Uttarakhand: 1990 से पहले नियुक्त एलटी शिक्षकों को वरिष्ठता का लाभ बरकरार, 3100 से अधिक पदोन्नतियों का रास्ता साफ

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नैनीताल। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा विभाग में वर्ष 1990 से पहले तदर्थ आधार पर नियुक्त एलटी ग्रेड शिक्षकों और प्रवक्ताओं की वरिष्ठता को लेकर वर्षों से चले आ रहे विवाद पर बड़ा फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार सहित सभी संबंधित याचिकाओं को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक अक्टूबर 1990 से पहले तदर्थ नियुक्त शिक्षकों की सेवाएं एक अक्टूबर 1990 से नियमित मानी जाएंगी और उनकी वरिष्ठता भी उसी तिथि से प्रभावी होगी।

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस मुद्दे पर पहले ही भुवन कांडपाल प्रकरण में स्पष्ट निर्णय दिया जा चुका है, जिसे हाई कोर्ट की खंडपीठ के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट भी बरकरार रख चुका है। ऐसे में इस विषय पर दोबारा विचार करने का कोई औचित्य नहीं बनता।

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3100 से अधिक शिक्षकों की पदोन्नति का रास्ता खुला

हाई कोर्ट के इस फैसले का सबसे बड़ा असर माध्यमिक शिक्षा विभाग के हजारों शिक्षकों पर पड़ेगा। निर्णय के बाद प्रदेश के 3100 से अधिक एलटी ग्रेड शिक्षकों की प्रवक्ता पद पर पदोन्नति का रास्ता साफ हो गया है। लंबे समय से वरिष्ठता विवाद के कारण पदोन्नति प्रक्रिया अटकी हुई थी।

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सरकार ने संशोधित वरिष्ठता सूची जारी होने की दी जानकारी

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि नवंबर 2025 में संशोधित वरिष्ठता सूची जारी कर दी गई थी। इसके तहत गढ़वाल मंडल के 268, कुमाऊं मंडल के 259 एलटी ग्रेड शिक्षकों तथा 418 प्रवक्ताओं को एक अक्टूबर 1990 से नियमितीकरण और वरिष्ठता का लाभ प्रदान किया जा चुका है।

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कोर्ट ने माना कि संबंधित प्रकरण में ट्रिब्यूनल के निर्देशों के अनुरूप आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, इसलिए अब इस मामले में किसी प्रकार के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।

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