वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ नीति एक बार फिर कानूनी विवादों में घिर गई है। अमेरिका के 25 राज्यों ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए आरोप लगाया है कि नए आयात शुल्क (टैरिफ) सुप्रीम कोर्ट के फैसले को दरकिनार कर लागू किए गए हैं और इनका बोझ सीधे अमेरिकी परिवारों और कारोबारों पर डाला जा रहा है।
दरअसल, पिछले महीने अमेरिका ने 59 देशों और यूरोपीय संघ से आने वाले उत्पादों पर दोहरे अंक के नए टैरिफ लगाए थे। प्रशासन का कहना है कि ये शुल्क उन देशों के खिलाफ लगाए गए हैं, जिन्होंने जबरन श्रम (Forced Labor) से बने उत्पादों के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शुरू हुआ विवाद
सोमवार (अमेरिकी समयानुसार) दायर मुकदमे में राज्यों ने कहा कि ट्रंप प्रशासन नए टैरिफ के जरिए उन आयात शुल्कों की भरपाई करना चाहता है, जिन्हें इस वर्ष फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अवैध करार दिया था। न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिटिया जेम्स ने कहा कि प्रशासन कानून के दायरे से बाहर जाकर अमेरिकी नागरिकों और व्यवसायों पर अतिरिक्त कर का बोझ डाल रहा है।
ट्रंप का तर्क-अमेरिकी उद्योग को मिलेगा फायदा
राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि ऊंचे टैरिफ से अमेरिकी विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) को बढ़ावा मिलेगा और विदेशी आयात पर निर्भरता कम होगी। अपने फैसले के समर्थन में उन्होंने पहले 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का हवाला देते हुए व्यापार घाटे को राष्ट्रीय आपातकाल बताया था और व्यापक स्तर पर आयात शुल्क लगाए थे।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि IEEPA राष्ट्रपति को इस प्रकार के व्यापक टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता। इसके बाद प्रशासन को पहले वसूले गए शुल्क आयातकों को लौटाने पड़े थे।
अब ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 का सहारा
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन ने पहले अस्थायी तौर पर 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ लागू किए, जिनकी अवधि 24 जुलाई को समाप्त हो गई। अब प्रशासन ने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत नए और अधिक स्थायी टैरिफ लागू किए हैं। यह प्रावधान राष्ट्रपति को उन देशों के खिलाफ आयात शुल्क लगाने की अनुमति देता है, जिन पर अनुचित व्यापारिक व्यवहार का आरोप हो।
गौरतलब है कि ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में भी चीन पर बड़े पैमाने पर टैरिफ लगाने के लिए इसी धारा का इस्तेमाल किया था और वह नीति अदालतों में भी कायम रही थी।
99 फीसदी अमेरिकी आयात होंगे प्रभावित
व्हाइट हाउस के अनुसार, जबरन श्रम से जुड़े उत्पादों पर लगाए गए नए टैरिफ 10 से 12.5 प्रतिशत के बीच हैं। इनका असर उन देशों पर पड़ेगा, जो अमेरिका के कुल आयात का लगभग 99 प्रतिशत हिस्सा उपलब्ध कराते हैं।
व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने कहा कि प्रशासन अपने वैध अधिकारों का इस्तेमाल कर रहा है। उनके मुताबिक जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर प्रभावी रोक नहीं लगाना अमेरिकी उद्योगों और कारोबारों के लिए नुकसानदेह है।
कानूनी लड़ाई पर टिकी निगाहें
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल व्यापार नीति तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रपति की शक्तियों और कांग्रेस के अधिकारों से भी जुड़ा है। यदि अदालत राज्यों के पक्ष में फैसला देती है तो ट्रंप प्रशासन की नई टैरिफ रणनीति को बड़ा झटका लग सकता है। वहीं, यदि सरकार को राहत मिलती है तो अमेरिका की व्यापार नीति में टैरिफ का इस्तेमाल और व्यापक रूप से देखने को मिल सकता है।

