IMA: पहली बार 9 महिला सैन्य अफसरों ने पार किया ‘अंतिम पग’, राष्ट्रपति मुर्मू की मौजूदगी में 515 कैडेट बने अधिकारी

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देहरादून। भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) के इतिहास में शनिवार का दिन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया। देश की प्रतिष्ठित सैन्य प्रशिक्षण संस्था से पहली बार नौ महिला कैडेट सैन्य अधिकारी के रूप में पासआउट हुईं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मौजूदगी में आयोजित भव्य पासिंग आउट परेड (पीओपी) के दौरान कुल 515 कैडेट्स ने ‘अंतिम पग’ पार कर भारतीय सेना और मित्र देशों की सेनाओं में अधिकारी के रूप में अपनी नई यात्रा शुरू की।

आईएमए के ऐतिहासिक चेटवुड ड्रिल स्क्वायर पर आयोजित इस समारोह में अनुशासन, पराक्रम और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। जैसे ही कैडेट्स ने कदमताल करते हुए अंतिम पग पार किया, पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। लेकिन इस बार की परेड का सबसे भावुक और गौरवपूर्ण क्षण वह रहा, जब पहली बार नौ महिला कैडेट्स सैन्य अधिकारी बनकर अकादमी से बाहर निकलीं।

पहली बार महिला अफसरों ने रचा इतिहास

भारतीय सैन्य अकादमी लंबे समय से देश को उत्कृष्ट सैन्य अधिकारी देती रही है, लेकिन इस बार का बैच कई मायनों में विशेष रहा। पहली बार महिला कैडेट्स ने आईएमए से प्रशिक्षण पूरा कर नियमित सैन्य अधिकारी के रूप में सेना में कदम रखा। इसे भारतीय सेना में महिला सशक्तिकरण और समान अवसरों की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

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इन महिला अधिकारियों ने कठोर सैन्य प्रशिक्षण, शारीरिक दक्षता और नेतृत्व क्षमता की सभी कसौटियों पर खरा उतरकर यह उपलब्धि हासिल की है। उनके पासआउट होने के साथ ही भारतीय सेना के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है।

राष्ट्रपति मुर्मू ने ली परेड की सलामी

सुबह 6:40 बजे शुरू हुई पासिंग आउट परेड में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और परेड की सलामी ली। राष्ट्रपति निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चेटवुड भवन पहुंचीं, जहां उनका सैन्य सम्मान के साथ स्वागत किया गया।

इस अवसर पर उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, सेना के वरिष्ठ अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। राष्ट्रपति ने परेड का निरीक्षण किया और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कैडेट्स को सम्मानित किया। उन्होंने नव नियुक्त अधिकारियों को देशसेवा, कर्तव्यनिष्ठा और सैन्य मूल्यों को सर्वोपरि रखने का संदेश भी दिया।

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515 कैडेट्स ने शुरू की सैन्य जीवन की नई यात्रा

इस वर्ष की पासिंग आउट परेड में कुल 515 कैडेट्स शामिल रहे। इनमें 481 भारतीय कैडेट और 16 मित्र देशों के 34 कैडेट शामिल थे। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद ये कैडेट अपने-अपने देशों की सेनाओं में अधिकारी के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे।

परेड के बाद आयोजित ‘पीपिंग सेरेमनी’ में नव नियुक्त अधिकारियों के कंधों पर रैंक सजाई गई। यह वह भावुक क्षण था, जब वर्षों की मेहनत और प्रशिक्षण का सपना साकार हुआ।

देहरादून में रहा उत्सव जैसा माहौल

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शुक्रवार को ही देहरादून पहुंच गई थीं। जॉलीग्रांट एयरपोर्ट पर राज्यपाल गुरमीत सिंह, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन और डीजीपी दीपम सेठ ने उनका स्वागत किया था।

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पासिंग आउट परेड को लेकर पूरे देहरादून में उत्साह का माहौल रहा। कैडेट्स के परिजन और अतिथि सुबह से ही अकादमी परिसर में मौजूद रहे। अपने बेटों और बेटियों को सैन्य अधिकारी बनते देख परिवारों की आंखें गर्व और खुशी से नम हो गईं।

महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि आईएमए से पहली बार महिला अधिकारियों का पासआउट होना भारतीय सेना में बदलते दौर और बढ़ती लैंगिक समानता का प्रतीक है। यह उपलब्धि उन हजारों युवतियों के लिए प्रेरणा बनेगी जो सेना में अधिकारी बनकर देशसेवा का सपना देखती हैं।

आईएमए की यह पासिंग आउट परेड केवल 515 नए अधिकारियों के सेना में शामिल होने का समारोह नहीं रही, बल्कि भारतीय सैन्य इतिहास में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और नई संभावनाओं का प्रतीक बनकर भी याद रखी जाएगी। नौ महिला सैन्य अधिकारियों के ‘अंतिम पग’ के साथ भारतीय सेना ने एक नए युग में कदम रख दिया है।

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