त्योहारी सीजन से पहले महंगाई का झटका…चीनी-चावल के बढ़े दाम, इलेक्ट्रॉनिक सामान भी हो सकते हैं महंगे

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नई दिल्ली। त्योहारी सीजन की शुरुआत से पहले आम लोगों को महंगाई का बड़ा झटका लगा है। कमजोर मानसून, अल-नीनो का प्रभाव, वैश्विक आपूर्ति संकट और जमाखोरी के चलते चीनी, चावल समेत कई जरूरी वस्तुओं की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में तांबे की रिकॉर्ड कीमतों ने इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों, वाहनों और घरेलू उपकरणों के महंगे होने की आशंका भी बढ़ा दी है।

उपभोक्ता मामलों के विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देशभर में चीनी की थोक कीमतें पिछले एक महीने में 5 प्रतिशत से अधिक बढ़कर औसतन 4,593 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गई हैं। पिछले एक वर्ष में चीनी की कीमतों में 7.64 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। खुदरा बाजार में भी चीनी की कीमत 47.11 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 49.53 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है।

चावल भी हुआ महंगा, दक्षिण भारत में सबसे ज्यादा असर

चावल की कीमतों में भी लगातार तेजी बनी हुई है। देश में चावल की औसत खुदरा कीमत 44.13 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 45.13 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गई है। हालांकि दक्षिण भारत के राज्यों आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल में चावल की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसका सीधा असर घरेलू बजट और मासिक राशन के खर्च पर पड़ रहा है।

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अल-नीनो और जमाखोरी से बढ़ा संकट

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार चावल की कीमतों में तेजी का सबसे बड़ा कारण अल-नीनो के कारण कमजोर मानसून, बारिश की कमी और जमाखोरी है। कम उत्पादन की आशंका के बीच बड़े स्तर पर स्टॉक जमा किए जाने से खुले बाजार में आपूर्ति घट गई है, जिससे कीमतों में और तेजी आई है।

प्रोफेसर जयशंकर तेलंगाना कृषि विश्वविद्यालय के एक नीति पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि अल-नीनो के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ और देशों ने एहतियात के तौर पर चावल का भंडारण बढ़ाया, तो वैश्विक बाजार में चावल की कीमतें 30 से 50 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं।

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चीनी क्यों हो रही महंगी?

विशेषज्ञों के अनुसार चीनी की कीमतों में उछाल के पीछे महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में पुराने स्टॉक का समाप्त होना और गन्ने का अधिक हिस्सा इथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल किया जाना प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा क्षेत्रीय स्तर पर आपूर्ति में असंतुलन का फायदा उठाकर सट्टेबाजों ने भी कीमतों को ऊपर धकेला है।

इसका असर आगामी रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेशोत्सव, नवरात्र और दीपावली जैसे त्योहारों के दौरान मिठाई, बेकरी उत्पाद और प्रोसेस्ड फूड की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।

तांबे की रिकॉर्ड कीमतों से बढ़ेगी इलेक्ट्रॉनिक सामान की लागत

महंगाई का दबाव केवल खाद्य वस्तुओं तक सीमित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर तांबे का तीन महीने का वायदा अनुबंध 13,842 डॉलर प्रति टन की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया है।

इसके पीछे दुनिया के सबसे बड़े तांबा उत्पादक देशों में शामिल चिली में आई बाढ़, शीतकालीन तूफान और भारी बर्फबारी के कारण प्रमुख खदानों में उत्पादन प्रभावित होना प्रमुख वजह माना जा रहा है। इसके साथ ही डेटा सेंटर, बिजली ग्रिड और औद्योगिक परियोजनाओं से बढ़ती मांग ने भी कीमतों को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।

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आम लोगों पर क्या होगा असर?

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कच्चे माल और खाद्यान्न की कीमतों में यही रुझान जारी रहा तो आने वाले महीनों में—

  • रसोई का मासिक बजट और बढ़ सकता है।
  • मिठाइयों और खाद्य उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।
  • इलेक्ट्रॉनिक सामान, घरेलू उपकरण और वाहन महंगे हो सकते हैं।
  • त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को जमाखोरी पर सख्ती, पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने और बाजार की निगरानी बढ़ाने जैसे कदम उठाने होंगे, ताकि महंगाई पर समय रहते नियंत्रण पाया जा सके।

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