Haldwani: अब उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय में होगी प्राचीन भारतीय संचार व्यवस्था और एआई आधारित मीडिया की पढ़ाई

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हल्द्वानी। बदलते मीडिया परिदृश्य और तकनीक के बढ़ते प्रभाव के बीच उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय ने पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई को नए दौर की जरूरतों के अनुरूप ढालने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। विश्वविद्यालय में अब विद्यार्थियों को प्राचीन भारतीय संचार व्यवस्था के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मीडिया जैसे आधुनिक विषयों की भी पढ़ाई कराई जाएगी।

विश्वविद्यालय की पत्रकारिता एवं मीडिया अध्ययन विद्याशाखा के अध्ययन बोर्ड (बीओएस) की बैठक निदेशक प्रो. राकेश चंद्र रयाल की अध्यक्षता में हुई। बैठक में बाहरी विषय विशेषज्ञ ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुए। इस दौरान एमए पत्रकारिता एवं जनसंचार (एमएजेएमसी) कार्यक्रम की मौजूदा पाठ्य संरचना की विस्तार से समीक्षा की गई और नई शिक्षा नीति, मीडिया उद्योग की बदलती जरूरतों तथा वर्तमान समय की मांग को देखते हुए पूरे पाठ्यक्रम के पुनर्गठन पर सहमति बनी।

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बैठक में एमएजेएमसी कार्यक्रम को 80 क्रेडिट के अनुरूप अद्यतन स्वरूप देने की संस्तुति की गई। सभी सेमेस्टरों की विषयवस्तु को समकालीन मीडिया के बदलते स्वरूप के अनुसार तैयार करने पर जोर दिया गया है। खास तौर पर चौथे सेमेस्टर में ‘प्राचीन भारतीय संचार व्यवस्था’ और ‘एआई और मीडिया’ जैसे नए पाठ्यक्रम शामिल किए गए हैं।

इस बदलाव के बाद विद्यार्थियों को एक ओर जहां भारत की प्राचीन संचार परंपराओं, ज्ञान परंपरा और संचार के ऐतिहासिक स्वरूप को समझने का अवसर मिलेगा, वहीं दूसरी ओर वे मीडिया में एआई के इस्तेमाल, नई तकनीकों और बदलते डिजिटल वातावरण से भी परिचित होंगे।

डिजिटल पत्रकारिता और साइबर मीडिया पर भी जोर

पाठ्यक्रम के पुनर्गठन में केवल एआई और प्राचीन भारतीय संचार व्यवस्था को ही जगह नहीं दी गई है, बल्कि मीडिया के तेजी से उभरते क्षेत्रों को भी अधिक प्रभावी तरीके से शामिल किया गया है। इसमें डिजिटल पत्रकारिता, नई संचार तकनीक, मीडिया कानून एवं नैतिकता, साइबर मीडिया, समकालीन पत्रकारिता, मीडिया अनुसंधान और व्यावहारिक प्रशिक्षण जैसे विषयों को प्रमुखता दी गई है।

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पाठ्यक्रम की इकाइयों का पुनर्संरचन इस तरह किया गया है कि विद्यार्थी पारंपरिक पत्रकारिता की बुनियादी समझ हासिल करने के साथ-साथ डिजिटल और एआई आधारित मीडिया की चुनौतियों तथा संभावनाओं को भी समझ सकें। इससे विद्यार्थियों को मीडिया क्षेत्र में रोजगार के बदलते अवसरों के लिए तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

बैठक में शामिल विषय विशेषज्ञों ने नई पाठ्य संरचना की सराहना करते हुए इसे भविष्य उन्मुख, रोजगारपरक और मीडिया उद्योग की जरूरतों के अनुरूप बताया। अध्ययन सामग्री के लेखन के लिए विषय विशेषज्ञों के नामों पर भी विचार किया गया और आवश्यक संस्तुतियां दी गईं।

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प्रो. राकेश चंद्र रयाल ने कहा कि मीडिया शिक्षा तेजी से बदल रही है। ऐसे समय में विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा और अत्याधुनिक तकनीक दोनों से परिचित कराना जरूरी है। नया पाठ्यक्रम इसी सोच के अनुरूप तैयार किया गया है, ताकि विश्वविद्यालय के विद्यार्थी भविष्य में मीडिया क्षेत्र में आने वाली नई चुनौतियों और अवसरों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकें।

बैठक में विषय विशेषज्ञ के रूप में भारतीय जनसंचार के प्रो. डॉ. प्रमोद कुमार, प्रो. महावीर खुला विश्वविद्यालय कोटा राजस्थान के प्रो. सुबोध कुमार और दून विश्वविद्यालय के प्रो. राजेश कुमार ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुए।

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