Uttarakhand: ज्योलीकोट दूषित पेयजल मामले में बड़ी कार्रवाई, प्रभारी अधीक्षण अभियंता समेत छह अधिकारी निलंबित

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नैनीताल/हल्द्वानी। नैनीताल जिले के ज्योलीकोट और आसपास के क्षेत्रों में दूषित पेयजल आपूर्ति के गंभीर प्रकरण को शासन ने गंभीरता से लेते हुए बड़ी कार्रवाई की है। दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही की पुष्टि होने के बाद उत्तराखंड जल संस्थान, हल्द्वानी के प्रभारी अधीक्षण अभियंता विशाल कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

निलंबन अवधि के दौरान विशाल कुमार को मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय, देहरादून से संबद्ध किया गया है। वहीं, उनके स्थान पर नंद किशोर को अधीक्षण अभियंता का दायित्व सौंपा गया है।

इन अधिकारियों पर भी गिरी गाज

शासन ने मामले में घोर लापरवाही बरतने के आरोप में उत्तराखंड जल संस्थान के कई अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी निलंबन की कार्रवाई की है। इनमें सहायक अभियंता नैनीताल मोहन सिंह रावत, अपर सहायक अभियंता रविंद्र, कनिष्ठ अभियंता दीपांशु शर्मा और प्रभारी सहायक अभियंता संजय कुमार आर्या शामिल हैं।

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इसके अलावा पेयजल निर्माण शाखा, पेयजल निगम भीमताल के प्रभारी अधिशासी अभियंता शशिपाल सिंह को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं, जल संस्थान नैनीताल के अधिशासी अभियंता अनीश एम. पिल्लई को भविष्य के लिए कठोर चेतावनी जारी की गई है।

दूषित पानी से बिगड़ी थी सैकड़ों लोगों की तबीयत

ज्योलीकोट क्षेत्र में दूषित पेयजल की आपूर्ति का मामला सामने आने के बाद बड़ी संख्या में लोगों के बीमार पड़ने से स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन में हड़कंप मच गया था। दूषित पेयजल के सेवन के बाद दो लोगों की मौत होने की बात सामने आई थी, जबकि 400 से अधिक लोग पीलिया और डायरिया की चपेट में आ गए थे।

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बीमार लोगों को उपचार के लिए हल्द्वानी के बेस अस्पताल और डॉ. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। इसके अलावा कई मरीजों ने निजी अस्पतालों में भी उपचार कराया।

अस्पतालों में अब भी भर्ती हैं मरीज

प्रकरण की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि घटना के बाद भी पीलिया और डायरिया से प्रभावित कई मरीज अस्पतालों में उपचार करा रहे हैं। दूषित पेयजल की वजह से बड़ी संख्या में लोगों के बीमार पड़ने के बाद क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं और पेयजल व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए थे।

शासन ने मांगा था अधिकारियों से जवाब

मामले को गंभीरता से लेते हुए शासन ने संबंधित अधिकारियों से पूरे प्रकरण में जवाब तलब किया था। अधिकारियों की ओर से शासन को दिए गए जवाब को संतोषजनक नहीं पाए जाने के बाद कार्रवाई की गई।

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शासन की कार्रवाई के बाद पेयजल आपूर्ति व्यवस्था में अधिकारियों की जिम्मेदारी और जवाबदेही को लेकर भी स्पष्ट संदेश गया है। मामले में कई अधिकारियों के निलंबन से विभागीय स्तर पर भी हड़कंप मचा हुआ है।

पेयजल व्यवस्था पर उठे सवाल

ज्योलीकोट प्रकरण ने पर्वतीय क्षेत्रों में पेयजल स्रोतों की निगरानी, पानी की गुणवत्ता की जांच और आपूर्ति व्यवस्था में बरती जाने वाली सावधानी को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। दूषित पेयजल के कारण बड़ी संख्या में लोगों के बीमार पड़ने के बाद अब संबंधित विभागों की जिम्मेदारी तय किए जाने की कार्रवाई सामने आई है।

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