हल्द्वानी। 35 साल पहले पति अचानक लापता हो गए। तब तलाश थी उनके लौट आने की, लेकिन वक्त गुजरता गया और उम्मीद भी धुंधली होती गई। अब उम्र के इस पड़ाव पर आर्थिक मुश्किलों से जूझ रही वाराणसी की आशा देवी अपनी बेटी के साथ हल्द्वानी पहुंची हैं।
इस बार मकसद पति को ढूंढना ही नहीं, बल्कि उनके पुलिस सेवाकाल से जुड़े उन अधिकारों और लाभों की जानकारी हासिल करना भी है, जिनकी उम्मीद में परिवार ने वर्षों गुजार दिए।
सोमवार को आशा देवी ने एसपी सिटी मनोज कुमार कत्याल से मुलाकात कर अपनी पूरी कहानी बताई। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से गुहार लगाई कि उनके पति सुदर्शन सिंह से जुड़े पुराने विभागीय रिकॉर्ड तलाशे जाएं और यदि नियमानुसार कोई लाभ देय है तो उसे दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जाए।
आशा देवी वाराणसी के चौबेपुर तहसील क्षेत्र के कैथी गांव की रहने वाली हैं। उनके मुताबिक सुदर्शन सिंह वर्ष 1988-89 में जीआरपी में तैनात थे। उस समय उत्तराखंड उत्तर प्रदेश का हिस्सा था। बाद में उनका स्थानांतरण सिविल पुलिस में हुआ और नैनीताल जिले में सिपाही के पद पर तैनाती मिली।
कहानी में मोड़ वर्ष 1991 में आया। आशा देवी के अनुसार तत्कालीन एसएसपी नैनीताल ने किसी मामले में सुदर्शन सिंह को निलंबित कर दिया था। इसके बाद वह मानसिक तनाव में रहने लगे। कुछ समय बाद वह अचानक लापता हो गए। परिवार ने उन्हें काफी तलाशा, रिश्तेदारों और परिचितों से संपर्क किया, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला।
दिन, महीने और फिर साल गुजरते चले गए। देखते ही देखते करीब साढ़े तीन दशक बीत गए, मगर सुदर्शन सिंह की कोई खबर परिवार तक नहीं पहुंची।
न सर्विस नंबर, न पीपीओ, फिर भी उम्मीद कायम
समय बीतने के साथ आशा देवी की मुश्किलें बढ़ती गईं। अब उनके सामने सबसे बड़ी परेशानी यह है कि पति से संबंधित विभागीय दस्तावेज भी उनके पास नहीं हैं। न सर्विस नंबर उपलब्ध है और न ही पीपीओ नंबर। ऐसे में विभागीय रिकॉर्ड तलाशना भी आसान नहीं है।
आशा देवी का कहना है कि आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है और ऐसे समय में पति के सेवाकाल से जुड़े यदि कोई वैधानिक विभागीय लाभ बनते हैं तो उन्हें मिलना चाहिए। इसी उम्मीद के साथ वह अपनी बेटी को लेकर हल्द्वानी पहुंचीं।
पुलिस मुख्यालय और जीआरपी से मांगा गया रिकॉर्ड
एसपी सिटी मनोज कुमार कत्याल ने महिला की समस्या को गंभीरता से लेते हुए बताया कि सुदर्शन सिंह से संबंधित अभिलेखों की जानकारी के लिए जीआरपी और पुलिस मुख्यालय को पत्र भेजा गया है। उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर सुदर्शन सिंह की सेवा और विभागीय स्थिति की जानकारी जुटाई जाएगी। रिकॉर्ड मिलने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
