Uttarakhand: लंबे समय से अनुपस्थित और गंभीर बीमार शिक्षकों को मिलेगी अनिवार्य सेवानिवृत्ति, शिक्षा मंत्री ने दिए निर्देश

खबर शेयर करें

देहरादून। उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सरकार अब सख्त कदम उठाने जा रही है। लंबे समय से अनुपस्थित और गंभीर रूप से बीमार चल रहे शिक्षकों पर कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने ऐसे शिक्षकों की पहचान कर उनकी सूची तत्काल शिक्षा महानिदेशालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया है कि सूची मिलने के बाद संबंधित मामलों की जांच चिकित्सा बोर्ड और विभागीय समिति से कराई जाएगी। इनकी संस्तुति के आधार पर पात्र शिक्षकों और कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन आएगा और स्कूलों में शिक्षण कार्य प्रभावित नहीं होगा।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड मौसम अपडेट: आज नैनीताल समेत छह जिलों में ऑरेंज अलर्ट, शीत दिवस जैसी स्थिति के आसार

दरअसल, यह पहला मौका नहीं है जब इस तरह के निर्देश दिए गए हों। पिछले वर्ष भी विभाग को ऐसे शिक्षकों की पहचान करने को कहा गया था, लेकिन तबादलों के दौरान सूची में भारी संख्या होने के बावजूद अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए उपयुक्त मामलों की पुष्टि नहीं हो पाई। नतीजतन कार्रवाई अधर में लटक गई थी।

यह भी पढ़ें 👉  Nainital: 13 साल बाद कुमाऊं विश्वविद्यालय में नियमित शिक्षक भर्ती शुरू, 35 पदों पर चयन प्रक्रिया तेज

इस बार सरकार ने प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने के संकेत दिए हैं। शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देश दिए हैं कि एक सप्ताह के भीतर पूरी सूची तैयार कर शिक्षा महानिदेशालय को भेजी जाए।

इसके साथ ही विभाग में एक और बड़ी विसंगति पर भी सरकार की नजर गई है। मंत्री ने स्कूलों और कार्यालयों में संबद्ध (अटैच) शिक्षकों और अधिकारियों की सूची भी तलब की है। जानकारी के अनुसार, कई शिक्षक अपनी मूल तैनाती के बजाय अन्य स्कूलों या दफ्तरों में कार्यरत हैं, जबकि कुछ तो अन्य विभागों में भी सेवाएं दे रहे हैं।

यह भी पढ़ें 👉  Nainital: नौकरी दिलाने का झांसा देकर लाखों की ठगी, विधायकों से पहचान बताकर लोगों को फंसाता था आरोपी

सरकार अब ऐसे मामलों पर भी कार्रवाई के मूड में है। माना जा रहा है कि इन कदमों से शिक्षा विभाग में लंबे समय से चली आ रही अनियमितताओं पर लगाम लगेगी और स्कूलों में शिक्षकों की वास्तविक उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी।

ADVERTISEMENTS

You cannot copy content of this page