Nainital: बंद पड़े प्राथमिक विद्यालय को लील गई जंगल की आग, भवन और सामान जलकर राख

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नैनीताल। पहाड़ों में लगातार बढ़ रही जंगल की आग की घटनाएं अब आबादी और सार्वजनिक संपत्तियों के लिए भी खतरा बनने लगी हैं। जनपद के ओखलकांडा ब्लॉक में शुक्रवार को जंगल में लगी आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और इसकी लपटें ग्राम पंचायत पश्या के बेडूखेत स्थित बंद पड़े प्राथमिक विद्यालय तक पहुंच गई। आग की चपेट में आने से विद्यालय भवन और उसके भीतर रखा सामान पूरी तरह जलकर राख हो गया।

जानकारी के अनुसार करीब तीन बजे बेडूखेत के जंगल में अचानक आग लग गई। शुरुआत में आग जंगल के एक हिस्से तक सीमित थी, लेकिन तेज हवाओं और जंगल में फैली सूखी घास व झाड़ियों के कारण आग तेजी से फैलती चली गई। कुछ ही देर में आग की लपटें जंगल से सटे प्राथमिक विद्यालय तक पहुंच गईं और देखते ही देखते पूरा भवन धुएं और आग की चपेट में आ गया।

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घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और अपने स्तर पर आग बुझाने के प्रयास शुरू किए। ग्रामीणों ने पानी और स्थानीय संसाधनों की मदद से आग पर काबू पाने की कोशिश की, लेकिन तेज लपटों के सामने उनके प्रयास शुरुआती दौर में नाकाफी साबित हुए।

स्थानीय निवासी राजू पोखरिया ने बताया कि प्राथमिक विद्यालय लंबे समय से बंद पड़ा हुआ था और विद्यालय परिसर के आसपास काफी मात्रा में झाड़ियां और सूखी वनस्पतियां उग आई थीं। विद्यालय जंगल से सटा होने के कारण आग तेजी से भवन तक पहुंच गई। उन्होंने बताया कि इसी परिसर में पहले आंगनबाड़ी केंद्र भी संचालित किया जाता था।

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घटना के बाद ग्रामीणों ने तुरंत वन विभाग और शिक्षा विभाग को सूचना दी। सूचना मिलने पर विभागीय कर्मचारी भी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों के साथ मिलकर आग पर नियंत्रण पाने के प्रयास शुरू किए।

राहत की बात यह रही कि विद्यालय कई वर्षों से बंद था, जिसके चलते वहां कोई छात्र या कर्मचारी मौजूद नहीं था। इससे एक बड़ी जनहानि टल गई। हालांकि भवन और अंदर रखा पूरा सामान आग की भेंट चढ़ गया।

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मामले में वन क्षेत्र अधिकारी हरीश टम्टा ने बताया कि जंगल में लगी आग धीरे-धीरे विद्यालय तक पहुंच गई थी, जिससे भवन को नुकसान हुआ है। विभागीय कर्मचारियों और ग्रामीणों की मदद से आग पर काबू पा लिया गया है।

इस घटना ने एक बार फिर जंगलों में आग की बढ़ती घटनाओं और उससे होने वाले खतरों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जंगलों में आग रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था करने और प्रभावित क्षेत्र का सर्वे कर नुकसान का आकलन करने की मांग की है।

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