों को अलर्ट कर दिया जाता है। उन्हें कुछ दिनों के लिए गतिविधियां सीमित करने और माल की आवाजाही रोकने को कह दिया जाता है, ताकि कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रहे और विभाग अपनी पीठ थपथपा सके।

इसी वजह से हाल के दिनों में दिन के समय टैक्स चोरी के माल की आवाजाही में थोड़ी कमी जरूर आई है, लेकिन रात के अंधेरे में यह खेल पहले की तरह जारी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि देर रात बड़े-बड़े ट्रकों की आवाजाही आम बात हो गई है, जो बिना किसी रोक-टोक के शहरों के भीतर बने गोदामों तक पहुंचते हैं।

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राजस्व को चूना, सिस्टम पर सवाल

इस पूरे मामले ने राज्य कर विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह उठ रहा है कि जब विभाग को नेटवर्क की पूरी जानकारी है, तब भी कार्रवाई नाकाम क्यों है? क्या यह केवल लापरवाही है या फिर अंदरखाने मिलीभगत का बड़ा खेल चल रहा है?

अगर समय रहते इस नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो सरकार को राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। वहीं ईमानदारी से टैक्स देने वाले व्यापारी भी इस अवैध कारोबार के चलते खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।

अब निगाहें शासन और विभाग के शीर्ष अधिकारियों पर टिकी हैं कि क्या वे इस टैक्स चोरी सिंडिकेट की जड़ों तक पहुंचकर कार्रवाई करेंगे या फिर यह खेल यूं ही रात के अंधेरे में फलता-फूलता रहेगा।

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