प्रकाश हर्बोला की अध्यक्षता में हुई बैठक, 15 नवंबर से घर-घर जनसंपर्क और दिसंबर में विशाल रैली आयोजित करने की घोषणा
हल्द्वानी। यूजीसी कानून के विरोध तथा आरक्षण व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर गुरुवार को हल्द्वानी स्थित एक बैंक्वेट हॉल में जनसंवाद बैठक आयोजित की गई। पूर्व दर्जा राज्य मंत्री प्रकाश हर्बोला के नेतृत्व में आयोजित बैठक में विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों से जुड़े लोगों ने यूजीसी कानून को वापस लेने, एससी-एसटी एक्ट में बदलाव तथा आरक्षण व्यवस्था में सुधार को लेकर अपने विचार रखे। बैठक की अध्यक्षता डॉ. आशुतोष पंत ने की, जबकि संचालन पंडित मदन मोहन जोशी ने किया।
बैठक को संबोधित करते हुए प्रकाश हर्बोला ने कहा कि देश को विकसित भारत बनाने और विश्व गुरु के रूप में स्थापित करने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कार्य संस्कृति में सुधार आवश्यक है। उन्होंने आरक्षण व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि योग्य और प्रतिभाशाली युवाओं को देश में पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए, ताकि उन्हें रोजगार और बेहतर भविष्य की तलाश में विदेश न जाना पड़े। उन्होंने कहा कि कार्य संस्कृति में सुधार के साथ इसमें बाधक माने जाने वाले कानूनों की समीक्षा भी जरूरी है।
हर्बोला ने घोषणा की कि इस मुद्दे को लेकर 15 नवंबर से घर-घर जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा। इसके बाद दिसंबर में एक विशाल रैली आयोजित की जाएगी। उन्होंने लोगों से इस अभियान में भागीदारी करने की अपील की।
बैठक में एडवोकेट पूरन सिंह रावत ने यूजीसी कानून और एससी-एसटी एक्ट से जुड़े प्रावधानों पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने आरक्षण व्यवस्था के मौजूदा स्वरूप पर सवाल उठाते हुए इसमें बदलाव की आवश्यकता बताई।
गांधी स्कूल के प्रबंधक मोहन बोरा ने यूजीसी कानून को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि उनके विचार में इसके प्रावधान विद्यार्थियों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। उन्होंने आशंका जताई कि कानून के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई और भविष्य में रोजगार के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।
मनोहर मिश्रा ने पदोन्नति में आरक्षण से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में इस व्यवस्था का प्रभाव महसूस किया है। उन्होंने आरक्षण संबंधी प्रावधानों में बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया।
योगेंद्र बिष्ट ने कहा कि युवाओं को यूजीसी कानून के संभावित प्रभावों के प्रति जागरूक होने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि युवाओं को इस विषय पर गंभीरता से विचार करते हुए अपनी बात रखनी चाहिए और कानून के विरोध में जनजागरूकता अभियान को आगे बढ़ाना चाहिए।
नगर व्यापार मंडल अध्यक्ष कैलाश जोशी ने कहा कि कानूनी व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जो वास्तविक पीड़ितों को सुरक्षा और न्याय प्रदान करे तथा किसी अन्य व्यक्ति के साथ अन्याय की स्थिति पैदा न होने दे। वहीं, व्यापार मंडल के प्रदेश महामंत्री हर्षवर्धन पांडे ने जातिगत आरक्षण और एससी-एसटी एक्ट को समाप्त करने संबंधी प्रस्तावों पर खुली चर्चा किए जाने तथा आवश्यक सुधारों पर विचार करने की बात कही।
बैठक में वक्ताओं ने यूजीसी कानून और आरक्षण व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे। आयोजकों के अनुसार, आगामी 15 नवंबर से जनसंपर्क अभियान चलाकर लोगों को इस मुद्दे से जोड़ने तथा दिसंबर में प्रस्तावित रैली के माध्यम से अपनी मांगों को उठाने की तैयारी की जा रही है।
इस दौरान सत्येंद्र तोमर, पार्षद गोपाल भट्ट, अपर सचिव जीएस उप्रेती, भुवन भट्ट, तेज सिंह कार्की, विशाल शर्मा, हयात सिंह रावत, जितेंद्र रौतेला और पीतांबर बिष्ट सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

