देहरादून। उत्तराखंड में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को समाज कल्याण विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभाग की योजनाएं केवल वर्तमान आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि अगले 25 वर्षों की चुनौतियों और जरूरतों के अनुरूप तैयार की जाएं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड ऐसा मॉडल विकसित करे, जिसे भविष्य में देश के अन्य राज्य भी अपनाने के लिए प्रेरित हों।
मुख्यमंत्री आवास सभागार में आयोजित बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने समाज कल्याण विभाग की विभिन्न पेंशन योजनाओं के तहत जून 2026 की देय राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से एक क्लिक में प्रदेश के 9 लाख 80 हजार 950 लाभार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित की। कुल 145 करोड़ 42 लाख रुपये की राशि सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाई गई। इसमें केंद्र सरकार का अंश लगभग 7 करोड़ 2 लाख रुपये तथा राज्य सरकार का अंश लगभग 138 करोड़ 40 लाख रुपये रहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक सम्मान, सुरक्षा और सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन में दूरदृष्टि अपनाई जाए। आज की जरूरतों के साथ-साथ आने वाले वर्षों की सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जो लंबे समय तक प्रभावी बनी रहे।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में 60 वर्ष की आयु पूरी करते ही पात्र नागरिकों को स्वतः वृद्धावस्था पेंशन का लाभ मिलने की व्यवस्था विकसित की जाए। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों को आवेदन, सत्यापन और अन्य औपचारिकताओं के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ने चाहिए। तकनीक के बेहतर उपयोग से पूरी प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए, ताकि पात्र व्यक्ति को बिना किसी परेशानी के समय पर पेंशन मिल सके।
मुख्यमंत्री ने विभाग की विभिन्न योजनाओं के बेहतर समन्वय (इंटीग्रेशन) पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि कई योजनाओं में समान उद्देश्य होने के बावजूद अलग-अलग प्रक्रियाओं के कारण संसाधनों का पूरा उपयोग नहीं हो पाता। योजनाओं का बेहतर समन्वय कर लाभार्थियों को अधिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। साथ ही उन्होंने वित्तीय अनुशासन, संसाधनों के प्रभावी उपयोग और दीर्घकालिक स्थायित्व सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।
समीक्षा बैठक में बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना की भी विस्तार से समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि डोईवाला (देहरादून), पाइनस (नैनीताल) और सोमेश्वर (अल्मोड़ा) में निर्माणाधीन बाबू जगजीवन राम छात्रावासों का कार्य हर हाल में अक्टूबर 2026 तक पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण आवासीय एवं शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है और निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।
अधिकारियों ने बैठक में बताया कि बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना के तहत अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को माध्यमिक, उच्च एवं विश्वविद्यालय स्तर की शिक्षा के लिए छात्रावास सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। इस योजना में केंद्र सरकार प्रति छात्रावास 3.25 करोड़ रुपये तक की सहायता देती है। आवश्यकता पड़ने पर राज्य सरकार अतिरिक्त टॉप-अप राशि उपलब्ध कराकर आधुनिक सुविधाओं से युक्त छात्रावासों का निर्माण सुनिश्चित करती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को तकनीक आधारित और पूरी तरह पारदर्शी बनाया जा रहा है। डीबीटी के माध्यम से लाभार्थियों के खातों में सीधे राशि भेजने से भ्रष्टाचार की संभावना समाप्त होती है और पात्र व्यक्ति तक समय पर सहायता पहुंचती है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभाग की सभी सेवाओं को चरणबद्ध तरीके से डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाए, ताकि लोगों को अधिक सुविधा मिल सके।
जून 2026 के लिए जारी की गई पेंशन राशि में सबसे अधिक 6 लाख 11 हजार 245 वृद्धावस्था पेंशन लाभार्थियों को 91.69 करोड़ रुपये वितरित किए गए। इसके अलावा 2 लाख 35 हजार 850 विधवा पेंशन लाभार्थियों को 35.38 करोड़ रुपये, 88 हजार 787 दिव्यांग पेंशन लाभार्थियों को 13.32 करोड़ रुपये, 27 हजार 207 किसान पेंशन लाभार्थियों को 3.26 करोड़ रुपये, 8 हजार 258 परित्यक्ता पेंशन लाभार्थियों को 99.10 लाख रुपये, 7 हजार 297 भरण-पोषण अनुदान लाभार्थियों को 51.08 लाख रुपये, 2 हजार 179 तीलू रौतेली पेंशन लाभार्थियों को 26.15 लाख रुपये तथा 127 बौना पेंशन लाभार्थियों को 1.52 लाख रुपये की सहायता प्रदान की गई।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं शुरू करना नहीं, बल्कि ऐसी स्थायी व्यवस्था विकसित करना है, जो आने वाली पीढ़ियों की जरूरतों को भी पूरा कर सके। उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा और सम्मान प्रत्येक पात्र नागरिक का अधिकार है। उत्तराखंड में ऐसा सुशासन मॉडल विकसित किया जाएगा, जो पारदर्शिता, जवाबदेही और जनकल्याण का उदाहरण बने तथा अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा साबित हो।
बैठक में कैबिनेट मंत्री खजान दास, समाज कल्याण विभाग के सचिव सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

