नैनीताल/ओखलकांडा। चार मासूम बच्चों की मां… घर की चारदीवारी में चल रहा पति-पत्नी का विवाद… और फिर एक ऐसी रात, जिसने पूरे परिवार की जिंदगी बदल दी। तल्ला ओखलकांडा की 28 वर्षीय डिक्री देवी की कहानी जितनी दर्दनाक है, उतने ही गंभीर सवाल उसकी मौत के बाद सामने आए हैं। आरोप है कि मामूली कहासुनी के बाद पति भीम सिंह ने डिक्री को लाठी-डंडों से बेरहमी से पीटा और उसकी मौत हो गई। अगले दिन बच्चे मां को सोया समझते रहे। दोपहर बाद जब मां नहीं उठी तो उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े और गांव वालों को घटना की जानकारी हुई।
लेकिन डिक्री की मौत की कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। हल्द्वानी पोस्टमार्टम हाउस पहुंचने पर शव की स्थिति देखकर फोरेंसिक विशेषज्ञ भी हैरान रह गए। शव केवल एक कंबल में लिपटा था, पानी से भीगा हुआ था और दोनों आंखों में कीड़े पड़ चुके थे। शरीर पर जगह-जगह चोट के निशान बताए गए। इसके बाद परिवार ने पुलिस पर शव को मोर्चरी पहुंचाने में करीब 22 घंटे की देरी का आरोप लगाया। पुलिस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए देरी की वजह फॉरेंसिक जांच, वाहन की व्यवस्था और रास्ता बंद होना बताया है।
बहन से फोन पर बात कर रही थी, अचानक कट गया कॉल
21 अगस्त की रात डिक्री अपनी बहन मुन्नी से फोन पर बात कर रही थी। बातचीत के बीच अचानक फोन कट गया। मुन्नी ने दोबारा फोन किया, लेकिन डिक्री से संपर्क नहीं हो सका। परिजनों का आरोप है कि इसी दौरान घर में विवाद हुआ और भीम सिंह ने डिक्री के साथ मारपीट शुरू कर दी।
परिजनों के अनुसार, लाठी-डंडों से हुई मारपीट इतनी बेरहम थी कि डिक्री के शरीर का शायद ही कोई हिस्सा चोट से बचा हो। आरोप है कि रात करीब तीन बजे तक मारपीट होती रही और इसके बाद डिक्री की सांसें थम गईं।
सुबह बच्चे मां के पास पहुंचे, समझा सो रही है
शनिवार की सुबह घर का माहौल बिल्कुल सामान्य लग रहा था। चार मासूम बच्चों को लगा कि उनकी मां सो रही है। वे उसे जगाने के बजाय आसपास ही रहे। लेकिन जब दोपहर तक डिक्री नहीं उठी और शरीर में कोई हलचल नहीं हुई तो बच्चे रोने लगे।
इसी बीच ग्रामीणों को भी भीम सिंह और डिक्री घर में दिखाई नहीं दिए। पड़ोसियों ने बड़े बेटे से जानकारी ली। बच्चे से घटना का पता चलने के बाद ग्रामीण घर पहुंचे। कमरे में डिक्री का शव पड़ा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।
शनिवार शाम करीब पांच बजे खनस्यूं पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की।
दस साल के बेटे ने बताई पिता की करतूत
पुलिस के अनुसार, डिक्री के दस वर्षीय बेटे ने बताया कि शुक्रवार रात उसके माता-पिता के बीच कहासुनी हुई थी। बच्चे के मुताबिक, शनिवार सुबह पिता ने उसे धमकाया और किसी को कुछ न बताने की बात कही। इसके बाद वह घर से फरार हो गया।
सीओ भवाली रविकांत सेमवाल के अनुसार, पुलिस को शनिवार शाम करीब 5:30 बजे घटना की सूचना मिली। पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। घटनास्थल की जांच के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए हल्द्वानी भेजा गया। आरोपी भीम सिंह की तलाश में पुलिस दबिश दे रही है। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारी के बाद हत्या की पूरी वजह और घटनाक्रम सामने आएगा।
गांव वालों ने पहले भी चेताया था
ग्रामीणों का कहना है कि डिक्री और भीम सिंह के बीच विवाद नया नहीं था। तल्ला ओखलकांडा के पूर्व ग्राम प्रधान कमलेश बोहरा के मुताबिक, भीम सिंह शराब का आदी था और नशे में पत्नी के साथ मारपीट करता था। ग्रामीणों ने कई बार उसे समझाया था।
बताया गया कि पहले भी ग्रामीणों के हस्तक्षेप के बाद भीम सिंह ने लिखित माफीनामा दिया था। लेकिन इसके बावजूद कथित घरेलू हिंसा नहीं रुकी। शुक्रवार रात का विवाद डिक्री की जिंदगी का आखिरी विवाद साबित हुआ।
मौत के बाद शव की हालत ने खड़े किए नए सवाल
मामले में सबसे गंभीर सवाल शव को लेकर सामने आए हैं। पोस्टमार्टम हाउस प्रभारी एवं फोरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. एके सिंह के अनुसार, शव बिना कपड़ों के केवल कंबल में लिपटा हुआ था। शव पानी से भीगा हुआ था और दोनों आंखों में कीड़े पड़ चुके थे। उन्होंने बताया कि शरीर पर व्यापक चोटों के निशान थे।
डॉ. सिंह के मुताबिक, किसी आपराधिक मामले में शव को जल्द से जल्द मोर्चरी पहुंचाकर डीप फ्रीजर में रखा जाना चाहिए, ताकि शव सुरक्षित रहे और पोस्टमार्टम में जरूरी साक्ष्य प्रभावित न हों।
पुलिस की सफाई- जांच के बिना शव हटाना संभव नहीं था
परिजनों ने पुलिस पर करीब 22 घंटे की देरी का आरोप लगाया है। इस पर सीओ भवाली रविकांत सेमवाल ने कहा कि महिला के शरीर पर कपड़े नहीं थे, इसलिए उसे कंबल में ढका गया था। पुलिस के मुताबिक देर रात वाहन उपलब्ध नहीं हुआ और सुबह खनस्यूं थाने से वाहन की व्यवस्था की गई।
सीओ ने कहा कि घटनास्थल की फॉरेंसिक जांच पूरी किए बिना शव हटाना उचित नहीं था। हल्द्वानी से फॉरेंसिक टीम को बुलाया गया था। इसके अलावा काठगोदाम में पेड़ गिरने से रास्ता बंद होने के कारण भी शव को मोर्चरी पहुंचाने में देरी हुई। उन्होंने पुलिस पर लगे आरोपों को निराधार बताया और जल्द आरोपी की गिरफ्तारी का दावा किया।
चार बच्चों की आंखों के सामने हमेशा के लिए बुझ गई मां की ममता
डिक्री देवी अपने पीछे चार मासूम बच्चे छोड़ गई है। जिन बच्चों को अगले दिन अपनी मां का हाथ पकड़ना था, वे उसी मां के शव के पास बैठे रहे और उसे सोया समझते रहे। जब सच सामने आया तो उनकी दुनिया ही बदल गई।
अब इस मामले में सिर्फ एक महिला की हत्या की जांच नहीं हो रही, बल्कि घरेलू हिंसा की उस कड़वी हकीकत पर भी सवाल उठ रहे हैं, जिसे ग्रामीण स्तर पर पहले से देखा और समझा जा रहा था। सवाल यह भी है कि अगर पहले की शिकायतों और कथित माफीनामे के बाद स्थिति पर गंभीरता से नजर रखी जाती, तो क्या डिक्री की जिंदगी बचाई जा सकती थी?
