देहरादून/हरिद्वार। हरिद्वार नगर निगम के बहुचर्चित जमीन खरीद घोटाले में विजिलेंस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए निलंबित आईएएस अधिकारी वरुण चौधरी समेत 10 लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कर ली है। एफआईआर दर्ज होने के बाद शुक्रवार को विजिलेंस की आठ टीमों ने उत्तराखंड के साथ ही दिल्ली और लखनऊ समेत कई शहरों में एक साथ छापेमारी कर महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में लिए हैं।
सूत्रों के अनुसार, छापेमारी के दौरान कई ऐसे दस्तावेज भी मिले हैं, जो आरोपियों की नामी और बेनामी संपत्तियों से जुड़े बताए जा रहे हैं। इनकी जांच के बाद मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
54 करोड़ की जमीन खरीद पर उठे थे सवाल
मामला हरिद्वार नगर निगम द्वारा ग्राम सराय के पास 2.3070 हेक्टेयर कृषि भूमि की खरीद से जुड़ा है। आरोप है कि कृषि भूमि की श्रेणी को नियमों की अनदेखी कर व्यावसायिक (कमर्शियल) श्रेणी में बदल दिया गया और नगर निगम ने इस भूमि को करीब 54 करोड़ रुपये में खरीद लिया।
सबसे बड़ा सवाल यह भी उठा कि आखिर नगर निगम ने इतनी बड़ी रकम खर्च कर यह जमीन किस उद्देश्य से खरीदी, जबकि इसके पीछे कोई स्पष्ट और ठोस आवश्यकता दर्ज नहीं थी। शिकायत मिलने के बाद हुई प्रारंभिक जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आने पर तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह, नगर आयुक्त वरुण चौधरी सहित कई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी।
सतर्कता समिति की संस्तुति के बाद दर्ज हुई एफआईआर
मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन की अध्यक्षता में हुई राज्य सतर्कता समिति की बैठक में मामले की जांच रिपोर्ट पर विचार किया गया। समिति ने आईएएस वरुण चौधरी समेत 10 लोगों के खिलाफ विजिलेंस जांच और प्राथमिकी दर्ज करने की संस्तुति की थी। इसके बाद विजिलेंस ने मुकदमा दर्ज कर जांच को आगे बढ़ाते हुए व्यापक छापेमारी अभियान शुरू किया।
छह शहरों में एक साथ विजिलेंस की दबिश
मामले की गंभीरता को देखते हुए विजिलेंस ने आठ विशेष टीमें गठित कीं। इन टीमों ने हरिद्वार, देहरादून, ऋषिकेश, रुद्रप्रयाग, दिल्ली और लखनऊ में 10 से अधिक स्थानों पर एक साथ छापे मारे। कार्रवाई देर रात तक जारी रही।
छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है। विजिलेंस यह भी पता लगा रही है कि कथित घोटाले से अर्जित धन का उपयोग कहीं अन्य संपत्तियां खरीदने में तो नहीं किया गया।
किन-किन लोगों पर दर्ज हुई एफआईआर
निलंबित अधिकारी और कर्मचारी
- आईएएस वरुण चौधरी (तत्कालीन नगर आयुक्त, हरिद्वार)
- रवींद्र कुमार दयाल (सहायक नगर आयुक्त)
- लक्ष्मीकांत भट्ट (कर अधीक्षक)
- आनंद मिश्रा (सहायक अभियंता एवं प्रभारी अधिशासी अभियंता)
- वेदपाल (संपत्ति लिपिक)
- दिनेश कांडपाल (मानचित्रकार)
जमीन विक्रेता एवं अन्य आरोपी
- सुमन देवी
- जितेंद्र कुमार
- अभिषेक यादव
- सुजीत कुमार सिंह
जांच में हो सकते हैं और बड़े खुलासे
विजिलेंस अधिकारियों का मानना है कि जब्त किए गए दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच के बाद मामले में नए तथ्य सामने आ सकते हैं। यदि नामी-बेनामी संपत्तियों या अवैध लेनदेन के साक्ष्य मिलते हैं तो आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का दायरा और बढ़ सकता है। हरिद्वार जमीन घोटाले को उत्तराखंड के हाल के वर्षों के सबसे चर्चित प्रशासनिक मामलों में माना जा रहा है, जिस पर अब विजिलेंस की जांच निर्णायक चरण में पहुंचती दिख रही है।

