शादी डॉट कॉम के जरिए हुई थी महिला से मुलाकात, खुद को ड्रग इंस्पेक्टर बताकर शादी और स्वास्थ्य विभाग में नौकरी का दिया भरोसा, नेपाल भागने की फिराक में था आरोपी
देहरादून। स्वास्थ्य विभाग में सरकारी नौकरी लगवाने का झांसा देकर एक नर्सिंग अधिकारी से करीब 32 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने के आरोपी को नेहरू कॉलोनी पुलिस ने पिथौरागढ़ से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक आरोपी नेपाल भागने की तैयारी में था और गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था। पुलिस टीम ने उसे पिथौरागढ़ के एंचोली क्षेत्र से गिरफ्तार करने के बाद ट्रांजिट रिमांड पर देहरादून लाया।
पुलिस के अनुसार, आरोपी की पहचान चारू चंद्र जोशी निवासी बागेश्वर के रूप में हुई है। जांच में उसके खिलाफ नौकरी लगवाने के नाम पर धोखाधड़ी समेत अन्य आपराधिक मामलों में आधा दर्जन से अधिक मुकदमे दर्ज होने की बात सामने आई है। पुलिस अब आरोपी के पुराने मामलों, उसके संपर्कों और ठगी की रकम के इस्तेमाल की जांच कर रही है।
शादी डॉट कॉम पर हुई मुलाकात, फिर नौकरी का दिया झांसा
सीओ नितिन लोहानी के मुताबिक, 17 अगस्त को एक निजी अस्पताल में नर्सिंग अधिकारी के पद पर कार्यरत महिला ने नेहरू कॉलोनी थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। महिला की मुलाकात आरोपी चारू चंद्र जोशी से शादी डॉट कॉम के माध्यम से हुई थी।
आरोप है कि बातचीत के दौरान चारू चंद्र ने खुद को स्वास्थ्य विभाग में ड्रग इंस्पेक्टर बताया और विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से अपनी अच्छी पहचान होने का दावा किया। उसने महिला से शादी करने का भरोसा दिलाने के साथ ही स्वास्थ्य विभाग में सरकारी नौकरी लगवाने का भी आश्वासन दिया।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी के झांसे में आने के बाद महिला ने अलग-अलग तारीखों में उसे करीब 32 लाख रुपये दे दिए। इसके बाद जब नौकरी नहीं लगी और आरोपी की बातों पर संदेह होने लगा तो महिला ने पुलिस से शिकायत की।
शिकायत मिलते ही शुरू हुई आरोपी की तलाश
महिला की तहरीर के आधार पर नेहरू कॉलोनी पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी देहरादून ने पुलिस टीम को आरोपी की जल्द गिरफ्तारी के निर्देश दिए।
पुलिस ने सर्विलांस और अन्य माध्यमों से आरोपी की तलाश शुरू की। जांच के दौरान उसके पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड और ठगी के अन्य मामलों में संलिप्तता की जानकारी भी सामने आई।
इसी बीच पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी पिथौरागढ़ के रास्ते नेपाल भागने की तैयारी कर रहा है। इसके बाद नेहरू कॉलोनी पुलिस ने पिथौरागढ़ पुलिस से समन्वय स्थापित कर एक टीम वहां भेजी।
नेपाल भागने से पहले एंचोली में दबोचा
पुलिस टीम ने 21 अगस्त को पिथौरागढ़ के एंचोली क्षेत्र में आरोपी को पकड़ लिया। पुलिस के अनुसार, वह लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था और गिरफ्तारी से बचने का प्रयास कर रहा था। आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर देहरादून लाया गया, जहां उससे पूछताछ की जा रही है।
पुलिस का कहना है कि आरोपी के खिलाफ नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी और अन्य आपराधिक मामलों में छह से अधिक मुकदमे दर्ज होने की जानकारी मिली है। इन मामलों का भी रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है।
कभी स्वास्थ्य विभाग में संविदा फार्मासिस्ट था आरोपी
जांच में आरोपी के अतीत से जुड़ी एक अहम जानकारी भी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, चारू चंद्र जोशी वर्ष 2016 में स्वास्थ्य विभाग में संविदा पर फार्मासिस्ट के पद पर काम कर चुका है। विभाग में काम करने के दौरान उसे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और अधिकारियों से जुड़ी जानकारी हासिल हुई थी।
पुलिस के अनुसार, वर्ष 2022 में नैनीताल में धोखाधड़ी और दुष्कर्म के मामलों में जेल जाने के बाद उसे स्वास्थ्य विभाग की नौकरी से हटा दिया गया था। इसके बाद उसने अपनी पूर्व सरकारी नौकरी और विभागीय जानकारी को ही ठगी का जरिया बना लिया।
विभागीय पहचान का इस्तेमाल कर युवाओं को फंसाता था
पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि स्वास्थ्य विभाग में संविदा फार्मासिस्ट के रूप में काम करने के कारण उसे विभाग के कामकाज और अधिकारियों की जानकारी थी। इसी अनुभव का फायदा उठाकर वह खुद को स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत बताता और अधिकारियों से करीबी संबंध होने का दावा करता था।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं और अन्य लोगों को सरकारी नौकरी लगवाने का भरोसा देकर उनसे मोटी रकम वसूलता था। मौजूदा मामले में महिला से प्राप्त रकम के अधिकांश हिस्से को उसने अपने खिलाफ दर्ज पुराने मामलों के कथित समझौते में संबंधित लोगों को देने की बात कही है।
हालांकि पुलिस उसके इस दावे को अभी अंतिम सत्य नहीं मान रही है। रकम के लेनदेन और उसके इस्तेमाल से संबंधित दस्तावेजों एवं अन्य साक्ष्यों का सत्यापन किया जा रहा है।
परीक्षा एजेंसी या चयन प्रक्रिया से जुड़े व्यक्ति का संपर्क नहीं मिला
पुलिस की अब तक की जांच में आरोपी के किसी परीक्षा एजेंसी या सरकारी भर्ती की चयन प्रक्रिया से जुड़े व्यक्ति के संपर्क में होने का कोई साक्ष्य नहीं मिला है। पुलिस के अनुसार, प्रथम दृष्टया मामला व्यक्तिगत स्तर पर सरकारी नौकरी का झांसा देकर की गई धोखाधड़ी का सामने आया है।
अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने इससे पहले कितने लोगों को नौकरी का झांसा देकर रकम वसूली, उसके नेटवर्क में और कौन लोग शामिल हैं और ठगी से हासिल रकम का इस्तेमाल कहां-कहां किया गया।
