नई दिल्ली। देश के करोड़ों प्रीपेड मोबाइल उपभोक्ताओं के लिए टेलीकॉम सेक्टर से जुड़ा अहम बदलाव सामने आया है। भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) ने Telecom Consumers Protection (13th Amendment) Regulations, 2026 जारी कर दिए हैं। TRAI के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक यह संशोधन 22 सितंबर 2026 को जारी हुआ है।
इस बदलाव के केंद्र में प्रीपेड उपभोक्ताओं के लिए रिचार्ज की वैधता और प्लान विकल्पों से जुड़े नियम हैं। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प उपलब्ध कराना और अलग-अलग जरूरत वाले मोबाइल यूजर्स के लिए उपयुक्त टैरिफ विकल्प सुनिश्चित करना है।
28 दिन की वैलिडिटी को लेकर क्यों उठा था सवाल?
प्रीपेड मोबाइल सेवाओं में लंबे समय से 28 दिन की वैलिडिटी वाले प्लान आम रहे हैं। इसी वजह से यह सवाल उठता रहा है कि 12 महीने के कैलेंडर वर्ष में उपभोक्ता को 28 दिन के चक्र वाले प्लान के लिए 12 के बजाय 13 बार भुगतान करना पड़ सकता है।
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने 11 मार्च 2026 को संसद में इसी मुद्दे को उठाया था। उस समय उन्होंने सवाल किया था कि जब साल में 12 महीने होते हैं तो उपभोक्ताओं को 28 दिन की वैधता के कारण अतिरिक्त रिचार्ज क्यों करना पड़ता है।
30 दिन की वैलिडिटी वाले विकल्पों पर जोर
TRAI की ओर से जारी 13वें संशोधन के बाद प्रीपेड यूजर्स के लिए 30 दिन की वैधता वाले विकल्प उपलब्ध कराने का प्रावधान महत्वपूर्ण है। इसका मतलब यह है कि उपभोक्ताओं को केवल 28 दिन के रिचार्ज चक्र पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि बाजार में मौजूद सभी 28 दिन वाले प्लान तत्काल खत्म हो जाएंगे। नए नियमों का उद्देश्य उपभोक्ताओं को वैकल्पिक वैधता और प्लान विकल्प उपलब्ध कराना है।
सिर्फ डेटा नहीं, वॉइस और SMS वाले प्लान भी
नए नियामकीय बदलाव का एक महत्वपूर्ण पहलू उन ग्राहकों से जुड़ा है, जिन्हें मोबाइल इंटरनेट की ज्यादा जरूरत नहीं होती। ऐसे उपभोक्ताओं के लिए वॉइस और SMS आधारित प्लान उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है।
इससे खासतौर पर उन लोगों को फायदा हो सकता है जो मोबाइल फोन का इस्तेमाल मुख्य रूप से कॉल और मैसेज के लिए करते हैं और डेटा की जरूरत बहुत कम या बिल्कुल नहीं रखते।
TRAI ने हितधारकों से मांगे थे सुझाव
इस बदलाव से पहले TRAI ने 7 अप्रैल 2026 को Telecom Consumers Protection (Thirteenth Amendment) Regulations का ड्राफ्ट जारी कर सार्वजनिक परामर्श शुरू किया था। प्रक्रिया के दौरान उपभोक्ता संगठनों के साथ-साथ टेलीकॉम कंपनियों और उद्योग संगठनों से भी सुझाव लिए गए। TRAI के रिकॉर्ड में भारती एयरटेल, रिलायंस जियो, वोडाफोन आइडिया, COAI, GSMA और अन्य संगठनों की टिप्पणियां दर्ज हैं। इसके बाद नियामक ने अंतिम संशोधन जारी किया, जो अब TRAI की आधिकारिक विनियम सूची में दर्ज है।
उपभोक्ताओं के लिए क्या बदलेगा?
नए नियमों का सबसे अहम असर यह है कि प्रीपेड ग्राहकों को रिचार्ज चुनते समय अधिक वैधता विकल्प मिलेंगे। वहीं, कम डेटा इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों के लिए उनकी जरूरत के अनुरूप वॉइस और SMS आधारित विकल्प उपलब्ध होने की संभावना बढ़ेगी।

