Haldwani: ‘प्रातिज्ञ’ में सजी संस्कृति की सुरमयी शाम, लोक-संगीत, शास्त्रीय गायन और कथक ने बांधा समां

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हल्द्वानी: उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय एवं संगीत नाटक अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को विश्वविद्यालय परिसर स्थित सीडीएस स्व. जनरल बिपिन रावत बहुउद्देशीय सभागार में ‘प्रातिज्ञ’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश के प्रतिष्ठित कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से सांस्कृतिक माहौल को जीवंत कर दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर संगीत, नृत्य एवं कला प्रदर्शन विभाग के विद्यार्थियों ने स्वागत गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम की शानदार शुरुआत की।

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लोक कलाकार डॉ. माधुरी बड़थ्वाल ने उत्तराखण्ड के लोक संगीत की मनमोहक प्रस्तुति देते हुए लोकधुनों में समाहित शास्त्रीय राग-रागिनियों का सुंदर वर्णन किया। उनके गायन ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद प्रो. हरविन्दर सिंह ने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति दी और संगीत साधना में निरंतर अभ्यास के महत्व पर प्रकाश डाला।

कथक नृत्यांगना डॉ. पूर्णिमा पाण्डे ने अपनी आकर्षक प्रस्तुति से दर्शकों की खूब सराहना बटोरी। उन्होंने कहा कि शास्त्रीय कला में सफलता के लिए निरंतर अभ्यास और गुरु के प्रति सम्मान अनिवार्य है। विशिष्ट अतिथि डॉ. बसन्ती बिष्ट ने लोक एवं शास्त्रीय कलाओं के संरक्षण पर जोर दिया।

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मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा के साथ-साथ कला और संस्कृति के संरक्षण के लिए भी निरंतर प्रयासरत है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का माध्यम बनते हैं। अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. मनमोहन सिंह चौहान ने भी इस तरह के आयोजनों को समाज के लिए प्रेरणादायी बताया।

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कार्यक्रम में कुलसचिव डॉ. खेमराज भट्ट, निदेशक अकादमिक प्रो. पी.डी. पंत, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. प्रयाग जोशी, डॉ. भैरव दत्त तिवारी, पं. चंद्रशेखर तिवारी, सरोद वादक स्मित तिवारी सहित विश्वविद्यालय परिवार और बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

‘प्रातिज्ञ’ कार्यक्रम ने न केवल कला प्रेमियों को एक मंच पर जोड़ा, बल्कि भारतीय लोक और शास्त्रीय परंपराओं की समृद्ध विरासत को भी जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।

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