देहरादून। दुनिया के सबसे लोकप्रिय खेल आयोजन माने जाने वाले फीफा वर्ल्ड कप 2026 का आगाज 11 जून से होने जा रहा है। अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा की संयुक्त मेजबानी में आयोजित होने वाला यह महाकुंभ 19 जुलाई 2026 तक चलेगा। इस बीच भारतीय फुटबॉल की लगातार खराब स्थिति को लेकर पूर्व राष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी, रेफरी और अंतरराष्ट्रीय कोच डॉ. विरेन्द्र सिंह रावत का दर्द एक बार फिर सामने आया है।
प्रेस विज्ञप्ति जारी कर डॉ. रावत ने कहा कि विश्व की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाला भारत आज भी फुटबॉल के वैश्विक मंच पर पिछड़ा हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि 150 करोड़ से अधिक आबादी, पर्याप्त संसाधन, मैदान, प्रतिभाशाली खिलाड़ी और खेल सुविधाएं होने के बावजूद भारत फीफा रैंकिंग में काफी पीछे क्यों है और आखिर कब तक देश विश्व कप में जगह बनाने से वंचित रहेगा।
48 टीमों के साथ होगा सबसे बड़ा विश्व कप
डॉ. रावत ने बताया कि फीफा वर्ल्ड कप 2026 इतिहास का सबसे बड़ा विश्व कप होगा, जिसमें पहली बार 48 टीमें हिस्सा लेंगी। इससे पहले वर्ष 2022 तक विश्व कप में 32 टीमें खेलती थीं। इस बार 104 मुकाबले खेले जाएंगे और दुनिया के दिग्गज खिलाड़ी अपने खेल का प्रदर्शन करेंगे।
उन्होंने कहा कि उद्घाटन मुकाबला मैक्सिको सिटी में खेला जाएगा, जबकि फाइनल मुकाबला अमेरिका के न्यूयॉर्क में आयोजित होगा। विजेता टीम को लगभग 430 करोड़ रुपये, उपविजेता को 284 करोड़ रुपये तथा तीसरे स्थान पर रहने वाली टीम को 249 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि मिलेगी।
दिग्गज खिलाड़ियों पर रहेंगी नजरें
विश्व कप में दुनिया के कई स्टार खिलाड़ियों पर फुटबॉल प्रेमियों की नजर रहेगी। इनमें लियोनेल मेसी, किलियन एम्बाप्पे, एरलिंग हालांड, नेमार, क्रिस्टियानो रोनाल्डो, जूड बेलिंगहैम और विनीसियस जूनियर जैसे नाम शामिल हैं।
‘राजनीति की भेंट चढ़ी भारतीय फुटबॉल’
डॉ. रावत ने कहा कि जब 2018 में विश्व कप में टीमों की संख्या बढ़ाकर 48 करने की घोषणा हुई थी, तब उन्हें उम्मीद थी कि भारत ग्रासरूट स्तर पर मजबूत काम करके 2026 विश्व कप के लिए क्वालीफाई कर सकता है। लेकिन उनका आरोप है कि भारतीय फुटबॉल वर्षों से राजनीति, गुटबाजी और स्वार्थ की भेंट चढ़ी हुई है।
उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे देश, जिनकी आबादी भारत के कई राज्यों से भी कम है, विश्व कप में जगह बना रहे हैं, जबकि भारत अभी भी दर्शक बनकर टूर्नामेंट देखने तक सीमित है।
प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग
डॉ. रावत ने प्रधानमंत्री से खेलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की अपील की है। उनका कहना है कि यदि खेल संघों और व्यवस्थाओं में ईमानदार लोगों को जिम्मेदारी दी जाए तथा जमीनी स्तर पर फुटबॉल की नर्सरी विकसित की जाए, तो भारत आने वाले वर्षों में विश्व फुटबॉल में अपनी पहचान बना सकता है।
उन्होंने कहा कि गांव, ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर फुटबॉल को बढ़ावा देने के लिए ठोस योजना बनाने की जरूरत है। यदि खेलों में राजनीति और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जाए तो भारत वर्ष 2034 तक फीफा विश्व कप में खेलने का सपना साकार कर सकता है।
ग्रासरूट विकास पर दिया जोर
डॉ. रावत का मानना है कि केवल बड़े आयोजनों और घोषणाओं से भारतीय फुटबॉल आगे नहीं बढ़ेगी। इसके लिए स्कूल स्तर से प्रतिभाओं की पहचान, बेहतर प्रशिक्षण व्यवस्था, आधुनिक कोचिंग और खिलाड़ियों को अवसर देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि देश में फुटबॉल समेत अन्य खेलों के विकास के लिए नई खेल नीति को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए, तभी भारत खेल महाशक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ सकेगा।

