देहरादून। क्लेमेंटटाउन स्थित नेहरू तिब्बतन स्कूल फाउंडेशन के फुटबॉल ग्राउंड में चल रहे 48वें घूंगटुग टीसुलट्रिम मेमोरियल नेशनल फुटबॉल टूर्नामेंट में लीग चरण के रोमांचक मुकाबलों के बाद सेमीफाइनल की तस्वीर साफ हो गई है। शानदार प्रदर्शन के दम पर डोंडूपलिंग एफसी, शिमला एफसी, क्लेमेंटटाउन एफसी और डेक्यिलिंग एफसी ने अंतिम चार में जगह बना ली है। अब खिताब के लिए इन चारों टीमों के बीच जोरदार मुकाबला देखने को मिलेगा।
टूर्नामेंट का आयोजन तिब्बती समाज के महान गुरु घूंगटुग टीसुलट्रिम की स्मृति में हर वर्ष किया जाता है। इस बार भी देश के अलग-अलग राज्यों में रह रहे तिब्बती समाज के फुटबॉल खिलाड़ियों को प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का मौका दिया गया है। प्रतियोगिता का शुभारंभ 15 अगस्त 2026 को हुआ था और लीग चरण में खिलाड़ियों ने दमदार खेल का प्रदर्शन किया।
प्रतियोगिता का आयोजन लीग-कम-नॉकआउट प्रारूप में किया जा रहा है। इसमें कुल आठ टीमों ने भाग लिया। इनमें शिमला यूनाइटेड एफसी, डेक्यिलिंग स्पोर्टिंग क्लब, लिंगस्टग एफसी, टीसीएच/काइटसेलिंग एफसी, डोंडूपलिंग एफसी, क्लेमेंटटाउन एफसी, हर्बटपुर एससी और डोंडूपलिंग एफसी-बी शामिल हैं। शुरुआती मुकाबलों से ही टीमों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली और हर टीम ने सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए पूरी ताकत झोंक दी।
सेमीफाइनल में आमने-सामने होंगी चार मजबूत टीमें
सेमीफाइनल मुकाबले 21 अगस्त को खेले जाएंगे। पहले सेमीफाइनल में शिमला एफसी और क्लेमेंटटाउन एफसी आमने-सामने होंगी। वहीं दूसरे सेमीफाइनल में डोंडूपलिंग एफसी और डेक्यिलिंग एफसी के बीच भिड़ंत होगी। दोनों मुकाबलों को लेकर खिलाड़ियों के साथ-साथ स्थानीय खेल प्रेमियों में भी खासा उत्साह है।
टूर्नामेंट के मैच कमिश्नर और चीफ रेफरी की जिम्मेदारी डॉ. वीरेन्द्र सिंह रावत संभाल रहे हैं। उनके साथ रोशन चंद, मनोज नेगी, हर्षित चौहान, उत्कर्ष, दोर्जी, विमल रावत और वरुण रेफरी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
डॉ. वीरेन्द्र सिंह रावत वर्ष 1998 से लगातार इस प्रतियोगिता समेत तिब्बती समाज की विभिन्न फुटबॉल प्रतियोगिताओं में रेफरी की भूमिका निभाते आ रहे हैं। अपने अनुशासित रेफरिंग और बेहतरीन संचालन के कारण वह खिलाड़ियों और दर्शकों के बीच खासे लोकप्रिय हैं।
दर्शक प्यार से बुलाते हैं ‘शाहरुख खान’
डॉ. रावत की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि तिब्बती समाज के खेल प्रेमी उनके व्यक्तित्व और हेयर स्टाइल में समानता के चलते उन्हें प्यार से ‘शाहरुख खान’ कहकर पुकारते हैं। मैच के दौरान दर्शक इसी नाम से उनका उत्साह बढ़ाते नजर आते हैं।
आयोजक याशी ने बताया कि क्लेमेंटटाउन में तिब्बती समाज की नींव कई वर्ष पहले बुद्धा मंदिर के आसपास महान गुरु घूंगटुग टीसुलट्रिम के प्रयासों से रखी गई थी। उनकी स्मृति को जीवंत रखने और युवाओं को खेल से जोड़ने के उद्देश्य से हर वर्ष इस फुटबॉल प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है।
