त्योहारी सीजन से पहले महंगाई पर सरकार का बड़ा वार, 10 लाख टन चीनी होगी ड्यूटी-फ्री आयात, जमाखोरी पर भी कसा शिकंजा

खबर शेयर करें

नई दिल्ली: देश में त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। आम उपभोक्ताओं को महंगाई के झटके से राहत देने और घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन चीनी के शुल्क-मुक्त आयात को मंजूरी दे दी है। पिछले दो महीनों में चीनी की कीमतों में करीब 40 फीसदी तक उछाल आने के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है।

सरकार के इस फैसले का मकसद त्योहारी मौसम में बढ़ने वाली मांग के बीच बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना और कीमतों को नियंत्रण में रखना है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है और आम तौर पर घरेलू खपत के लिए उसे बड़े पैमाने पर आयात की जरूरत नहीं पड़ती। हालांकि, इस साल उत्पादन और आपूर्ति को लेकर बने दबाव ने सरकार को आयात का रास्ता खोलने के लिए मजबूर किया है।

दो महीने में 40 फीसदी महंगी हुई चीनी

घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में पिछले दो महीनों के दौरान करीब 40 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। अकेले पिछले एक महीने में कीमतें करीब 10 फीसदी बढ़ी हैं और बाजार भाव रिकॉर्ड स्तर के आसपास पहुंच गए हैं।

यह भी पढ़ें 👉  दिल्ली में सांस लेना हुआ मुश्किल, आनंद विहार में AQI 409 पहुंचा

चीनी उद्योग से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक, देश के प्रमुख उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में एक्स-मिल कीमत करीब 46 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। कीमतों में इस तेजी का असर आने वाले त्योहारी सीजन में मिठाई, पेय पदार्थ और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की कीमतों पर भी पड़ने की आशंका थी।

कमजोर मानसून ने बढ़ाई चिंता

चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे गन्ने की उपलब्धता को लेकर बनी चिंता भी एक प्रमुख कारण है। गन्ने की खेती के लिए मानसून बेहद महत्वपूर्ण है। इस साल मानसून की बारिश सामान्य से करीब 13 फीसदी कम रही है। जून के अंत तक बारिश की कमी 40 फीसदी से भी अधिक थी।

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 14 अगस्त तक देश में गन्ने की बुवाई करीब 58.3 लाख हेक्टेयर में हुई थी, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले थोड़ी कम है। कम बारिश और बुवाई क्षेत्र में गिरावट ने आगामी चीनी उत्पादन को लेकर बाजार की चिंताएं बढ़ाई हैं।

यह भी पढ़ें 👉  रेलवे के टिकट कैंसिलेशन नियम सख्त, रिफंड में कटौती...1 से 15 अप्रैल के बीच लागू होंगे नए प्रावधान

थोक खरीदारों के स्टॉक पर भी सरकार की नजर

सरकार ने केवल आयात का फैसला नहीं लिया है, बल्कि बाजार में जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक सीमा भी कड़ी कर दी है। नए आदेश के तहत एक महीने में 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी की खपत करने वाले थोक उपभोक्ता अब अधिकतम 15 दिनों की खपत के बराबर स्टॉक रख सकेंगे।

यह व्यवस्था 1 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगी। इससे पहले स्टॉक सीमा 30 दिनों की खपत तक निर्धारित थी, जिसे अब घटाकर 15 दिन कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि स्टॉक सीमा घटाने से कारोबारी और बड़े उपभोक्ता जरूरत से अधिक चीनी जमा नहीं कर सकेंगे और बाजार में उपलब्धता बनी रहेगी।

चीनी मिलें भी जल्द शुरू करेंगी पेराई

त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने से पहले बाजार में नई चीनी पहुंचाने के लिए चीनी मिलों ने भी तैयारी शुरू कर दी है। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र की चीनी मिलें इस साल सामान्य समय से करीब 10 से 15 दिन पहले पेराई सत्र शुरू करने की योजना बना रही हैं।

आमतौर पर पेराई सत्र नवंबर की शुरुआत में शुरू होता है, लेकिन इस बार इसे अक्टूबर के मध्य या उत्तरार्ध में शुरू किए जाने की तैयारी है। इसका उद्देश्य त्योहारी मांग बढ़ने के दौरान बाजार में नई चीनी की आपूर्ति सुनिश्चित करना है।

यह भी पढ़ें 👉  Uttarakhand: प्राथमिक शिक्षक भर्ती पर संकट के बादल, एक साथ काउंसलिंग का प्रयोग बना विवाद की जड़

क्यों बढ़ी सरकार की चिंता?

अगस्त के अंत से जनवरी तक देश में त्योहारों का लंबा दौर चलता है। इस दौरान मिठाइयों, बेकरी उत्पादों, पेय पदार्थों और अन्य खाद्य उत्पादों में चीनी की मांग तेजी से बढ़ती है। ऐसे में यदि मौजूदा कीमतों के साथ मांग भी बढ़ती तो खुदरा बाजार में चीनी और महंगी होने की आशंका थी।

इसी को देखते हुए सरकार ने एक साथ दो मोर्चों पर कदम उठाया है—एक ओर 10 लाख टन ड्यूटी-फ्री चीनी का आयात, दूसरी ओर जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक सीमा में कटौती।

उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद

सरकार के इन फैसलों से आने वाले दिनों में घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ने और कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है। आयातित चीनी की आपूर्ति और अक्टूबर में जल्द शुरू होने वाली पेराई से बाजार में अतिरिक्त स्टॉक उपलब्ध हो सकता है।

ADVERTISEMENTS

You cannot copy content of this page