कीव। रूस के साथ जारी युद्ध के बीच यूक्रेन ने युद्ध तकनीक के क्षेत्र में एक नई महत्वाकांक्षी पहल का ऐलान किया है। पूर्व यूक्रेनी रक्षा मंत्री मिखाइलो फेडोरोव ने 26 सितंबर को ल्वीव में आयोजित IT Arena 2026 सम्मेलन के दौरान ‘Army of Robots’ यानी ‘रोबोट आर्मी’ परियोजना लॉन्च करने की घोषणा की। इसका उद्देश्य युद्ध के सबसे जोखिम भरे कार्यों में मानव सैनिकों की जगह रोबोटिक प्रणालियों का इस्तेमाल बढ़ाना और सैनिकों की जान को खतरे से दूर रखना है।
फेडोरोव के मुताबिक यह किसी एक कंपनी की परियोजना नहीं, बल्कि एक व्यापक डिफेंस-टेक इकोसिस्टम होगा। इसमें रक्षा तकनीक कंपनियों में निवेश, नई तकनीकों पर शोध, सैन्य इकाइयों के साथ फील्ड टेस्टिंग और सफल प्रणालियों का तेजी से बड़े पैमाने पर उत्पादन शामिल होगा।
ड्रोन आर्मी के बाद अब ग्राउंड रोबोट पर जोर
यूक्रेन ने वर्ष 2022 में ‘Army of Drones’ कार्यक्रम शुरू किया था। अब फेडोरोव का कहना है कि युद्ध में अगला बड़ा तकनीकी बदलाव रोबोटिक्स के क्षेत्र में होना चाहिए। यूक्रेन पहले से ही जमीनी रोबोटिक प्रणालियों का इस्तेमाल रसद और अन्य सैन्य कार्यों में कर रहा है। यूक्रेनी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, जनवरी 2026 में ग्राउंड रोबोटिक सिस्टम ने 7,000 से अधिक लड़ाकू और लॉजिस्टिक मिशन किए थे।
नई पहल का लक्ष्य इन प्रणालियों के इस्तेमाल को और बड़े स्तर तक ले जाना है।
घायल सैनिकों को निकालने से लेकर गोला-बारूद पहुंचाने तक
फेडोरोव के मुताबिक रोबोटिक प्रणालियों का इस्तेमाल ऐसे कामों में किया जा सकता है, जिनमें सैनिकों के सीधे खतरे में आने की आशंका अधिक रहती है। इनमें घायल सैनिकों की निकासी, गोला-बारूद और अन्य सैन्य सामग्री पहुंचाना, माइनिंग और डी-माइनिंग, टोही, मोर्चों की सुरक्षा और लक्ष्यों पर कार्रवाई जैसे कार्य शामिल हैं।
यूक्रेन पहले ही ग्राउंड रोबोटिक वाहनों का इस्तेमाल अग्रिम मोर्चे पर कर रहा है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इनका एक महत्वपूर्ण उपयोग लॉजिस्टिक्स और घायल सैनिकों को ऐसे इलाकों से निकालने में हो रहा है, जहां मानव कर्मियों को भेजना ज्यादा जोखिमपूर्ण है।
ह्यूमनॉइड रोबोट पर भी खास फोकस
इस परियोजना में केवल पहिएदार या ट्रैक वाले सैन्य वाहन ही नहीं, बल्कि ह्यूमनॉइड रोबोट विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना भी सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक ऐसे रोबोटों से मोर्चे पर कुछ अपेक्षाकृत सरल कार्य कराने की कल्पना की गई है, जिन्हें मशीनों को तेजी से सिखाया जा सके।
हालांकि, विशेषज्ञ रिपोर्टों के अनुसार यूक्रेन में इस्तेमाल हो रहे अधिकांश मौजूदा ग्राउंड रोबोट अभी पूरी तरह स्वायत्त नहीं हैं। कई प्रणालियों को मानव ऑपरेटर दूर से नियंत्रित करते हैं। युद्धक्षेत्र में वास्तविक रूप से इंसानों की जगह बड़े पैमाने पर स्वायत्त रोबोट तैनात करना अभी तकनीकी और परिचालन चुनौती बना हुआ है।
इंजीनियरों और डिफेंस-टेक कंपनियों से मांगा सहयोग
फेडोरोव ने इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए डिफेंस-टेक कंपनियों, रोबोटिक्स इंजीनियरों और तकनीकी नेतृत्व से जुड़े विशेषज्ञों को जोड़ने की प्रक्रिया शुरू करने की जानकारी दी है। उनका जोर निजी क्षेत्र के नवाचार, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, सैन्य परीक्षण और सफल तकनीकों को तेजी से उत्पादन तक पहुंचाने पर है।
यूक्रेन पहले ही ग्राउंड रोबोटिक सिस्टम की खरीद और तैनाती का विस्तार कर चुका है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार 2026 में इन प्रणालियों के उत्पादन और खरीद के साथ-साथ उनके संचार और कमांड-एंड-कंट्रोल सिस्टम को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
युद्ध का भविष्य कितना बदलेगा?
यूक्रेन की ‘रोबोट आर्मी’ की योजना ऐसे समय सामने आई है जब रूस-यूक्रेन युद्ध में ड्रोन और अन्य मानवरहित प्रणालियों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि रोबोट निकट भविष्य में पूरी तरह मानव सैनिकों की जगह ले लेंगे।
अग्रिम मोर्चे पर रोबोटिक प्रणालियों को ऊर्जा, संचार, गोला-बारूद, रखरखाव और दुश्मन की इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। मौजूदा ग्राउंड रोबोट भी दुश्मन के ड्रोन और अन्य हमलों की चपेट में आ सकते हैं।

