वेनेजुएला में भूकंप से भीषण तबाही: मृतकों का आंकड़ा 920 पार, मलबे में अपनों को तलाश रहे लोग, दुनिया भर से पहुंच रही मदद..तस्वीरें

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काराकास। वेनेजुएला में आए दो शक्तिशाली भूकंपों ने भारी तबाही मचा दी है। देश के उत्तरी हिस्सों में हालात बेहद भयावह हैं। अब तक 920 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 3,000 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। हजारों लोग अब भी लापता हैं और आशंका जताई जा रही है कि मृतकों की संख्या में और इजाफा हो सकता है।

सबसे अधिक प्रभावित ला गुआइरा और उसके आसपास के इलाकों में सरकारी बचाव संसाधनों की कमी के कारण स्थानीय लोग अपने हाथों से मलबा हटाकर अपनों की तलाश कर रहे हैं। कहीं हथौड़ों से कंक्रीट तोड़ा जा रहा है तो कहीं मशीनों की मदद से मलबा हटाने की कोशिश की जा रही है। हर गुजरते घंटे के साथ मलबे में दबे लोगों के जीवित मिलने की उम्मीद कम होती जा रही है।

48 से 72 घंटे सबसे अहम, लेकिन समय तेजी से निकल रहा

आपदा को लगभग दो दिन बीत चुके हैं। राहत एजेंसियों का कहना है कि भूकंप के बाद शुरुआती 48 से 72 घंटे सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि इसी दौरान जीवित लोगों को बचाने की संभावना सबसे अधिक रहती है। इसके बावजूद कई इलाकों में बचाव दलों की सीमित मौजूदगी के कारण लोग खुद ही राहत अभियान चला रहे हैं। अब तक केवल 243 लोगों को मलबे से जीवित निकाला जा सका है, जबकि हजारों लोग अब भी लापता हैं।

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हर तरफ चीख-पुकार, अपनों की तलाश में भटक रहे परिवार

राजधानी काराकास के पास स्थित ला गुआइरा में तबाही का सबसे भयावह मंजर देखने को मिल रहा है। कई बहुमंजिला इमारतें पूरी तरह धराशायी हो चुकी हैं। एक महिला नजारेथ जिमेनेज अपने रिश्तेदार के कंधे पर सिर रखकर बिलखती नजर आई, जबकि आसपास मौजूद लोग मलबे में दबे लोगों को निकालने की कोशिश कर रहे थे।

वहीं ओमर रेयेस नामक व्यक्ति अपने टूटे घर के मलबे में लगातार अपने परिवार के सदस्यों को आवाज देता रहा, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। उसने बताया कि उसके करीब 20 रिश्तेदारों की मौत हो चुकी है और उसके दो बच्चे अब भी मलबे में दबे हैं। उसका कहना है कि उसने एक ही झटके में अपना पूरा परिवार खो दिया।

लाखों लोग प्रभावित, सड़कों पर गुजारनी पड़ रही रात

अंतरराष्ट्रीय राहत संगठनों के अनुसार इस आपदा से करीब 6.76 मिलियन (67.6 लाख) लोग प्रभावित हो सकते हैं, जिनमें लगभग 20 लाख लोग राजधानी काराकास में रहते हैं।

रेड क्रॉस के अधिकारियों का कहना है कि लोग अपने घरों में लौटने से डर रहे हैं क्योंकि अधिकांश इमारतें कमजोर हो चुकी हैं। हजारों परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। कई लोगों ने दवा दुकानों की पार्किंग, खाली मैदानों और सड़कों पर तिरपाल और छोटे-छोटे टेंट लगाकर अस्थायी शिविर बना लिए हैं।

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भोजन-पानी के लिए लंबी कतारें, सेना संभाल रही व्यवस्था

प्रभावित क्षेत्रों में भोजन और पेयजल की भारी किल्लत है। कैटिया ला मार में राहत सामग्री बांटने पहुंचे वाहनों के पास लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। स्थिति नियंत्रित करने के लिए सेना को हस्तक्षेप करना पड़ा।

सरकार का कहना है कि प्रभावित लोगों तक भोजन, पानी और जरूरी सामग्री पहुंचाई जा रही है, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि राहत जरूरत के मुकाबले बेहद कम है।

दुनिया भर से पहुंच रही राहत टीमें

वेनेजुएला सरकार के अनुसार मेक्सिको, अमेरिका, एल साल्वाडोर, स्विट्जरलैंड, कोलंबिया समेत कई देशों से 861 अंतरराष्ट्रीय स्वयंसेवक राहत कार्य में जुट चुके हैं।

संयुक्त राष्ट्र ने भी लगभग 1,000 आपातकालीन बचावकर्मियों और 25 अंतरराष्ट्रीय खोज एवं बचाव टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में भेजने की घोषणा की है। राहत कार्य के लिए भारी मशीनें, डंप ट्रक, चिकित्सा दल और खोजी कुत्ते लगातार भेजे जा रहे हैं।

अमेरिका ने बढ़ाई मानवीय सहायता

अमेरिकी विदेश विभाग ने बताया कि अमेरिका खोज एवं बचाव अभियान के साथ-साथ चिकित्सा और मानवीय सहायता उपलब्ध करा रहा है। अमेरिकी दक्षिणी कमान (SOUTHCOM) और काराकास स्थित अमेरिकी दूतावास के अधिकारियों ने वेनेजुएला सरकार के साथ राहत कार्यों के समन्वय पर चर्चा की है।

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अमेरिका की विशेष खोज एवं बचाव टीमों के लिए उपकरणों की पहली खेप वेनेजुएला पहुंच चुकी है। प्रत्येक टीम में करीब 80 विशेषज्ञ, जिनमें दमकलकर्मी, डॉक्टर, संरचनात्मक इंजीनियर और 12 प्रशिक्षित खोजी कुत्ते शामिल हैं। इन टीमों को सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में तैनात किया जा रहा है।

तबाही के बीच उम्मीद की किरण

भीषण विनाश के बीच कुछ राहत भरी तस्वीरें भी सामने आई हैं। काराकास के सैन बर्नार्डिनो इलाके में एक युवक को कई घंटे बाद मलबे से जीवित निकाला गया। उसे स्ट्रेचर पर बाहर लाए जाने के दौरान मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर उसका हौसला बढ़ाया, जबकि उसकी मां रोते हुए बार-बार कहती रही, “लेआंद्रो, मैं तुमसे प्यार करती हूं।”

इसी तरह ला गुआइरा में ढही दस मंजिला इमारत के मलबे से एक किशोरी को भी सुरक्षित बाहर निकाला गया। धूल से लथपथ इस बच्ची के जीवित बचने को राहतकर्मियों ने “चमत्कार” बताया और कहा कि ऐसे बचाव अभियान लोगों के लिए उम्मीद की सबसे बड़ी वजह हैं।

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