हल्द्वानी। सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत समाजसेवी हेमंत गौनिया द्वारा लगातार विभिन्न सरकारी विभागों में डाली जा रही आरटीआई से कई महत्वपूर्ण खुलासे सामने आ रहे हैं। ताजा मामला उत्तराखण्ड पावर कार्पोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) विद्युत वितरण खण्ड नैनीताल से जुड़ा है, जहां मांगी गई सूचनाओं ने विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
विद्युत वितरण खण्ड नैनीताल के लोक सूचना अधिकारी एवं अधिशासी अभियंता द्वारा जारी पत्रांक 464 दिनांक 18 फरवरी 2026 के अनुसार 31 दिसंबर 2025 तक नैनीताल विद्युत वितरण खण्ड के अंतर्गत कुल 104 औद्योगिक विद्युत संयोजन तथा 7656 वाणिज्यिक विद्युत संयोजन संचालित पाए गए। विभाग ने बताया कि इन संयोजनों से संबंधित विस्तृत जानकारी 801 पृष्ठों की एक्सेल शीट में उपलब्ध है, जिसे प्राप्त करने के लिए 1602 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।
आरटीआई में सबसे बड़ा खुलासा पिछले पांच वर्षों में बिजली चोरी और गलत श्रेणी में बिजली उपयोग को लेकर हुआ है। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक कुल 174 चैकिंग अभियान चलाए गए। इनमें वर्ष 2021-22 में 18, वर्ष 2022-23 में 28, वर्ष 2023-24 में 20, वर्ष 2024-25 में 72 तथा वर्ष 2025-26 में 36 मामलों की जांच की गई।
विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचना में यह भी सामने आया है कि इन मामलों में लाखों रुपये की विद्युत निर्धारण राशि तय की गई तथा करोड़ों रुपये की वसूली की गई। कई मामलों में विभाग ने विद्युत कनेक्शन काटने की कार्रवाई की, जबकि कुछ मामलों में एफआईआर भी दर्ज कराई गई।
हालांकि विभाग ने यह स्वीकार किया कि पिछले पांच वर्षों में केवल कागजों में संचालित कंपनियों अथवा फर्मों से संबंधित कोई जानकारी विभागीय अभिलेखों में उपलब्ध नहीं है। साथ ही अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई से संबंधित सूचनाएं भी अभिलेखों में दर्ज नहीं पाई गईं।
समाजसेवी हेमंत गौनिया ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम के माध्यम से लगातार जनहित से जुड़े मामलों को उजागर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी विभिन्न विभागों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आरटीआई अभियान जारी रहेगा।

